
धूप और गर्मी में खेलते बच्चों की सेहत का ध्यान Publish Date : 12/05/2026
धूप और गर्मी में खेलते बच्चों की सेहत का ध्यान
डॉ0 दिव्यांशु सेंगर एवं मुकेश शर्मा
गर्मियों के इस मौसम में हम बड़े तो फिर भी सेहत का ख्याल रख लेते हैं, लेकिन इस दौरान भी बच्चों का ध्यान केवल खेलने-कूदने में ही रहता है। इसी कारण वह गर्मियों में अधिक कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में हमारे डॉक्टर दिव्यांशु सेंगर बता रहे हैं कि गर्मी के मौसम में अपने बच्चे की देखभाल कैसे करें कि वह स्वस्थ बना रहे?
गर्मियों की छुट्टियां बच्चों के लिए खेल-कूद और मस्ती करने का समय होती हैं, लेकिन इस दौरान निरंतर बढ़ता तापमान बच्चों की सेहत के लिए गंभीर चुनौतियां भी लेकर आता है। अक्सर माता-पिता यह मान लेते हैं कि गर्मी का प्रभाव बच्चों पर भी वैसा ही होता है जैसा बड़ों पर, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार बच्चे ‘छोटे वयस्क’ नहीं होते। बच्चों के शरीर की बनावट और उनकी आंतरिक प्रणाली बड़ों से काफी अलग होती है। उनके शरीर में गतिविधि के दौरान वजन के अनुपात में अधिक गर्मी पैदा होती है और उनके पसीने की ग्रंथियां भी अभी तक पूरी तरह से विकसित नहीं हो पातीं हैं, जिससे वह गर्मी को कुशलता से अपने शरीर से बाहर नहीं निकाल पाते हैं।
प्यारे लाल शर्मा, जिला अस्पताल मेरठ के मेडिकल ऑफिसर डॉ0 दिव्यांशु सेंगर कहते हैं कि ‘विशेष रूप से छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में अपने आपको स्वयं ठंडा रखने की क्षमता लगभग शून्य होती है। वहीं, इससे थोड़े बड़े बच्चे खेल में इतने खो जाते हैं कि वह प्यास लगने या थकान महसूस होने पर भी रुकना पसंद नहीं करते।’ ऐसे में हम उन्हें तो नहीं रोक सकते, लेकिन इसकेे लिए कुछ सेफ्टी टिप्स को जरूर फॉलो कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में माता-पिता कैसे अपने बच्चों को गर्मी के मौसम से बचाएं, आइए डॉक्टर से ही जानते हैं इसके बारे में सबकुछ।

सुरक्षा की सबसे पहली कड़ी है हाइड्रेशन
गर्मी से लड़ने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियार सही हाइड्रेशन होता है। हमें यह समझना होगा कि प्यास लगना डिहाइड्रेशन का एक देर से आने वाला संकेत है। इसका मतलब है कि जब बच्चे को प्यास महसूस होती है, तब तक उसका शरीर पहले ही पानी की कमी से जूझना शुरू कर चुका होता है। इसलिए डॉक्टर के बताए और नीचे दिए गए बिंदुओं को ध्यान में रखें जैसे-
- बच्चों को प्यास लगने का इंतजार किए बिना प्रत्येक 20 मिनट में पानी पीने के लिए कहें।
- एक साल से छोटे बच्चों के लिए मां का दूध या फार्मूला ही पर्याप्त होता है, लेकिन उससे बड़े बच्चों के लिए सादा पानी सबसे अधिक बेहतर माना जाता है।
- अक्सर माता-पिता बच्चों को कोल्ड ड्रिंक्स या मीठे सोडा देते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट करने के बजाय डिहाइड्रेशन को और बढ़ावा देते हैं।
- अगर बच्चा धूप में बहुत अधिक सक्रिय है, तो उसे नारियल पानी या कम चीनी वाला इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक दिया जा सकता है, ताकि बच्चे के शरीर में नमक और खनिजों का उचित संतुलन बना रहे।
धूप से बचाव के लिए अपनाएं यह तरीके
सूरज की हानिकारक किरणों से बचने के लिए सिर्फ सनस्क्रीन लगाना ही काफी नहीं होता है। हमारे डॉक्टर ने इसके सम्बन्ध में कुछ खास टिप्स दी हैं, जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैं। जैसे-
- सबसे पहले, धूप के चरम समय यानी सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच बच्चों को बाहर खेलने से रोकें।
- बाहर जाने का सबसे सुरक्षित समय सुबह जल्दी या देर शाम का होता है।
- अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो त्वचा पर कम से कम SPF 30 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन लगाएं, लेकिन ध्यान रहे कि इसे बाहर निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले लगाया जाए और हर दो घंटे में दोबारा लगाया जाए।
- गर्मी के लिए बच्चों के कपड़ों का चुनाव करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए बच्चों को हल्के रंग के, ढीले-ढाले और पूरी बाजू के सूती कपड़े पहनाएं जो कि उनके पसीने को अच्छी तरह से सोख सकें और वायु का संचार भी बेहतर बनाए रखें।
- एक चौड़ी किनारी वाली टोपी और छांव में हर आधे घंटे में लिया गया विश्राम बच्चों को हीट स्ट्रोक से बचा सकता है।
- याद रखें कि बादल वाले दिनों में भी पराबैंगनी किरणें उतनी ही सक्रिय हो सकती हैं, इसलिए इसके प्रति सावधानी में कोई कमी न आने दें।
बच्चों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था
डॉक्टर बताते हैं कि अगर खेलते समय बच्चा अचानक सुस्त पड़ने लगे, उसे चक्कर आएं या शरीर बहुत गर्म हो जाए, तो इसे हीट एग्जॉशन का संकेत माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत किसी ठंडी या छायादार जगह पर लेकर जाएं और उसके शरीर से अतिरिक्त कपड़े हटा दें। ठंडे (बर्फ जैसे नहीं, बल्कि सामान्य ठंडे) गीले कपड़ों को उसकी गर्दन, बगल और माथे पर रखें। बच्चे को धीरे-धीरे घूंट-घूंट कर पानी पिलाएं।
एक और बहुत जरूरी बात यह है कि कभी भी, किसी भी परिस्थिति में बच्चे को खड़ी कार के अंदर अकेला न छोड़ें। कार के भीतर का तापमान बाहर की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है और यह बच्च्े के लिए कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित भी हो सकता है।
डॉक्टर की बताई इन बातों पर भी दें ध्यान
आखिर में, बच्चों के आहार पर भी ध्यान दें। गर्मी में पाचन शक्ति थोड़ी धीमी हो जाती है, इसलिए उन्हें भारी और तैलीय भोजन देने के बजाय हल्का और सुपाच्य भोजन दें। ताजे फल जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो, जैसे तरबूज, खीरा और संतरा, उनके लिए बेहतरीन स्नैक्स हैं।
बच्चे के खेल शुरू करने से लगभग आधा घंटा पहले दिया हल्का नाश्ता कराएं। यह उन्हें एनर्जी भी देगा और पाचन तंत्र पर बोझ भी नहीं डालेगा। बच्चों की सेहत की कमान आपके हाथों में है, इसलिए उनकी सक्रियता के साथ-साथ उनके आराम और सुरक्षा का तालमेल बनाए रखें।

लेखक: डॉ0 दिव्यांशु सेंगर, प्यारे लाल शर्मां, जिला चिकित्सालय मेरठ मे मेडिकल ऑफिसर हैं।
