
पशुपालनः डेयरी उद्योग के लिए लाभकारी है भैंस की यह नस्ल Publish Date : 17/01/2026
पशुपालनः डेयरी उद्योग के लिए लाभकारी है भैंस की यह नस्ल
डॉ0 डी. के. सिंह एवं अन्य
हमारे पशु विशेषज्ञ बता रहे हैं कि कौन सी नस्ल की है यह भैंस और क्या है इसकी विशेषताएं एवं लाभ-
देश के किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी आमदनी का बहुत अच्छा माध्यम बना रहे हैं। आधुनिकता के इस दौर में अब किसान केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि दूध व्यवसाय (डेयरी) की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि आज अधिक दूध देने वाली पशु नस्लों की मांग लगातार बढ़ रही है। अगर आप भी डेयरी व्यवसाय शुरू करने या अपने पशुधन को और बेहतर बनाने की सोच रहे हैं, तो जफराबादी भैंस आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।
यह भेंस प्रतिदिन 15-16 लीटर तक दूध देने में समक्ष मानी जाती है। आज के अपने इस लेख में हम अपने पशु विशेषज्ञ से जानते हैं कि जफराबादी भैंस क्यों किसानों के लिए किसी “खजाने” से कम नहीं है।
कम मेहनत में अधिक मुनाफा
कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा देने वाली यह भैंस नस्ल प्रतिदिन 15 से 16 लीटर तक दूध देती है। इसी साथ ही इसके दूध में वसा यानी फैट की मात्रा भी अधिक होती है, जिससे बाजार में दूध का बेहतर दाम मिलता है। इसके दूध में फैट की मात्रा अधिक होने के कारण घी और अन्य दुग्ध उत्पाद बनाने में भी यह नस्ल बेहद उपयोगी मानी जाती है। यही कारण है कि डेयरी से जुड़े किसान भैंस की इस नस्ल को प्राथमिकता दे रहे हैं।
किन राज्यों में अधिक पाली जाती है जाफराबादी भैंस

जफराबादी भैंस का मूल स्थान गुजरात के जाफराबाद क्षेत्र को माना जाता है। हालांकि, समय के साथ यह नस्ल अब देश के कई अन्य राज्यों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में किसान बड़े पैमाने पर जफराबादी भैंस का पालन कर रहे हैं। इस नस्ल की खास बात यह है कि यह अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में खुद को आसानी से ढाल लेती है। चाहे गर्मी हो या ठंड, जफराबादी भैंस हर मौसम में अच्छी तरह से उत्पादन देने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि यह नस्ल अन्य भैंसों की तुलना में अधिक भरोसेमंद मानी जाती है।
जाफराबादी भैंस के रखरखाव में कम खर्च
किसानों के लिए किसी भी पशु नस्ल का चयन करते समय उसका रखरखाव सबसे बड़ा सवाल होता है। जफराबादी भैंस इस मामले में भी किसानों को निराश नहीं करती। इस नस्ल का रखरखाव ज्यादा महंगा नहीं होता और यह सामान्य हरा चारा, सूखा भूसा और संतुलित आहार में भी अच्छी तरह से स्वस्थ रहती है।
इसके अलावा जफराबादी भैंस में बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है। इससे पशु चिकित्सकीय खर्च कम आता है और किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन हासिल कर पाते हैं। यही कारण है कि सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए भी यह नस्ल उपयुक्त मानी जाती है।
जाफराबादी भैंस की बाजार कीमत और मुनाफा
अगर जफराबादी भैंस की कीमत की बात करें, तो बाजार में इसकी कीमत करीब 80 हजार से 1 लाख रुपए तक हो सकती है। पहली नजर में यह कीमत थोड़ी ज्यादा लग सकती है, लेकिन जब इसकी दूध देने की क्षमता और लंबे समय तक उत्पादन को देखा जाता है, तो यह निवेश पूरी तरह से फायदे का सौदा साबित होता है। किसान दूध बेचकर कुछ ही वर्षों में अपनी लागत निकाल लेते हैं और उसके बाद उन्हें शुद्ध मुनाफा मिलने लगता है। अधिक फैट वाले दूध के कारण डेयरी संचालकों को बेहतर रेट भी मिल जाता है, जिससे आमदनी में सीधा इजाफा होता है।
डेयरी व्यवसाय के लिए बेहतरीन ऑप्शन
जिन किसानों के पास सीमित जमीन है या जो खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आय का जरिया तलाश रहे हैं, उनके लिए जफराबादी भैंस एक शानदार ऑप्शन साबित हो सकती है। कम लागत, ज्यादा दूध उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह नस्ल डेयरी व्यवसाय को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकती है।
कुल मिलाकर कहा जाए, तो जफराबादी भैंस आज के दौर में पशुपालन से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ाने वाले किसानों के लिए एक भरोसेमंद और लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है।
जफराबादी भैंस के संबंध में सामान्य रूप से पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब
प्रश्न 1: जफराबादी भैंस रोज कितने लीटर दूध देती है?
उत्तरः जफराबादी भैंस एक उच्च दुग्ध उत्पादन वाली नस्ल मानी जाती है। सही देखभाल और संतुलित आहार मिलने पर यह भैंस रोजाना औसतन 15 से 16 लीटर तक दूध देने में सक्षम होती है।
प्रश्न 2: जफराबादी भैंस किन राज्यों में अधिक पाली जाती है?
उत्तरः जफराबादी भैंस का मूल स्थान गुजरात का जाफराबाद क्षेत्र है। वर्तमान समय में यह नस्ल उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
प्रश्न 3: जफराबादी भैंस के दूध में फैट कितना होता है?
उत्तरः इस भैंस के दूध में वसा (फैट) की मात्रा सामान्य भैंसों की तुलना में अधिक होती है। यही कारण है कि इसके दूध से बने घी और अन्य दुग्ध उत्पादों का बाजार मूल्य अधिक मिलता है।
प्रश्न 4: जफराबादी भैंस का रखरखाव कितना महंगा होता है?
उत्तरः जफराबादी भैंस का रखरखाव ज्यादा महंगा नहीं होता। यह हरा चारा, सूखा भूसा और सामान्य संतुलित आहार में भी अच्छी तरह स्वस्थ रहती है। साथ ही, इसमें बीमारियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी मानी जाती है।
प्रश्न 5: जफराबादी भैंस की बाजार कीमत कितनी है?
उत्तर: बाजार में जफराबादी भैंस की कीमत उसकी उम्र, स्वास्थ्य और दूध देने की क्षमता के आधार पर लगभग 80 हजार से 1 लाख रुपए तक हो सकती है।
प्रश्न 6: क्या जफराबादी भैंस डेयरी व्यवसाय के लिए भी लाभकारी होती है?
उत्तरः हां, जफराबादी भैंस डेयरी व्यवसाय के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती है। अधिक दूध उत्पादन, ज्यादा फैट और लंबे समय तक उत्पादन देने की क्षमता के कारण किसान कुछ ही वर्षों में अपनी लागत निकालकर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
प्रश्न 7: सीमित जमीन वाले किसानों के लिए यह नस्ल कितनी उपयोगी रहती है?
उत्तरः जिन किसानों के पास सीमित जमीन है या जो खेती के साथ अतिरिक्त आय का जरिया तलाश रहे हैं, उनके लिए जफराबादी भैंस एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है।
लेखकः प्रोफेसर डी. के. सिंह, पशु चिकित्सा महाविद्यालय, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मोदीपुरम, मेरठ।
