प्राकृतिक खेती में सफलता      Publish Date : 29/06/2026

            प्राकृतिक खेती में सफलता

                                                                                                      प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य

प्राकृतिक खेती को अपनाकर सुमित्रा बाई ने घटाई लागत, बढ़ाई फसल की गुणवत्ता-

मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के विकासखंड गंज बासौदा के ग्राम सुमेर दांगी निवासी सुमित्रा बाई ने अपनी जमीन पर प्राकृतिक तरीके से खेती शुरूआत की। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत जैसी प्राकृतिक दवाओं का उपयोग करके अपनी फसलों की गुणवत्ता में सुधार किया और इसके साथ ही खेती में लगने वाली उनकी लागत काफी कम हुई है।

श्रीमती सुमित्रा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अंतर्गत समूह में सचिव के पद पर कार्यरत हैं तथा कृषि विभाग के द्वारा संचालित ‘आत्मा परियोजना’ के माध्यम से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत कृषि सखी के रूप में भी चयनित की गई हैं। श्रीमति सुमित्रा बाई अपने खेत में मूंग, गेहुं सहित विभिन्न प्रकार की मौसमी सब्जियों जैसे लौकी, टमाटर आदि प्राकृतिक विधि से उत्पादन कर रही हैं। उनके पास पर्याप्त सिंचाई साधन के रूप मे केवल एक कुआं व बोर ही उपलब्ध है।

                                  

श्रीमती सुमित्रा बाई के पास 3 गाय भी हैं जिनसे प्राप्त गोबर का उपयोग वह जैविक दवा बनाने एवं गोबर की खाद बनाने में करती है। वह स्वयं तो प्राकृतिक तरीके से खेती कर ही रहीं है साथ ही अन्य किसानो को भी प्राकृतिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहीं हैं। उन्होंने जीवामृत और बीजामृत जैसी प्राकृतिक दवाओं का उपयोग करके अपनी फसलों को स्वस्थ और मजबूत बनाया। उन्होंने घर पर ही इन दवाओं का निर्माण शुरू किया, जिससे उन्हें लागत भी काफी कम हो गई है।

अन्य किसानों के लिए एक भी एक प्रेरणा स्रोत-

श्रीमती सुमित्रा की कहानी से पता चलता है कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि इससे किसानों को भी आर्थिक लाभ हो सकता है। श्रीमति सुमित्रा बाई की कहानी से प्रेरणा लेकर अब अन्य किसान भी प्राकृतिक दवायें घर पर तैयार करके अपनी लागत कम कर सकते हैं और साथ ही अपनी फसलों की गुणवत्ता को बढ़ा सकते हैं। इनकी कहानी प्रेरणादायक है और अन्य किसानों के लिए एक उदाहरण के रूप में काम कर सकती है। उनकी मेहनत, समर्पण, और प्राकृतिक खेती के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने ही उन्हें यह सफलता दिलाई है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।