फार्मा मार्केटिंग प्लेयर      Publish Date : 20/09/2026

                फार्मा मार्केटिंग प्लेयर

                                                                                                             प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

फार्मास्युटिकल तेजी से ग्रोथ करने वाली इंडस्ट्रीज में से एक है। शानदार ग्रोथ की वजह से इसमें नौकरियां भी तेजी से बढ़ी हैं। अगर साइंस बैकग्राउंड के हैं और सेल्स और कस्टमर को मैनेज करने का हुनर रखते हैं, तो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में करियर की बेहतरीन शुरुआत कर सकते हैं:-

भारत का फार्मा सेक्टर 13-14 फीसदी सालाना की दर से ग्रो कर रहा है। मेडिकल फील्ड में ही रहे डेवलपमेंट्स के कारण मेडिसिन गार्केट भी कॉमर्शियल रूप से काफी आगे बढ़ रहा है। एफडीआई के बाद से इसमें और विस्तार होने की उम्मीद की जा रही है। कई विदेशी कंपनियां अपने प्रोडक्ट का पेटेंट कराकर, भारत में कारोबार करने आ रही है। इससे घरेलू फार्मा इंडस्ट्री और तेजी से विकसित हो रही है। इसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों इस फील्ड मेंमेडिकलरिप्रेजेंटेटिव्स के लिए जॉब्स की कमी नहींहोगी।

वर्क प्रोफाइल

मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स फार्मास्युटिकल कंपनीज और हेल्यफेयर प्रोफेशनल्स के बीच की कड़ी होते है। वे प्रोडक्ट्स को स्ट्रेटेजी के साथ मार्केट में प्रमोट करते है। चन टु वन के अलावा वे ग्रुप इवेंट्स अॅऑर्गनाइज कर ड्रग्स के प्रति जागरूककरते हैं। फार्मास्युटिकल कंपनीज मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स को हाचर करती है,ताकि ये कस्टमर्स और डॉक्टर्स को अपने प्रोडक्ट की उपयोगिता के प्रति कनबीन्स कर सके। इस तराा मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव इस की मार्केटिंग में एक अहम भूमिका निभाते हैं।

इसके बदले उन्हें प्रमोशन मिलता है। अलग-अलग दवा कंपनिया अपने वहां नियुक्ति के बाद कैडिडेट्स को स्पेशल स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देती है। उन्हें एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, फार्माकोलॉजी, सेल्समैनशिप की ट्रेनिंग के अलाबा डॉक्टर्स की प्रोफाइल, प्रोडक्टनॉलेज और फील्ड ट्रेनिंग दी जाती है,जिसके तहत सेलिंग टेक्निक्स बताई जाती है। फील्ड ट्रेनिंग के दौरान फ्रेश ग्रेजुएट्स को किसी सीनियर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के अधीन काम करना होता है।

बेसिक स्किल्स

मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव चनने के लिए आपकेपास मेडिकल फील्ड, मैनेजमेंट और मेडिसिन की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। आपको मानव शरीर और दवा में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक तत्वों की भी जानकारी रखनी होगी। ऐसे में आपके पास कम्युनिकेशन स्किल्स के साथ-साथ अंग्रेजी-हिंदी की अच्छी जानकारी होनी चाहिए। इसमें काम करने की कोई फिक्स्ड अवधि नहीं होती है, इसलिए आपको इसके लिए पहले से तैयार रहना होगा। खुद को फिजिकलो भी फिट रखना होगा।

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन

फार्मा विजनेस मैनेजमेंट में बीसीए या एमबीए, फार्मास्युटिकल ऐंड हेल्थकेयर मार्केटिंग में पीजी डिप्लोमा, फार्मा मार्केटिंग में डिप्लोमा या पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा कोर्स करने के बाद आप इसमें आगे बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, सेलिंग और मार्केटिंग की रिकल रखने वाले साइंस ग्रेजुएट्स भी एंट्री ले सकते है। आज कई यूनिवर्सिटीव और कॉलेज में इससे संबंधित कोर्स संचालित किए जा रहे है। कुछ संस्थानों में फार्मा बिजनेस मार्केटिंग से संबंधित कोर्स भी शुरू हो चुके हैं। डिप्लोमा कोर्स करने के लिए आपको साइंस के साथ 12वीं पाश होना जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा में प्रवेश के लिए स्टूडेंट के पास बीएससी, बीफार्मा की डिग्री होनी चाहिए। 12वीं (मैथ्स और बायोलॉजी) के बाद बीबीए (फार्मा बिजनेस) में दाखिला लिया जा सकता है।

प्रोग्रेस का चांस

सेल्स परफॉमेंस और कस्टमर्स को मैनेज करने का हुनर रखने वाले मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव फार्मास्युटिकल मार्केटिंग में शानदार करियर बना सकते हैं। जो लोग कंपनी के टारगेट को समय-समय पर अचीव करते चलते हैं, उन्हें प्रमोशन मिलने में भी देर नहीं लगती है। आप एरिया मैनेजर, रोजनल या जोनल मैनेजर, डिवीजनल सेल्स मैनेजर, डिवीजनल कंट्रोलर, डिप्टी मार्केटिंग के अलावा मार्केटिंग मैनेजर के रूप में प्रोग्रेस कर सकते हैं। मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के अलावा, मार्केटिंग एग्जीक्यूटिन, प्रोडक्टएग्जीक्यूटिव, बिजनेस एग्जीक्यूटिव के रोल में काम करने का पूरा अवसर है।

एमवीए या फार्मेसी की विधी रखने वाले एरिया मैनेजर, सर्किल मैनेजर, प्रोडक्ट मैनेजर, ग्रुप प्रोडक्ट मैनेजर, क्वालिटी कंट्रोल मैनेजर, ब्रांड मैनेजर या मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में रैनबैक्सी, ग्लैक्सो, सन फार्मा, फाइजर, सिप्ला, निकोलस पिरामल जैसी कंपनियों के र साथ जुड़ सकते हैं। इन कंपनियों में एक-दो साल का एक्मापीरियंस रखने वाले मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स को इंटरव्यू के आधार पर नियुक्त किया जाता है। इसके अलावा, समय-समय पर अखबारों में और वेब साइट्‌स पर भी विज्ञापन निकलते रहते हैं।

सेलरी पैकेज

सामान्य तौर पर शुरुआती वेतन 10 से 20 हजार रुपये तक है, लेकिन अनुभव के आधार पर आमदनी में इजाफा होता रहता है। कुछ अनुभव हासिल करने के बाद 30 से 40 हजार रुपये प्रतिमाह आसानी से हासिल किए जा सकते हैं। पांच या सात साल के अनुभव के बाद वेतन लाखों में हो संकती है। इसके अलावा, आपके परफॉर्मेंस के आधार पर समय-समय पर इंसेंटिव सहित कार्ड तरह की सुविधाएं दी जाती है। सेल्स टारगेट अचीव करने बालों को कई बार बांड मैनेजमेंट जैसी जिम्मेदारी तक सौंप दी जाती है। इससे आपकी आमदनी बढ़ने के साथ-साथ मार्केट में एक अलग पहचान बनती है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।