गन्ने के ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों का नियन्त्रण      Publish Date : 06/05/2026

  गन्ने के ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों का नियन्त्रण

                                                                                                                     प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं अन्य

1. काला चिकटा (ब्लैक बग)

                                             

काला चिकटा चूसक कीट काले रंग का होता है। इसका प्रकोप अधिक तापमान व शुष्क मौसम समान्यतः अप्रैल से जून के तहीनों में गन्ने की पेड़ी में अधिक व बावक फसल में कम दिखाई देता है। इससे प्रभावित पौधों की पत्तियाँ पीली हो जाती हैं तथा उन पर कत्थई रंग के धब्बे पाये जाते है। इसके शिशु पत्र कंचुक एवं गन्ने के गॉफ के मध्य में पाये जाते हैं। इस कीट के प्रौढ़ तथा शिशु दोनों पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे गन्ने की बढ़वार रुक जाती है।

2. थ्रिप्स

थ्रिप्स बहुत छोटे लगभग 2-3 मिमी आकार के कीट होते है। इस कीट की मादा कीट गहरे भूरे रंग व नर हल्के रंग के होते है। इस कीट का प्रकोप अधिक तापमान व शुष्क मौसम में बहुत तेजी से होता है। थ्रिप्स पत्ती की उपरी सतह के अन्दर अण्डा देते है व निम्फ निकलकर पत्ती का रस चूसते हैं। इससे प्रभावित पत्ती का अग्रभाग मुड़ कर नुकीला हो जाता है। प्रभावित पत्तियाँ ऊपर से नीचे की ओर सफेद/पीली हो जाती हैं व उनमें चाँदी जैसी चमक दिखाई देती है। वर्षा के प्रारम्भ होते ही इन कीटों की संख्या में कमी होने लगती है।

3. सैनिक कीट (कुतरकर खाने वाला कीट)

                                             

इस कीट की सू़ड़ी अवस्था गन्ने की पत्तियों को खाती है। मादा कीट पत्रकचुक में एक समूह में अण्डे देती है। इन अण्ड समूहों से 4-5 दिन बाद छोटी-छोटी सूड़ियाँ निकलकर शाम के समय सैनिकों की भाँति समूह में पत्तियों को खाती हैं। दिन के समय सूडियों जमीन के अन्दर सूखी पत्तियों, पत्रकचुकों एवं गोफ में छिपी रहती हैं। इस कीट का भी पेड़ी फसल में प्रकोप अधिक होता है।

उपरोक्त तीनों कीटों के नियंत्रण की विधियाँ

  • खेत की नियमित अंतराल पर सिंचाई करते रहें।
  • खेत को खरपतवार या गन्ने की सूखी पत्तियों से मुक्त रखें।
  • संतुलित उर्वरक का प्रयोग करें।
  • सुबह या शाम को निम्न में से किसी एक कीटनाशक का प्रति हेक्टेअर की दर से 625 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

1- प्रोफेनोफॉस 40 प्रतिशत साइपरमेन्थिन 4 प्रतिशत ई.सी. 750 मिली (संयुक्त उत्पाद)।

2- इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस. एल. दर 200 मि.ली. का प्रयोग करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।