
एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट: कृषि कारोबार में रोजगार Publish Date : 29/09/2026
एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट: कृषि कारोबार में रोजगार
प्रो0 आर. एस. सेंगर
कृषि का संबंध अब सिर्फ फसलों के उत्पादन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह विस्तृत रोजगार का रूप ले चुका है, जिसके लिए कुशल लोगों की काफी आवश्यकता है। इसीलिए कृषि क्षेत्र में कैरियर बनाने के इच्छुक छात्रों की रुचि एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट जैसे पाठ्यक्रमों के प्रति बढ़ी है।
हमारे देश की अधिकांश जनसंख्या अभी भीप्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष ढंग से कृषिसे ही जुड़ीहै।हैं। कृषि से संबंधित कारोबार के लगातार बढ़ने की यही वजह है। कृषि क्षेत्र में व्यावसायिक दृष्टि से भी कई बदलाव नजर आने लगे हैं। इसीलिए कॉमर्शियल फार्मिंग और कृषि से संबंधित तकनीकी पहलुओं की दिशा में भी बेहतर काम होने लगा है। इसी के परिणामस्वरूप एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट सरीखा कोर्स प्रचलन में आया है।
क्या है एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट
एपी-बिजनेस मैनेजमेंट में कृषि उत्पादन से जुड़े विभिन्न संसाधनों, जैसे बीज, खाद्य पदार्थ, फर्टिलाइजर, कृषि उपकरण, ऊर्जा आदि को शामिल किया जाता है तथा इंश्योरेंस, मार्केटिंग, प्रेज, प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्टेशन, पैकिंग आदि कई सेवां भी इसके तहत आती हैं। भारत जैसे विकासशील देश में एग्री-बिजनेस सिस्टम चार प्रमुख संक्टरों- एग्रीकल्वरल इनपुट, एग्रीकल्चरल प्रोडकार, एग्रीकल्चरल प्रोसेसिंग-मैन्युफैक्चरिंग तथा शीकल्चरल मार्केटिंग-डिस्ट्रिब्यूशन पर आधारित होता है। ये चारों सेक्टर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं तथा ये सभी क्षेत्र मिलकर एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट का स्वरूप निर्धारित करते हैं।
बैचलर डिग्री के बाद प्रवेश
एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट में ज्यादातर कोर्स मास्टर अथवा पीजी डिप्लोमा लेवल के हैं। इसलिए संबंधित कोर्स में प्रवेश का रास्ता तभी खुलता है, जब छात्र एग्रीकल्बर, हॉर्टिकल्चर आदि संबंधित विषयों में ग्रेजुएट हों। एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट कृषि क्षेत्र के छात्रों के लिए एक लोकप्रिय कोर्स बनता जा रहा है, जिसके अंतर्गत प्रोफेशनल्स को न सिर्फ मैनेजमेंट की जरूरतों को पूरा करने का अवसर मिलता है बल्कि वे कृषि परिदृश्य में बदलाव लाकर किसानों के लिए काफी सहायक भी साबित होते हैं।
पाठ्यक्रम का स्वरूप
मास्टर अथवा पीजी डिप्लोमा लेवल के कोर्स दो वर्ष के होते हैं। इनमें थ्योरी एवं प्रैक्टिकल दोनों परसमान रूप से फोकस किया जाता है। इनके विषयों में एग्री-बिजनेस इनवॉयरमेंट ऐंड पॉलिसी, एग्री बिजनेस फाइनेंशियल मैनेजमेंट, एग्री सप्लाई चेन मैनेजमेंट, मैनेजीरियल इकोनॉमिक्स, मैनेजीरियल एकाउंटिंग ऐंड कंट्रोल, मैनेजमेंट ऑफ एग्री बिजनेस को-ऑपरेटिव, मैनेजमेंट ऑफ एग्री इनपुट इंडस्ट्री आदि को शामिल किया जाता है।
किस रूप में हैं सेवाएं
इस सेक्टर में कोर्स के पश्चात छात्रों को किसी प्लांटेशन फर्म में प्लांटेशन मैनेजर, फूड रिटेल फर्म में वेयरहाउस एवं क्वालिटी मैनेजर, कमोडिटी एक्सचेंज में कमोडिटी बायर व प्रोक्योरमेंट मैनेजर, एग्री फाइनेंस फर्म तथा कॉमर्शियल बैंक में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस मैनेजर एवं रिलेशनशिप मैनेजर आदि नौकरियां मिल सकती है। इसके अलावा प्रोफेशनल्स कमोडिटी ब्रोकर, कमोडिटी बाबर, फूड ब्रोकर, सप्लाई प्लानर, सप्लाई मैनेजर, परचेज एग्जीक्यूटिव, लोन ऑफिसर, मार्केटिंग रिसर्चर, प्रोडक्ट एनालिस्ट आदि के रूप में भीआप अपनी सेवाएं दे सकते हैं।
प्रमुख जॉब सेक्टर
इस फील्ड में प्रमुख रूप से को-ऑपरेटिव एवं एग्रीकल्चर इंडस्ट्री, पॉलिसी मेकर एवं फाइनेंशियल सेक्टर, एकेडमिक सेक्टर, एग्रीकल्बर कंसल्टेंसी, एग्री बैंकिंग, हाईटेक फार्मिंग, एग्रीकल्चर कंजरवेशन, वेयरहाउसिंग, रिटेल सेक्टर, सीड एवं पेस्टीसाइड कंपनी, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, फर्टिलाइजर, बैंक च इंश्योरेंस सेक्टर, आर्गेनिक फार्मिंग प्रोजेक्ट अदि में मौके मिलते हैं। कई ऐसे एनजीओ हैं, जिन्हें ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के लिए एग्री-बिजनेस प्रोफेशनल्स की जरूरत होती है।
प्रमुख संस्थान
■ नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट (मैनेज), हैदराबाद।
वेबसाइट : www.manage.gov.in
कोर्स : पोस्ट पेजुएट डिप्लोमा इन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन मैनेजमेंट (दो वर्षीय)।
■ इंडियईएम) परीटयूट ऑफ (आईआईएम), लखनऊ मैनेजमेंट।
वेबसाइट: www.liml.ac.in
कोर्स: पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट (दो वर्षीय), पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट (एक वर्षीय)।
■कॉलेज ऑफ एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट (जीबी पंत यूनिवर्सिटी), पंतनगर (उत्तराखंड)।
वेबसाइट: www.cabm.ac.in
कोर्स: एमबीए इन एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट।
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।