कीट नियंत्रक CTPR का प्रयोग      Publish Date : 05/05/2026

                कीट नियंत्रक CTPR का प्रयोग

                                                                                                        प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

  • CTPR चोटी बेधक की अगली पीढ़ी आने से पहले प्रयोग करना चाहिए।
  • गन्ने में CTPR आमतौर पर कीट नियंत्रण से जुड़ा एक प्रोडक्ट होता है, जिसका उपयोग विशेष रूप से चोटी बेधक के नियंत्रण के लिए किया जाता है।
  • यह दवा इस कीट के अंडे और छोटे लार्वा (कीड़े की शुरुआती अवस्था) को खत्म करने में सहायक होती है।
  • चोटी बेधक कीट एक बार नहीं, बल्कि यह कई बार (पीढ़ियों में) आता है पहली पीढ़ी → का मतलब है कि नुकसान होना शुरू हो गया।
  • दूसरी/तीसरी पीढ़ी → में अधिक नुकसान होता है।
  • इसलिए दवा तभी प्रयोग करनी चाहिए जब यह कीट अंडे दे रहा हो या छोटा लार्वा ही निकला हो।
  • जब कीड़ा गन्ने के तने के अंदर घुस जाता है, तब यह दवा असर नहीं करती है 350-400 पानी में 150 उस सीटीपीआर का प्रयोग कल्लो के पास जमीन पर करने से लाभ मिलता है।

कब करें इस दवा का उपयोग

                                  

  • जब खेत में टॉप बोरर के अंडे या शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगे।

दवा के प्रयोग करने के लाभ

  • कीट को शुरूआत में ही रोक देता है।
  • इसका प्रयोग करने से गन्ने की ऊपरी बढ़वार सुरक्षित बनी रहती है।
  • इसका प्रयोग करने से उपज में नुकसान कम होता है और सही समय पर सही तरीके से सही कीटनाशक का उपयोग करने से अधिक लाभ प्राप्त होता है। 

CTPR का प्रयोग करने के कुछ लाभ-

1- CTPR एक systemic insecticide है इसकी drenching की जाती है जो जड़ों से अवशोषित होकर पौधे अन्दर पहुंचता है तथा तने के अंदर घुस चुकी सुंडी को भी समाप्त करती है।

2. यह पौधे के ऊपर स्थित अंडों तथा सुंडी को समाप्त नहीं करती है।

3.  इसका उपयोग मुख्यतः तीसरी पीढ़ी और बाद की पीढ़ी के नियंत्रण के लिए किया जाता है जिसका प्रभाव लगभग 90 से 100 दिन तक बना रहता है।

4. इसलिए इसका उपयोग मई के अंत से जून के अंत तक किए जाने की संस्तुति की जाती है, जिससे टॉप बोरर का प्रभावी नियंत्रण हो सके और दोबार नहीं डालना पङे।

5. पहली और दुसरी पीढ़ी के नियंत्रण के लिए यांत्रिक विधियों यथा प्रभावित किल्लों की कटाई, फैरोमोन ट्रैप लाइट ट्रैप को अपनाना चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।