अच्छे दुधारू पशुओं की नस्ल एवं शारीरिक वनावट के आधार पर पहचानः      Publish Date : 09/12/2025

अच्छे दुधारू पशुओं की नस्ल एवं शारीरिक वनावट के आधार पर पहचानः

                                                                                                                                                                         डॉ0 डी. के. सिंह एवं डॉ0 पूतान सिंह

पशु खरीदते समय अच्छे दुधारू पशुओं की नस्ल एवं शारीरिक वनावट के आधार पर उनकी पहचान के आसान तरीके-

डेयरी व्यवसाय में अच्छे पशु की पहचान करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक है। वैसे तो पशुओं का चुनाव करने में पशुओं के रिकार्ड काफी महत्वपूर्ण व उपयोगी होते हैं, जिनमे पशु की जन्मतिथि, प्रथम ब्यॉत के समय उम्र तथा दूध उत्पादन से सम्बंधित ऑकडे दर्ज रहते है साथ ही पशु के स्वास्थ्य से संबंधित ऑकडे भी पशुओं के रिकार्ड में दर्ज किये जाते है। परंतु भारत जैसे देश में संगठित डेयरी फॉर्मों के अलावा अन्यत्र पशुपालकों द्वारा उक्त रिकार्ड नहीं रखे जाते है।

परिणाम स्वरूप पशुपालाकों को नये पशु खरीदते समय पशु के बाहरी लक्षणों तथा क्रय किये जाने वाले पशु की नस्ल के लक्षणों को देखकर ही खरीदारी की जाती है। दुधारू पशुओं की खरीद समान जलवायु वाले स्थानों से ही करनी चाहिए। जिससे कि पशु को नये स्थान पर आने पर जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना न करना पडे।

किसी पशु को पशु मेले या पशु हाट से खरीदना वास्तव में एक कला होती है। यद्यपि पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु स्वयं अपनी देखरेख में तैयार करने चाहिए क्योंकि पशुपालक के पास अपनी नर व मादा पशु का पूरा रिकार्ड रहता है तथापि आर्थिक कारणों से अधिकांश पशुपालक स्वयं नये पशु तैयार नहीं करते तथा अन्य जगह से नये ब्यॉत वाले पशु खरीदकर लाते हैं

पशुओं को पशु हाट से खरीदते समय निम्नलिखित सावधानियॉ को अपनाना चाहिए-

                                                            

1. पशुओं को पशु नस्ल के लक्षणों तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता के आधार पर खरीदना चाहिए।

2. यदि किसी व्यवसायिक डेयरी फार्म से पशु क्रय किया जाना है तो उस पशु की हिस्ट्रीशीट की जानकारी देखने के बाद ही पशु की खरीदारी की जानी चाहिए।

3. सामान्यतः पशु को प्रथम ब्यॉत या द्वितीय ब्यॉत के एक माह बाद दुग्ध उत्पादन देखकर ही खरीदना चाहिए।

4. पशु को तीन बार दुग्ध दोहन कराने तथा तीनों का औसत दुग्ध उत्पादन पशु के दुग्ध उत्पादन क्षमता का एक वास्तविक ऑकडा प्रदान करता है।

5. ऐसे पशुओं को खरीदना चाहिए जो स्वभाव से शान्त तथा किसी भी व्यक्ति से दूध दोहन करने पर शान्त रहे।

6. सामान्तः पशुओं को नवम्बर व दिसम्बर माह में क्रय करना चाहिए।

7. पशुओं को किसी भरोसेमंद फार्म या व्यवसायी से खरीदना चाहिए।

8. उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाले, स्वस्थ तथा हाल ही में व्यॉत हुये पशुओं को यदि उपलब्ध हो तो पशु चिकित्सक के मार्गदर्शन में खरीदना चाहिए।

वाहय शारीरिक लक्षणों के आधार पर अच्छे पशुओं की पहचान-

                                                         

वाहय शरीरिक लक्षणो तथा विभिन्न अंगो को देखकर पशु का चुनाव करना चाहिए। वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न शारीरिक बनावट तथा अंगों को निश्चित अंक देकर पशु चयन को करने की सलाह दी गई है। विभिन्न शारीरिक मापदंड तथा उनको दिये गये अधिकतम अंक निम्नानुसार है।

1. शारीरिक गठन (अधिकतम अंक 15)

पशु का शारीरिक गठन वास्तव में पूरे पशु की शारीरिक स्थिति को दर्शाता है पशु के शारीरिक गठन को दूर से ही पहचाना जा सकता है। शारीरिक गठन में सबसे महत्वपूर्ण भाग पुठ्ठा गाय का कद तथा नस्ल के लक्षण क्रमशः होते है गाय के पुठ्ठे सामान्यतः लंबे चौडे तथा समान लेवल के होने चाहिए क्योंकि पुठ्ठे गाय के अयन को शारीरिक ढॉचे से जोडते हैं जिसके कारण अयन लंबा चौडा एवं समान लेवल पर रहता है।

पशु की कद उसकी ऊॅचाई एवं पैरो की लंबाई से नापा जाता है कद ऊॅचा होने पर अयन की ऊॅचाई बढ जाती है जिससे गाय बडी हो जाती है अधिक मात्रा में आहार लेती है तथा परिणाम स्वरूप अधिक दुग्ध उत्पादन करती है।

गाय के दुधारू लक्षणो में गाय का आकार आगे की ओर चौडा तथा पीछे की ओर संकरा होता है शरीर की त्वचा मुलायम व चमकदार होती है। दुधारू लक्षणों में महत्व के अनुसार कोणीय विन्यास, पसलियॉ (Ribs), जॉघ, कंधे, गर्दन व जबडे का निचला हिस्सा क्रमशः होते है। अच्छे पशुओं में गर्दन लम्बी, कंधे नुकीले तथा उन पर चर्बी नहीं होती है। पशु की जॉघ पतली, घुमादार व अतिरिक्त वसा रहित होनी चाहिए। पशु की त्वचा पतली, ढीली तथा लचीली होनी चाहिए।

3. दैहिक क्षमता (10 अंक)

दैहिक क्षमता को सामान्यतः पशु के द्वारा अधिक भोजन ग्रहण करने के साथ जोडकर देखा जाता है क्योंकि अधिक भोजन ग्रहण करने पर अधिक दूध उत्पादन करने की संभावना होती है। दैहिक क्षमता को पशु शरीर की लम्बाई एवं गहराई के अनुपात में देखा जाता है। सामान्य भाषा में पशु के पेट की लम्बाई, चौडाई व गहराई को प्रदर्शित करने के लिए दैहिक क्षमता का प्रयोग किया जाता है। अच्छे पशु छाती के भाग में चौडे, पसलियॉ पीछे की ओर मुडी और गहरी होती है।

पशु की दैहिक क्षमता

1. पैर और टॉगें (15 अंक): शरीर के इन भागों का मूल्यांकन कठिन होता है। शरीर के ये भाग पशु के विभिन्न क्रियाकलापों पर सीधा प्रभाव डालते है। इन भागों के मूल्यांकन में महत्व के आधार पर टॉगे पिछले पैर (पीछे एवं पार्श्व से देखने पर) घुटने तथा खुर होते है। आदर्श पशु में टॉगों की खुर छोटे तथा ऐडी गहरी होती है। पिछले पैर चौडे, सीधे तथा टखने के साथ सामान्यतः जुडे होते हैं। आदर्श पैर पशु के चलने पर सीधे दिखाई पडते हैं।

2. अयन (40 अंक): पशु शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग अयन होता है। दुधारू पशुओं का मुख्य कार्य दुग्ध उत्पादन होता है। अतः दुग्ध स्त्रवण भाग (अयन) पर सर्वाधिक ध्यान देना चाहिए। कई वर्षाे तक अधिक उत्पादन के तनाव को सहन करने के लिए अयन शरीर से मजबूती से जुडा, अच्छे आकार का एवं संतुलित होना चाहिए।

अयन का अगला भाग मध्यम लम्बाई का, मजबूती से शरीर के ढॉचे से जुडा हुआ होना चाहिए। यह अयन के पिछले हिस्से से एक समान चौडाई पर संतुलित होना चाहिए। अयन का अगला हिस्सा पशु के चलने पर बहुत थोडा हलना चाहिए।

अयन का पिछला हिस्सा ऊॅचा, चौडा, चिकना तथा गहरा होना चाहिए। पिछले अयन के दोनों अर्धभाग समान आकार तथा चौडाई के (ऊपर से नीचे तक) होने चाहिये। अयन में जुडे सभी थन समान आकार के लगभग 1.5 इंच से 2.5 इंच लम्बे होने चाहिए। सभी थन एक समान दूरी पर अयन के चारो कोनों पर जुडे रहने चाहिए। सभी थन अयन के दूध से खाली होने पर अंदर की ओर हल्के से मुडे रहने चाहिए तथा अयन दूध से भरने पर नीचे की ओर सीधे होने चाहिए। अयन की त्वचा मुलायम, ढीली एवं नर्म होनी चाहिए। अयन में दूध की शिरा बडी एवं मोटी होना अच्छे दुग्ध उत्पादन का प्रतीक होती है। अयन का मूल्यॉकन करते समय पशु की उम्र व ब्यॉत का भी ध्यान रखना चाहिए क्योंकि पशु की उम्र बढने पर अयन लंबा तथा गहरा हो जाता है।

पशुपालक किसानों को पशु चयन करते समय कई पशुओं का शारीरिक लक्षणों के आधार पर (अंको की सहायता से) तुलनात्मक मूल्यॉकन करना चाहिए। इस तुलनात्मक मूल्यॉकन में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले पशु की खरीदी करना चाहिए। पशुपालक किसान यदि पशु की शारीरिक लक्षणों के आधार पर नवीन पशुओं की खरीद करते है तो निश्चित रूप से अच्छी गुणवत्ता के पशु खरीद पायेंगे एवं अपनी आर्थिक आमदनी को अधिक दुग्ध उत्पादन द्वारा बढा पायेंगे।

लेखकः डॉ0 डी. के. सिंह, सरइार वल्लभभई पटेल कृषि एवं प्रौधेगिक विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा महाविद्यालय में कार्यरत हैं।