मेडिसिन इंडस्ट्री मैनेजरः कार्य और जिम्मेदारियाँ      Publish Date : 30/09/2026

मेडिसिन इंडस्ट्री मैनेजरः कार्य और जिम्मेदारियाँ

                                                                                                                        प्रो0 आर. एस. सेंगर

फार्मा इंडस्ट्री में भारत का रुतबा अब सिर्फ रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रह गया है। मैन्यूफेक्चरिंग, क्लिनिकल ट्रायल, जेनेटिक ड्रग रिसर्च के क्षेत्र में भी खूब काम होने लगा है। इतना ही नहीं फार्मास्युटिकल क्षेत्र आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते उद्योग में शुमार होने लगा है।

क्लिनिकल रिसर्च आउटसीसिंग यानी श्ओआरजीश् रिसर्च फर्म के मुताबिक भारतीय फार्मा उद्योग 12-13 फीसदी की दर से वृद्धि कर रहा है। मैकिंजे की ताजा रिपोर्ट भी इस बात को पुख्ता करती है। मैकिंजे की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक इस उद्योग में तीन गुणा बढ़ोत्तरी होगी। ये तो रिपोर्ट है। वैसे फिलवक्त भारत का फार्मास्यूटिकल उद्योग 24 हजार करोड़ रुपए से अधिक का है, जिसमें नियांत भी शामिल है।

वर्ष 2005 में देश की फार्मा इंडस्ट्री का कुल प्रोडक्शन करीब 9 बिलियन डालर था, जिसके वर्ष 2010 के अंत तक 25 बिलियन हो जाने की उम्मीद जताई गई है। इसकी वाजिब वजह भी है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान हमारे देश में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। दवाओं के वितरण से लेकर मार्केटिंग, पैकेजिंग, मैनेजमेंट, सभी फार्मास्यूटिकल के अहम हिस्से हैं। हिलाया, रेनबैक्सी जैसी दर्जनों कंपनियों की पौ-बारह है।

कार्य प्रकृति

सामान्य उत्पादों की मार्केटिंग के लिए जहाँ सीधे डीलर या कस्टमर से संपर्क करना होता है, वहीं दवाओं की मार्केटिंग में डॉक्टर अहम कड़ी होता है। दवा की खूबियों के बारे में डॉक्टरों को संतुष्ट करना जरूरी होता है, तभी वे इसे मरीजों के प्रिस्क्रिप्शन में लिखते हैं। इसके अलावा दुकानों में दवा की उपलब्धता का पता भी रखना होता है। इन्हीं जरूरतों को देखते हुए फार्मा मैनेजमेंट कोर्स की शुरुआत की गई है। फार्मा मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम करने के लिए मैनेजमेंट के साथ दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ एवं तकनीक का भी ज्ञान होना चाहिए।

दवा कंपनियों मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, मार्केटिंग ऑफिसर के रूप में प्रशिक्षित लोगों को ही रखना चाहती है। 2005, के बाद मल्टीनेशनल कंपनियों के भारत में आगमन से बाजार में अधिक उछाल आया है। वे भारतीय कंपनियों के साथ गठजोड़ कर सस्ते प्रोडक्ट बनाने और बेचने लगी। इसका असर यहाँ के बाजारों पर पड़ा है।

योग्यता

100 से अधिक संस्थानों में डिग्री और 200 से अधिक संस्थानों में डिप्लोमा कोर्स चलाए जा रहे हैं।फार्मा के फील्ड में अगर कॅरिअर बनाना है तो इसके लिए न्यूनतमयोग्यता है 12वीं और न्यूनतमअंक है 50 प्रतिशत। यूँ तो किसी भी फैकल्टी के छात्र इस कोर्स के लिए योग्य हैं, लेकिन विज्ञान संकाय, खासकर (जीव विज्ञान) के छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है। बीएससी, बीफार्मा और डीफार्मा बालों को अधिक प्राथमिकता मिलती है। वैसे फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में सिर्फ बीफार्मा और डीफार्मा सरीखी डिग्री धारकों को ही जगह नहीं मिलती, चल्कि कैमिस्ट्री, जूलोजी और बॉटनी बाले युवाओं को भी खूब रोजगार मिल रहे हैं। ये अवसर, अनुसंधान, शोध और फार्मा प्रोडक्शन से जुड़े हैं।

कौन कौन से हैं कोर्स?

पीजी डिप्लोमा इन फार्मास्यूटिकलएवं हेल्थ केयर मार्केटिंग, डिप्लोमा इनफामा मार्के टिंग,प्रोफेशनलडिप्लोमाइन  फार्मास्युटिकलमैनेजमेंट, डिप्लोमा इन फार्मा सेल्स ऐंड मार्केटिंग जैसे कोर्स हैं। इन पाठ्यक्रमों की अवधि तीन महीने से 1 वर्ष के बीच है। कुछ विश्वविद्यालयों द्वारा फार्मा मैनेजमेंट में दो वर्षीय एमबीए पाठ्यक्रमों की शुरुआत की गई है, जिसमें प्रवेश के लिए स्नातक होना जरूरी है। जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली में मार्केटिंग में विशेषज्ञता के साथ एमफांर्मा कोर्स भी उपलब्ध है। कुछ जगहों पर बीबीए कोर्स भी चलाए जा रहे हैं। यह तीन वर्षीय स्नातक कोर्स है।

कहाँ-कहाँ हैं संभावनाएँ

भारत में इस समय 23 हजार से भी अधिक रजिस्टर्ड फार्मास्यूटिकल कंपनियों हैं। हालाँकि इनमें से करीच 300 ही ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में हैं। एक अनमान के अनुसार जम इंडस्ट्री में तकरीबन दो लाख लोगों को काम मिला हुआ है। फार्मा इंडस्ट्री की वर्तमान प्रगति को देखते हुए अगले कुछ वर्षों में इस इंडस्ट्री को दो से तीन गुना स्किल्ड लोगों की जरूरत होगी। इनवोटेक फार्मा विजनेस स्कूल की निदेशक ऊषा गुप्ता का कहना है कि फार्मा क्षेत्र आज सर्वाधिक संभावनाओं से भरा है। इसे तीन क्षेत्रों में बाँटा गया है- पहला प्रोडक्शन, दूसरा प्रोडक्ट मैनेजर और तीसरा सेल्स ऐंड मार्केटिंग। इन तीनों में खासी डिमांड है।

इसमें दक्ष युवा देशी-विदेशी कंपनियों में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव, प्रोडक्ट्स एग्जीक्यूटिव, बिजनेस एग्जीक्यूटिव, ब्रांड एग्जीक्यूटिव, प्रोडक्शन कैमिस्ट, क्वालिटी कंट्रोल और क्वालिटी एश्योरेंस एग्जीक्यूटिव जैसे पदों पर नौकरी हासिल कर सकते हैं। फार्मासिस्ट, थेरेपिस्ट, कोऑर्डिनेटर, रिसर्च ऑफिसर, साइंटिस्ट, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव वगैरह।

आमदनी

प्रशिक्षित लोगों की माँग देखते हुए इस क्षेत्र में सैलरी भी काफी तेजी से बढ़ रही है। रिसर्च और एंट्री लेवल पर सैलरी डेढ़ लाख रुपए वार्षिक मिलती है। मार्केटिंग क्षेत्र में एक फ्रेशर को 3 से 35 लाख रुपए वार्षिक मिल जाते हैं। वैसे इस फील्ड में शुरुआती मासिक वेतन 8 से 15 हजार रुपये तक है।

प्रमुख संस्थान          

दिल्ली इंस्टीट्यूटऑफफर्मास्युटिकल साइंस ऐंड रिसर्च, पुष्प विहार, साकेत, नई दिल्ली-

वेबसाइट: www.dipsar.in

इनवोटेक फार्मा बिजनेस स्कूल शाहदरा, दिल्ली-32-

वेबसाइट: www.ipbs.in

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन, मोहाली, चंडीगढ़-

वेबसाइट: www.niper.ac.in

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मा मार्केटिंग, लखनऊ-

वेबसाइट: www.lipm.com

इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकलएजुकेशन ऐंड रिसर्च, पुणे।

वेबसाइट: www.pharmadiplomas.com

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।