
प्रदेश में बढ़ रहा है जैविक खेती का रकबा Publish Date : 20/04/2026
प्रदेश में बढ़ रहा है जैविक खेती का रकबा
प्रोफसर आर. एस. सेंगर, डॉ0 शालिनी गुप्ता एवं गरिमा शर्मा
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जैविक खेती को अब काफी संख्या में अपना रहे हैं किसान
प्रदेश में वर्तमान समय में किसानों का रूझान जैविक खेती की दिशा में काफी तेजी से बढ़ा है। इससे प्रदेश में जैविक खेती का रकबा भी निरंतर बढ़ता ही जा रहा है।
केन्द्र सरकार के द्वारा पिछले बजट में गंगा नदी के पाँच किलोमीटर के दायरे में जैविक खेती को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया था। इस पहल के तहत जनपदों के गाँवों में किसानों समूहों को जोड़ा गया है। जोड़े गए सभी समूह अभी भी जैविक खेती ही कर रहे हैं और अब प्रदेश के समस्त जनपदों में कृषि योग्य भूमि के एक बड़े हिस्से पर जैविक खेती की जा रही है। जबकि पहले कुछ जिलों में तो जैविक खेती का रकबा लगभग शून्य ही था।

वर्तमान समय में प्रदेश के लाखों छोटे-बड़े जैविक खेती कर रहे हैं। जैविक खेती करने पहले यह सभी किसान फसल को बोने से लेकर काटने तक अपने खेतों में रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का भरपूर उपयोग किया करते थे। रासायनिक खाद और कीटनाशकों का निरंतर उपयोग करने से जहाँ एक ओर खेतों की मिट्टी की सेहत लगातार बिड़ती जा रही थी, वहीं भूगर्भ स्थित जल भी प्रदूषित होता जा रहा है। इस स्थिति को देखते हुए ही केन्द्र सरकार के द्वारा गोमुख से लेकर गंगासागर तक गंगानदी के पाँच किलोमीटर के क्षेत्र के गाँवों के किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करने का प्रावधान वर्ष 2021 के आम बजट में पहली बार किया गया था।
इस हेतु योजना के प्रथम चरण के अन्तर्गत कृषि विभागों के द्वारा अपने जनपद के गंगानदी के आसपास स्थित गाँवों का चयनित कर योजना में शामिल किया गया था। उक्त गाँवों में किसानों के समूह बनाकर उन्हें जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया था, जिससे वर्तमान समय में जैविक खेती का रकबा भी निरंतर बढ़ता जा रहा है।

‘‘किसान जैविक खेती के अन्तर्गत कम लागत से अधिक मुनाफा प्राप्त कर रहे हैं। इसके चलते प्रदेश के समस्त जनपदों में जैविक खेती के अर्न्गत आने वाले रकबे में निरंतर बढ़ोत्तरी होती जा रही है, जबकि पहले यह रकबा बहुत कम हुआ करता था। वर्तमान समय में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर किसानों के लिए प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को जैविक खेती के सम्बन्ध में निरंती जानकारियाँ भी प्रदान की जाती रहती हैं। अब गेहूँ की फसल की कटाई करने के बाद एक बार फिर से प्रदेश में जैविक खेती के लिए सर्वे भी किया जाना प्रस्तावित है।’’
जैविक खेती के सम्बन्ध में यदि प्रदेश के कृषि विभाग की माने तो किसानों के द्वारा भी अब जैविक खेती को तरजीह दी जा रही है। प्रदेश के एक बड़े भाग पर जैविक खेती की जा रही है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण पदान करने उपरांत आवश्यकता के अनुसार किसानों को उर्वरक के रूप में वर्मी कम्पोस्ट, नीम की खली और जैविक कीटनाशक भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
