
समवेत जैविक खेती दर्शन का उद्देश्य Publish Date : 09/12/2025
समवेत जैविक खेती दर्शन का उद्देश्य
डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहलान
1. प्रस्तावना
समवेत जैविक खेती घोषणापत्र का उद्देश्य है –
“प्रकृति के संरक्षण के साथ-साथ पोषक तत्वों से भरपूर एवं विष-मुक्त मानव भोजन और पोषण की व्यवस्था किसानों के माध्यम से समाज को उपलब्ध कराना।”
यह घोषणापत्र केवल खेती का तरीका नहीं, बल्कि एक जीवन-दृष्टि (Life Philosophy) है –
विज्ञान, परंपरा और सामूहिक चेतना का संगम।
2. मूल सिद्धांत (Core Principles)
1. पंचतत्व का संतुलन – धरती, जल, अग्नि, वायु और आकाश का समन्वय।
2. प्राकृतिक संसाधनों का पुनर्चक्रण – खेत में पैदा हुआ अवशेष खेत में ही लौटे।
3. सटीकता और उपयुक्तता (Precision & Appropriateness) – हर चीज सही मात्रा में, न अधिक, न कम।
4. गाय, गोबर और जीवाणु – खेत की जीवन-रेखा।
5. पोषण-सुरक्षा > खाद्य-सुरक्षा – भोजन दवा भी हो और पोषण भी।
6. किसान = धरतीपालक – केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रकृति के रक्षक।
3. व्यावहारिक घोषणाएँ (Farm-Level Manifesto)
(क) मिट्टी
जैविक कार्बन बढ़ाना (कम्पोस्ट, गोबर, हरी खाद, बायोचार)।
सूक्ष्मजीवों और केंचुओं का संरक्षण।
रासायनिक इनपुट का न्यूनतम उपयोग।
(ख) जल
वर्षा जल संचयन।
ड्रिप व स्प्रिंकलर जैसे सूक्ष्म सिंचाई साधन।
खेत तालाब, मेड़बंदी व नमी-संरक्षण तकनीक।
(ग) फसलें

मिश्रित, सहफसली और बहुफसली पद्धति।
फल + सब्ज़ी + अनाज + दलहन + तिलहन = फूड बैंकिंग सिस्टम।
देशी व रोग-प्रतिरोधक किस्मों का प्रोत्साहन।
(घ) पोषण
हर किसान का खेत = पोषण का बैंक।
“मेरा भोजन ही मेरी दवा है” का व्यावहारिक रूप।
हर गांव में “पोषण उपवन” (nutrition gardens)।
(ङ) किसान समाज
सामूहिक खेती और सहकारी समितियाँ।
बीज-संवर्धन और बीज-बैंक।
महिला व युवा किसानों की सक्रिय भागीदारी।
4. “हर चीज की अधिकता बुरी है” – संतुलन का नियम
दवा – खुराक सही हो तभी इलाज कारगर।
खेत – खाद, कीटनाशक, पानी सबका संतुलित प्रयोग।
मशीन – अधिक या कम स्नेहन दोनों नुकसानदेह।
जीवन – भोजन, काम, अवकाश – सबका संतुलन।
यही सटीकता (Precision) खेती, चिकित्सा, तकनीक और जीवन – हर जगह सफलता की कुंजी है।
5. गैर-आर्थिक (Non-Monetary) खेती इनपुट्स
1. मिट्टी की उर्वरता – हरी खाद, कम्पोस्ट, मल्चिंग, बायोचार।
2. पौध संरक्षण – नीम, लहसुन, मिर्च, दशपर्णी अर्क।
3. बीज-संरक्षण – पारंपरिक बीज, राख/मिट्टी से उपचार।
4. पानी प्रबंधन – गड्ढे, नालियाँ, मिट्टी के बर्तन (कुँजिया सिंचाई)।
5. पशु संसाधन – गोबर, गोमूत्र, पॉल्ट्री खाद, वर्मी-कम्पोस्ट।
6. समुदाय – बीज विनिमय, किसान समूह, सामूहिक औज़ार।
6. अपेक्षित परिणाम
✔ मिट्टी और जल की गुणवत्ता में सुधार।
✔ पोषण सुरक्षा और स्वास्थ्य में वृद्धि।
✔ पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता का संरक्षण।
✔ किसानों की आय और आत्मनिर्भरता।
✔ नई पीढ़ी के लिए Poison Free & Nutrient Dense Food की गारंटी।
7. निष्कर्ष

समवेत जैविक खेती घोषणापत्र – एक वैज्ञानिक, परंपरागत और सामाजिक आंदोलन है।
इसका ध्येय है –
“किसान, विज्ञान और समाज – तीनों के समन्वय से, प्रकृति को संरक्षित रखते हुए, पोषक तत्वों से भरपूर और विष-मुक्त भोजन देना।
लेखक: डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहलान, सस्यविद, Ex. Chief Scientist, CSIR-IHBT, Palampur Himachal Pradesh.
