
जूट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बनाएं अपना शानदार कॅरियर Publish Date : 22/09/2026
जूट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बनाएं अपना शानदार कॅरियर
प्रो0 आर. एस. सेंगर
जूट उद्योग का भारत की अर्थव्यवस्था में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह पूर्वी क्षेत्र खासकर पश्चिम बंगाल के प्रमुख उद्योगों में एक है। स्वर्ण रेशा कहा जाने वाला जूट प्राकृतिक, नवीकरणीय, जैविक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद होने के कारण सुरक्षित पैकेजिंग के सभी मानकों पर खरा उतरता है और इसी के चलते जूट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोजगार के मौकों की भी भरमार है। जूट और फाइबर प्रॉद्योगिकी के स्नातक अनुसंधान और विकास टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा उन्हें प्रोडक्ट डिजाइनर और क्वालिटी कंट्रोलर के रूप में काम करने का मौका भी मिल सकता है। देश में कई ऐसी जानीमानी कंपनियां हैं जो जूट तकनीक जानकारों को रोजगार प्रदान करती हैं।
आवश्यक योग्यता
कैंडिडेट के पास मैकेनिकल, इलैक्ट्रिकल, केमिकल या फिर कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा होना अनिवार्य है। जूट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एंट्री करने के लिए कैंडिडेट को किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से भौतिक, रसायन विज्ञान और गणित जैसे विषयों के साथ उर्तीण होना जरूरी है।
जूट उत्पादों की बढ़ रही मांग
पहले जूट से बने उत्पादों का इस्तेमाल ज्यादा नहीं किया जाता था। वजह यह कि इसकी तकनीक इतनी ज्यादा विकसित नहीं थी, लेकिन अब उन्नत तकनीक के चलते जूट से निर्मित उत्पादों की मांग निरंतर बढ़ रही है। जूट उत्पादों की मांग देश ही नहीं विदेशों में भी बढ़ रही है। खासतौर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन, अमेरिका, यूरोप, जैसे देशों में भारतीय जूट उत्पादों की जबरदस्त मांग है। उद्यमी इसका लाभ ले सकते हैं। इस साल जूट व उनसे निर्मित उत्पादों के निर्यात में 25 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। इससे जूट का उत्पादन करने वालों में भी प्रोत्साहन देखने को मिल रहा है। हैंडलूम से लेकर डिजाइनर जूते, चप्पल तक बनाने में जूट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
होम डेकोर में भी छाया है जूट का जादू
जूट एक द्विबीजपत्री, रेशेदार पौधा होता है और इसका तना पतला और बेलनाकार होता है। इसके तने से पत्तियों अलग कर पानी में गट्ठर बाँधकर सड़ने के लिए डाल दिया जाता है। इसके बाद रेशे को पौधे से अलग किया जाता है। इसके इसी रेशे से बोरे, दरी, तम्बू, तिरपाल, टाट, रस्सियां निम्नकोटि के कपड़े और कागज आदि बनाए जाते हैं। होम डेकोर में इन दिनों जूट का जादू छाया हुआ है। ऐसे में जूट हमेशा से ही पसंद किया जाता है, लेकिन अब कर्टन्स से लेकर सेंटर टेबल में भी जूट का यूज किया जाने लगा है।
इन दिनों जूट न सिर्फ घर को मॉडर्न लुक दे रहा है, बल्कि इसके इस्तेमाल का दायरा भी बढ़ गया है। इसके अलावा जूट से बने लैम्प की भी काफी डिमांड है। टेबल लैम्प के साथ-साथ जूट के हैंगिंग लैम्प भी देखे जा रहे है। इसके लाइट इफेक्ट्स आकर्षक होते हैं। ये डेकोर की रंगत को बढ़ाते हैं। साथ ही लग्जरी लुक भी देते हैं।
जूट से संबंधित पाठ्यक्रम
जूट टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सिर्फ ग्रेजुएट ही नहीं बल्कि अंडर ग्रेजुएट भी अपना कॅरियर बना सकते हैं। इसमें ये सभी पाठ्यक्रम शामिल हैं।
- पीजी डिप्लोमा इन जूट टेक्नोलॉजी ऐंड मैनेजमेंट।
- एमटेक इन टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी।
- बीटेक इन जूट ऐंड फाइबर टेक्नोलॉजी।
- बीटेक इन जूट टेक्नोलॉजी।
प्रमुख संस्थान
- इंस्टीट्यूट ऑफ जूट टेक्नोलॉजी।
- कॉलेज ऑफ टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी।
- द इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी।
- एल. डी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग।
- महाराणा प्रताप कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी।
- गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी।
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी।
नौकरी के विभिन्न अवसर
- भागवती उद्योग।
- आनंद जूट उद्योग।
- बूम बाइंग प्राइवेट लिमिटेड।
- लॉवसन एक्सपोर्ट्स।
- एग्मो इंटरनेशनल।
- डीटीआर एक्सपोर्ट्स।
- इको जूट प्राइवेट लिमिटेड।
- हरीराम एक्जिम।
- फ्लोराफैब।
- माज इंटरनेशनल।
- जयकिशन दास मॉल जूट प्रॉडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड।
- बावा पॉलिंस आदि।
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।