तर्क शक्ति को बढ़ाकर बढ़ाएं मस्तिष्क की क्षमता      Publish Date : 09/10/2026

तर्क शक्ति को बढ़ाकर बढ़ाएं मस्तिष्क की क्षमता

                                                                                                                    प्रो0 आर. एस. सेंगर

  • तार्किक क्षमता के द्वारा बढ़ाएं अपने दिमाग की क्षमता तो एआई के इस दौर में धोखा नहीं देगा आपका दिमाग।

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता लोगों की सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर कर रही है।

वर्तमान समय में आप किसी सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर डालें या कोई भी न्यूज वेबसाइट खंगालकर देखें, हर तरफ बस कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की चर्चा ही छाई हुई है। कोई इसके फायदे गिना रहा तो कोई इसके खतरों को लेकर आगाह कर रहा है। एआई जनिता में सेंध लगा रहा, लोगों की नौकरियां छिन जाएंगी, पूरी मानवता खतरे में आ जाएगी, ऐसी तमाम आशंकाओं के बीच एक बात तो लिबकुल सच है कि इस पर अत्यधिक निर्भरता लोगों की सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर करती जा रही है।

अगर आप चाहते हैं कि एआई के इस दौर में भी आपका दिमाग कमजोर न पड़े तो गहन सोच और तार्किक क्षमता बढ़ाने जैसे अभ्यास लगातार करते रहें। दुनियाभर के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं की चिंता में यह चिंता सताने लगी है कि अब जबकि एआई झट से हमारी हर समस्या का समाधान निकाल दे रहा है, लोगों खासकर छात्रों की तार्किक क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है। वहीं एआई से हमारी हर समस्या का समाधान निकल रहा है, लोगों खासकर छात्रों की तार्किक क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है।

   छात्रों में तर्कसंगत सोच को बढ़ाना शिक्षकों की जिम्मेदारी

शिक्षकों को असाइनमेंट और परीक्षाओं का प्रारूप इस तरह तैयार करना चाहिए जिससे छात्र केवल एआई से कॉपी-पेस्ट न कर सकें, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव, व्यावहारिक डेटा का विश्लेषण कर सकें।

क्रिटिकल थिंकिंग या गहन सोच को हर जगह एक तरह से लागू नहीं किया जा सकता। इतिहास में क्रिटिकल थिंकिंग का मतलब स्रोतों की प्रमाणिकता जानना है, जबकि विज्ञान में यह सबूतों और सिद्धांतों के बीच के संबंध को समझना है। इसलिए विषय के अनुसार अलग तर्क पद्धतियों का अभ्यास करें।

एआई झट से हमारी हर समस्या का समाधान निकाल दे रहा है, लोगों खासकर छात्रों की तार्किक क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है। पेकिंग स्थित सिंघुआ यूनिवर्सिटी के शिक्षा शोधकर्ता लिक्सियांग यान ने एक ऑनलाइन कोर्स के दौरान पाया कि कॉलेज एआई एजेंट्स का उपयोग खुद से जवाब दे सकता था, सवालों के जवाब दे सकता था। एआई से हमारी हर समस्या का समाधान निकाल दे रहा है, लोगों खासकर छात्रों की तार्किक क्षमता तेजी से कमजोर हो रही है।

  • क्रिटिकल थिंकिंग रातों-रात नहीं आती। वर्षों के अभ्यास, निरंतर अध्ययन और विभिन्न विषयों को गहराई से समझने से दिमाग मजबूत होता है। इसलिए शॉर्टकट छोड़कर दिमाग पर थोड़ा दबाव डालने की आदत को बरकरार रखना होगा। समझने की क्षमता प्रभावित कर रहा जनरेटिव एआई।
  • शोधकर्ताओं ने पाया कि अब छात्रों को गहराई से सोचने और तर्क करना सिखाना अधिक आवश्यक हो गया है।
  • नेचर पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार, अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ कॉलेज एंड यूनिवर्सिटीज के एक सर्वे में 90% से अधिक प्रोफेसरों ने माना कि जनरेटिव एआई छात्रों की सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है।
  • वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार, सीखने की प्रक्रिया दिमाग पर जोर डालने से होती है।
  • गहराई से विश्लेषण करें तो तर्कसंगत निष्कर्ष निकालें।
  • अगर कोई जानकारी सामने आए तो उसे समझने के लिए खुद से सवाल करें, जैसे यह कहां से आई? क्या यह पूरी तरह सच है?
  • एआई से सीधे जवाब मांगने के बजाय उससे पहले खुद से पूछें जो आपको सोचने, प्रति-प्रश्न करने या अपनी गलतियां खोजने के लिए प्रेरित करे।
  • भावनाओं या पूर्वाग्रहों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय ठोस आंकड़ों और सबूतों पर गौर करें।
  • यह समझने की कोशिश करें कि यह किसी पसंद-नापसंद सोच से प्रभावित तो नहीं कर रही।
  • कोई एक निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय अलग-अलग नजरिए से समझें।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।