कपास में गुलाबी सूंड़ी का नियंत्रण      Publish Date : 27/09/2026

         कपास में गुलाबी सूंड़ी का नियंत्रण

                                                                                                   प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य

जब कपास का फूल खिलने की बजाय गुलाब की कली जैसा बंद रह जाए, और उसका टिंडा तोड़ने पर अंदर गुलाबी रंग की छोटी इल्ली तथा आपस में चिपके हुए बीज मिलें तो समझ जाना चाहिए कि खेत में गुलाबी सुंडी (Pink Bollworm) आ चुकी है। यही कारण है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना आदि समस्त राज्यों की प्रत्येक कपास बेल्ट में यह आज सबसे बड़ी चिंता का विषय बन चुका है।

कपास के इस कीट की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह नुकसान अंदर बैठकर करता है जबकि बाहर से खेत हरा-भरा और भरपूर टिंडों वाला दिखाई देता है, लेकिन उसके अंदर रुई पूरी तरह से सड़ चुकी होती है और दूसरी बड़ी बात BT कपास भी अब इस पर पूरी तरह प्रतिरोधी नहीं रही, क्योंकि अब गुलाबी सुंडी ने BT प्रोटीन के विरुद्ध अपने अंदर प्रतिरोध (Resistance) विकसित कर लिया है। आज के इस लेख में हम इसकी पक्की पहचान, फेरोमोन ट्रैप से निगरानी, सही दवा और डोज़, तथा अन्य कुछ ऐसे कदम जो कि असल में इसे रोकते हैं के बारे में आपको जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं।

गुलाबी सुंडी क्या है?

गुलाबी सुंडी (Pectinophora Gossypiella) एक छोटे पतंगे की इल्ली है जो कि केवल कपास और उसके आसपास के पौधों पर ही पलती है। यही इसकी कमज़ोरी भी है और ताक़त भी, कमज़ोरी इसलिए कि कपास खेत से हटा दें तो इसका भोजन खत्म; और ताक़त इसलिए कि यह कपास के बीज के अंदर महीनों तक सुप्त (diapauses) अवस्था में पड़ी रह सकती है और अगले सीज़न में फिर जाग्रत हो जाती है।

पूरी उम्र की इल्ली लगभग 11-13 मि.मी. लंबी होती है और उस पर गुलाबी रंग की पट्टियाँ साफ दिखाई देती हैं और इसी के चलते इसका यह नाम भी पड़ा है। छोटी अवस्था में यह सफेद-सी होती है, इसलिए शुरुआत में इसे पहचानना मुश्किल होता है।

BT कपास लगाने के बाद भी यह क्यों लगती है?

BT कपास शुरुआत में गुलाबी सुंडी को रोकती थी, लेकिन लगातार एक ही तकनीक के इस्तेमाल से इस कीट ने BT प्रोटीन (Cry1।c तथा बाद में Cer2Ab) के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित कर लिया। भारत में इसकी पहली रिपोर्ट गुजरात से आई थी। इसलिए आज ‘BT लगा दी है, तो अब कुछ नहीं होगा’ यह सोचना ही सबसे बड़ी भूल होती है।

पहचान - खेत में क्या देखें

गुलाब के जैसा फूल (Rosette Flower): इस कीट की यह सबसे पक्की और सबसे पहली पहचान है। इल्ली फूल की पंखुड़ियों को रेशम के धागे से आपस में सिल देती है, जिससे फूल पूरा खिल नहीं पाता और गुलाब की कली जैसा मुड़ा और सिकुड़ा हुआ दिखाई देता है।

टिंडे पर सूई जैसा छेदः इल्ली टिंडे में घुसते समय बहुत बारीक छेद बनाती है, जो बाद में भर जाता है इसलिए ही कपास का टिंडा बाहर से ठीक दिखाई देता है।

दो बीज आपस में जुड़े (Double Seed): टिंडा तोड़ने पर दो बीज रेशम के धागे और मल से आपस में चिपके मिलते हैं और यह गुलाबी सुंडी की क्लासिक निशानी होती है।

बदरंग और सड़ी हुई रुईः गुलाबी सूंडी के प्रकोप से रुई पीली-भूरी, गुठलीदार और कमज़ोर हो जाती है; और कपास के रेशे की लंबाई और मज़बूती दोनों कम हो जाती हैं।

अधपके टिंडे का जल्दी खुलनाः गुलाबी सूंडी से ग्रस्त टिंडे समय से पहले चटक जाते हैं और अंदर की रुई पूरी तरह से नहीं बन पाती है।

टिंडे का गिरनाः छोटी अवस्था में हमला होने पर कली और छोटे टिंडे झड़ जाते हैं।

घर पर जाँच का तरीकाः खेत के अलग-अलग हिस्सों से 20 टिंडे तोड़ें और उन्हें बीच से चीरकर देखें। अगर 20 में 2 टिंडों में भी इल्ली या आपस में जुड़े हुए बीज मिलें (यानी 10%), तो तुरंत ही उपाय करने का समय आ चुका है।

जीवन चक्र और डायपॉज़ - यह हर साल क्यों लौट आती है-

गर्म मौसम में गुलाबी सुंडी का पूरा चक्र 25-35 दिन में पूरा हो जाता है, यानी एक कपास सीज़न में इसकी 4-6 पीढ़ियाँ तक हो सकती हैं। हर पीढ़ी के साथ संख्या और नुकसान दोनों बढ़ते जाते हैं।

अवस्था

कितने दिन

कहाँ मिलेगी

क्या करें

अंडा

3-5 दिन

कली, टिंडे के डंठल और पत्ती के नीचे।

ट्राइकोग्रामा कार्ड छोड़ें।

छोटी इल्ली

3-5 दिन

कली/टिंडे में घुसने से पहले, बाहर।

यही दवा का सही समय।

बड़ी इल्ली

10-14 दिन

टिंडे के अंदर, बीज खाती हुई।

दवा नहीं पहुँचती।

प्यूपा

6-9 दिन

गिरे टिंडों, अवशेष या मिट्टी में।

अवशेष नष्ट करें, गहरी जुताई करें।

सुप्त अवस्था (Diapause) 6 महीने + बिनौले (बीज) और अनखिले टिंडों के अंदर बीज और कपास-अवशेष का सही तरीके से निपटान करें।

असली जड़ यहीं हैः गुलाबी सुंडी खेत में नहीं, बल्कि बिनौले, अनखिले टिंडों, कपास के डंठलों और जिनिंग मिल के आसपास पड़े कचरे में सुप्त अवस्था में पड़ी हुई सर्दियाँ काटती है, जो किसान अवशेष नष्ट नहीं करता, वह अगले साल के लिए खुद कीट पाल रहा होता है।

नुकसान और क्यों है यह कपास का सबसे महँगा कीट

भारी प्रकोप की स्थिति में गुलाबी सुंडी उपज में 40% से 60% तक की कमी कर सकती है, और कई मामलों में इससे भी अधिक नुकसान हो सकता है। लेकिन नुकसान सिर्फ मात्रा का नहीं होता, रेशे की लंबाई, मज़बूती और बिनौले का तेल भी कम हो जाता है, जिससे मंडी में कपास का ग्रेड गिरता है और भाव कम मिलता है।

पहचान बिंदु

स्वस्थ कपास

गुलाबी सुंडी ग्रस्त

फूल  पूरा खुला, पंखुड़ियाँ फैली

गुलाब जैसा बंद, पंखुड़ियाँ सिली हुई

टिंडा (बाहर से) चिकना, बिना छेद सूई जैसा बारीक छेद, कहीं-कहीं गोंद

टिंडा (अंदर से)  साफ, बीज अलग-अलग, गुलाबी इल्ली, दो बीज जुड़े हुए

रुई  सफेद, लंबा मज़बूत रेशा

पीली-भूरी, गुठलीदार, कमज़ोर

टिंडे का खुलना

पककर पूरा खुलता है।

अधपका जल्दी चटकता है।

उपज व भाव, सामान्य, अच्छा ग्रेड 40-60% तक कम, ग्रेड और भाव दोनों गिरे रहते हैं।

कीट और कीट विज्ञान

फेरोमोन ट्रैप और छिड़काव की सीमा (ETL)

गुलाबी सुंडी अंदर छिपकर खाती है, इसलिए ‘जब दिख जाए तब छिड़कें’ वाला तरीका हमेशा देर कर देता है। इसका सही जवाब है-

गॉसीप्लूर फेरोमोन ट्रैपः यह मादा की गंध की नक़ल करके नर पतंगों को फँसाता है और आपको पहले ही बता देता है कि कीट आ चुका है।

उद्देश्य    कितने ट्रैप / एकड़   कब लगाए जाने चाहिए।

निगरानीः 2 ट्रैप बुवाई के 40-45 दिन बाद, कली बनते ही।

मास ट्रैपिंग (नर पकड़ना) 8-10 ट्रैप, पहला पतंगा फँसते ही।

दोहराव करनाः हर 21 दिन में।

छिड़काव कब करें (ETL):-

लगातार 3 रातों तक 8 या अधिक नर पतंगे प्रति ट्रैप फँसें, या

खेत में 10: रोज़ेट (गुलाब जैसे) फूल दिखने लगें, या

तोड़े गए 20 टिंडों में से 2 या अधिक (10%) ग्रस्त मिलें।

मेटिंग डिसरप्शन (PBKnot/ गॉसीप्लूर डिस्पेंसर): यह तकनीक खेत में मादा की गंध चारों ओर फैला देती है, जिससे नर पतंगा मादा तक पहुँच ही नहीं पाता और अंडे बनते ही नहीं। रसायन-मुक्त होने के कारण यह अब भारत में तेज़ी से अपनाई जा रही है। इसे पूरे गाँव में एक साथ लगाने पर सबसे अच्छा असर मिलता है।

रोकथाम - जो असल में काम करती है।

गुलाबी सुंडी का प्रबंधन दवा से नहीं, कीट का चक्र तोड़ने से होता है। नीचे दिए कदम लगभग मुफ़्त हैं और किसी भी छिड़काव से अधिक असरकारक होती हैं।

फसल लंबे समय तक न खींचें: यह सबसे ज़रूरी नियम है। कपास को दिसंबर के बाद खेत में न रखें। हर अतिरिक्त चुनाई कीट को एक और पीढ़ी बनाने का मौका देती है।

समय पर बुवाई, गाँव में एक साथ की जाएः देर से बोई गई फसल कीट के लिए ‘पुल’ बन जाती है, जिससे यह अगले सीज़न तक ज़िंदा रह जाता है।

डंठल और अवशेष को नष्ट करनाः कटाई के तुरंत बाद डंठल उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए, खेत में सड़ने के लिए न छोड़ें। अनखिले (कड़े) टिंडे इकट्ठा कर जला दें या जमीन की गहराई में दबा दें।

गहरी जुताईः मिट्टी में पड़े प्यूपा धूप में आकर नष्ट हो जाते हैं।

जिनिंग मिल के आसपास सफाईः मिल के पास पड़ा बिनौला और कचरा अगले साल के प्रकोप का सबसे बड़ा स्रोत होता है।

रिफ्यूजिया (Refugia) ज़रूर लगाएं: BT कपास के साथ बीज पैकेट में दिया गया NON-BT बीज मेढ़ पर ज़रूर लगाएं। यह कीट में प्रतिरोध बनने की रफ्तार धीमी करता है।

प्रमाणित बीज की ही बुवाई करें: बिना लेबल/बिल के अवैध बीज न खरीदें; पक्का बिल हमेशा सम्भाल कर रखें।

एक खेत से दो साल लगातार कपास की फसल न लें: संभव हो तो फसल चक्र में गेहूं, चना या सरसों लगाएँ।

रोकथाम के लिए जैविक और देसी उपाय

शुरुआती अवस्था (कली बनने से पहले) में जैविक उपाय ही अपनाएँ। जल्दी तेज़ रसायन डालने से मित्र-कीट मर जाते हैं और सफेद मक्खी तथा माहू का प्रकोप उल्टा बढ़ जाता है।

ट्राइकोग्रामा कार्डः 60,000 अंडे प्रति एकड़, 15 दिन के अंतर पर 3-4 बार प्रयोग करें। यह गुलाबी सुंडी के अंडों को ही नष्ट कर देता है।

नीम आधारित कीटनाशकः एज़ाडिरैक्टिन 1500 ppm/3 मि.ली./लीटर, या नीम तेल 5 मि.ली./लीटर अंडे देने से रोकता है।

ब्यूवेरिया बैसियानाः 5 ग्राम/लीटर, नमी वाले मौसम में असरदार।

बैसिलस थुरिंजिएंसिस (BT) स्प्रेः जैविक फॉर्मूलेशन, छोटी इल्लियों पर काम करता है।

रोज़ेट फूल तोड़कर नष्ट करनाः हर गुलाब जैसा बंद फूल एक इल्ली को साथ लिए होता है, इन्हें तोड़कर खेत से बाहर नष्ट करना सीधा-सीधा कीट की संख्या कम करता है।

गिरे टिंडे और कली उठाएँ: खेत में गिरी हुई कलियाँ और टिंडे रोज़ इकट्ठा कर नष्ट करें।

लाइट ट्रैपः रात में वयस्क पतंगों की संख्या कम करने के लिए प्रति एकड़ 1 लाइट ट्रैप।

रासायनिक नियंत्रण - दवा और सही मात्रा

ETL पार होने के बाद ही रसायन का प्रयोग करें, और दवा को कली, फूल तथा टिंडों पर लक्षित करें, सिर्फ पत्तियों पर नहीं। मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से दी गई हैः

दवा (तकनीकी नाम)

मात्रा / लीटर पानी

कब उपयुक्त

क्लोरएंट्रानिलिप्रोल

18.5% WC   0.3 मि.ली.

शुरुआती प्रकोप, लंबा असर

इमामेक्टिन बेंजोएट

5% SG 0.4 ग्राम

छोटी इल्लियाँ, कली अवस्था

प्रोफेनोफॉस

50% EC 2 मि.ली.

मध्यम-तेज़ प्रकोप

क्विनालफॉस

25% EC 2 मि.ली.

मध्यम प्रकोप

थायोडिकार्ब

75% WP 2 ग्राम

टिंडा अवस्था

स्पिनोसैड

45% WC 0.33 मि.ली. (1 मि.ली./3 लीटर)

मित्र-कीट पर कम असर

फ्लूबेंडियामाइड

20% SG 0.25 ग्राम

तेज़ प्रकोप, टिंडा अवस्था

सिंथेटिक पायरेथ्रॉइड (साइपरमेथ्रिन, फेनवैलरेट आदि) शुरुआत में न डालें। ये मित्र-कीटों को मारकर सफेद मक्खी और माहू का प्रकोप उल्टा बढ़ा देते हैं और गुलाबी सुंडी में प्रतिरोध भी तेज़ी से बनाते हैं। इन्हें केवल फसल के अंतिम चरण में, और वह भी ज़रूरत पड़ने पर ही उपयोग करें। हर दवा CIB-RC पंजीकृत हो, लेबल पर ‘कपास/गुलाबी सुंडी’ लिखा हो, और पक्का बिल लें। अंतिम सलाह के लिए अपने ज़िले के KVK या कृषि विभाग से पुष्टि करें।

ये गलतियाँ भारी पड़ती हैं

‘BT कपास है, कुछ नहीं होगा’ मान लेनाः गुलाबी सुंडी BT के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित कर चुकी है; निगरानी अब भी ज़रूरी है।

फसल फरवरी-मार्च तक खींचना- यह अगले सीज़न का प्रकोप पक्का कर देता है। एक-दो अतिरिक्त चुनाई का लालच सबसे महँगा पड़ता है।

डंठल खेत में ही छोड़ देना- इल्ली अवशेष में सुप्त पड़ी रहती है और अगले साल फिर निकलती है।

रिफ्यूजिया न लगाना- इससे प्रतिरोध और तेज़ी से बनता है, और ठज का बचा-खुचा असर भी खत्म हो जाता है।

ट्रैप का ल्योर महीनों न बदलना- 21 दिन बाद ल्योर की गंध खत्म हो जाती है, ट्रैप सिर्फ दिखावा रह जाता है।

दवाइयाँ मिलाकर छिड़कना- असर नहीं बढ़ता, लागत और अवशेष दोनों बढ़ते हैं।

             बुवाई से कटाई तक- महीनेवार क्या करें-

      समय / अवस्था

                                 ज़रूरी काम

बुवाई से पहले (अप्रैल-मई)

पिछली फसल के डंठल-अवशेष नष्ट, गहरी जुताई, प्रमाणित बीज + रिफ्यूजिया की व्यवस्था

बुवाई (मई-जून)

समय पर और गाँव में एक साथ बुवाई; मेढ़ पर NON–BT रिफ्यूजिया कतारें

40-45 दिन (कली बनना)

2 फेरोमोन ट्रैप/एकड़ लगाएं; ट्राइकोग्रामा कार्ड शुरू करें

60-90 दिन (फूल-टिंडा)

हफ्ते में रोज़ेट फूल गिनें; पहला पतंगा फँसते ही मास ट्रैपिंग 8-10 ट्रैप; नीम स्प्रे

90-120 दिन (टिंडा भरना)

20 टिंडे तोड़कर जाँच; ETL पार होने पर ही रसायन, दवा बदल-बदलकर

चुनाई (अक्टूबर-दिसंबर)

गिरे टिंडे व अनखिले टिंडे इकट्ठा कर नष्ट करें

 

  • दिसंबर के बाद  फसल समाप्त करें खेत खाली करें, डंठल नष्ट करें, गहरी जुताई

निष्कर्ष

गुलाबी सुंडी को सिर्फ दवा से नहीं हराया जा सकता- इसे हराने का तरीका है इसका चक्र तोड़ना। तीन बातें याद रखें- फेरोमोन ट्रैप से जल्दी पता लगाएं, रोज़ेट फूल और गिरे टिंडे तुरंत नष्ट करें, और सबसे ज़रूरी बात- दिसंबर के बाद फसल न खींचें और डंठल-अवशेष पूरी तरह नष्ट करें।

यह कीट पूरे गाँव का साझा दुश्मन है अतः अकेले लड़ने से नहीं, मिलकर लड़ने से हारता है।

ज़रूरी सूचना कृ दवा, खाद और मात्रा के बारे में

इस लेख की जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, किसी एक खेत के लिए सिफ़ारिश नहीं। दवा, खाद और उनकी मात्रा फ़सल, अवस्था, मिट्टी और उत्पाद के हिसाब से बदलती है।

छिड़काव से पहले अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या ज़िला कृषि अधिकारी से पुष्टि ज़रूर करें।

डिब्बे पर छपा लेबल ही अंतिम प्रमाण है- मात्रा, फ़सल और प्रतीक्षा अवधि वहीं से लें, इस लेख से नहीं।

दवा उसी फ़सल पर डालें जिसके लिए वह CIB-RC में पंजीकृत है। पंजीकरण और प्रतिबंध समय-समय पर बदलते रहते हैं।

प्रतीक्षा अवधि पूरी हुए बिना फ़सल न तोड़ें- बचा हुआ अंश खाने वाले तक पहुँचता है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।