डॉ प्रेमलाल ने शोध को प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचाया      Publish Date : 13/05/2026

डॉ प्रेमलाल ने शोध को प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचाया

जैव विविधता संरक्षण किसानों के अधिकारों की रक्षा और कृषि नीति निर्माण में योगदान देने वाले प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रेमलाल गौतम के नाम उपलब्धियों की लंबी फेहरिस्त है। यही वजह है कि कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें हाल ही में पद्मश्री के लिए नामित किया गया है। शोध को प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचाने वाले डॉक्टर गौतम के कार्यों को कृषि जगत में प्रेरणा के रूप में देखा जाता है। वह अभी बिहार के समस्तीपुर स्थित डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूषा के कुलाधिपति हैं।

हिमाचल प्रदेश के पालमपुर स्थित बिन्दरावन निवासी डॉ गौतम बताते हैं कि ग्लोबल डायवर्सिटी ट्रस्ट में चार साल तक सदस्य रहने के दौरान किसानों को अधिकार दिलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है। डॉ गौतम ने गेहूं कंगनी, फॉक्सटेल, मिलिट स्वैबीन, राइसबीन, चोला अमरथोलाई तथा कुट्टू बकविद सहित बारा उन्नत किस्मों के विकास में योगदान दिया है। इनमें गेहूँ की किस्म यूपी टू सिक्स टू, पूर्वी भारत तथा पड़ोसी देशों में व्यापक रूप से अपनाई जा रही है।

इसी प्रकार यूपी 2003 व यूपी 368 यूपी में और यूपी 1109 उत्तराखंड तत्कालीन उत्तर प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में किसानों के बीच लोकप्रिय हुई। उन्होंने 2008 में बासमती चावल के मानकों के पुनर्निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के संपर्क में रहे

डॉ गौतम कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों डॉ नॉर्मन ई बारलाव, डॉ एम एस स्वामीनाथन, डॉ एच बी सिंह, डॉ सुरेन्द्र के बंसल, डॉ बीएल चोपड़ा, डॉ के पी एल जैन, डॉ संजय राजाराम समेत अन्य के संपर्क में रहे।

डॉ॰ पीएल गौतम को ये प्रमुख पुरस्कार भी मिले-

  • डॉ॰ हरभजन सिंह स्मृति पुरस्कार।
  • लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल पुरस्कार।
  • इन्दिरा गांधी प्रदर्शनी पुरस्कार।