फिल्म मेकिंग : क्रिएटिविटी का अपार संसार      Publish Date : 16/09/2026

फिल्म मेकिंग : क्रिएटिविटी का अपार संसार

                                                                                                                 प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

फिल्म एवं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की ग्रोथ के साथ ही फिल्म मेकिग ग एक उभरते हुए करियर के के रूप में सामने आया है। आज इंडस्ट्री में अनेक ऐसे युवा प्रोफेशनाया है, जिन्नोंने टेक्नोलॉजी और क्रिएटिविटी के मिश्रण जरिये शानदार फिल्में बनाई है। उन्होंने दर्शको के साथ-साथ आलोचकों का दिल भी जीता है। अगर आपमें भी यह हुनर है, तो इस फील्ह में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर है।

क्या है फिल्म मेकिंग?

यहएक टीम वर्क है, जिसमें अलग-अलग तरह के स्किल्डलोगों के के साथ तालमेल बिठाकर काम करना होता है। इसमें एक्टिंग डायरेक्टिंग, प्रोड्यूसिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग,सिनेमेटोग्राफी, साउंड रिकॉर्डिंग, विजुअल मिक्सिंग, सिंगिंग एडिटिंग सादि शामिल है। ऐसे में एक फिल्ममेकर को इन सभी श्रेधे पर बराबर से ध्यान देना पड़ता है। इस तरह का फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री, न्यूज रोलर, प्रमोशनल फिल्म्स, टीवी सॉमर्शियल्लर, प्यूजिक वीडियोज का निर्माण करता है।

कैसे होता है काम?

एक फिल्म मेकर बनने के लिए आपके पास क्रिएटिविटी, सेंसिटिविटी, फोकस, सेल्फ डिसिप्लिन, मोटिवेशन के साथ-साथ टेक्निकल नॉलेज होनी जरूरी है। आपको कई तरह के आइडिया, स्टोरी, स्क्रिप्ट, फास्ट, स्क्रीनप्ले, म्यूजिक, डायरेक्शन, बजट, सेंट, लोकेशन आदि पर कामकरना होता है, यानी एक फिल्म नेकर को फिल्म के लिए पूंजी का इंतजाम करने से लेकर उसके डिस्ट्रिब्यूशन, स्क्रीनिंग जैसे सभी पहलुओं को देखना लेता है। भारत में कई इंस्टीट्यूट्स है, जो फिल्म मेकिंग में डिप्लोमा और डिग्री कोर्स ऑफर करते हैं।

करियर की संभावनाएं

वैसे तो फिल्म मेकिंग एक पैचैलेंजिंग जॉब है, लेकिन इसमें रोजगार की कमी नहीं है। अगर आपके पास किसी तरह की आर्टिस्टिक या टेक्निकल स्किल हो, तो इस फील्ड में अपना फ्यूचर सिक्योर कर सकते है। आप बतौर सिनेगेटोघ्राफर, साउंड इंजीनियर, एडिटर जाम का काम भी कर सकते हैं।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।