स्टार्ट-अप में हैं मौके बेशुमार !      Publish Date : 09/08/2026

            स्टार्ट-अप में हैं मौके बेशुमार !

                                                                                                                     प्रो0 आर. एस. सेंगर

अमेरिका और ब्रिटेन के बाद स्टार्ट-अप -अप शुरू शुरू करने के मामले में फिलहाल दुनिया में तीसरे नंबर पर चल रहे भारत की ग्रोथ को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अगले साल तक हमारा देश स्र्टाट-अप्स के मामले में नंबर वन हो सकता है। प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च स्टार्ट-अप इंडिया कार्यक्रम से इसे और गति मिल सकती है। माना जा रहा है अगले दस साल में भारत में एक लाख स्टार्ट-अप स्थापित होंगे, जिनमें करीब 35 लाख युवाओं को रोजगार मिल सकता है। इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए युवा कैसे करें खुद को तैयार, बता रहे हैं, हमारे कॅरियर विशेषज्ञ प्रो0 आर. एस. सेंगर -

पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च स्टार्ट-अप इंडिया ने देश के युवाओं में खुद को आगे बढ़ाने का भरोसा और बढ़ा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, पेटीएम, ओयो रूम्मर, ओला कैब्स, मिंत्रा जैसे स्टार्ट-अप्स ने अपनी कामयाबी से बड़ी और स्थापित कपनियों को चौंकाया है।

इतना ही नहीं, इनसे प्रेरणा लेते हुए युवा एंटरप्रिन्योर्स की नई जमात भी लगातार सामने आ रही है। मात्र 19 साल की उम्र में ओयो रूम्स की स्थापना करने वाले रितेश अग्रवाल को हाल ही में फोर्ब्स द्वारा अपनी सूची में शामिल करना यही साबित करता है कि किस तरह भारत के मध्यवर्गीय परिवारों में पले-बढ़े युवाओं के सपनों को पंख लग रहे हैं।

ट्रेंड में बदलाव

पिछले कुछ सालों में ही जॉब्स ट्रेंड में 360 डिग्री का बदलाव देखने में आ रहा है। पहले युवा जहां सरकारी या एमएनसी नौकरियों के पीछे दौड़ लगाते थे, वहीं अब इनमें से तमाम युवा नौकरी खोजने-पाने ने नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले की भूमिका में सामने आ रहे है। फोब्स ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि भारत में स्टार्ट-अपशुरू करने वाले युवा उद्यमियों की औसत उम्र 30 साल से कम है। भारत में छोटे-बड़े मिलाकर फिलहाल करीच 5 हजार स्टार्ट-अप्स काम कर रहे हैं।

इसमें हर दिन चार से छह स्टार्ट-अप जुड़ते है। इनकी कामयाची देख नौकरी कर रहे और नौकरी तलाश रहे बहुतेरे टैलेंटेड युवा भी अपनी रुचि के क्षेत्र में स्टार्ट-अप आरंभ करने की संभावनाएं तलाश रहे है। इतना ही नहीं, इनकी कामयाबी को देखते हुए स्थापित कंपनियों में सीनियर लेबल पर काम कर रहे एम्प्लॉयी भी दूसरी बड़ी कंपनियों से जुड़ने की बजाय इन स्टार्ट-अप्स से जुड़ना कहीं अधिक पसंद कर रहे हैं या फिर खुद की ही कंपनी स्थापित करने की ओर बढ़ रहे हैं। स्टार्ट-अप्स के भविष्य को देखते हुए इन्हें एंजेल इन्वेस्टर्स का भी खूब साथ मिल रहा है।

मुश्किलें हों आसान

देश को विकास की राह पर आगे बढ़ाने वाला यह दिलचस्प ट्रेंड और जोर पकड़ सकता है, बशर्ते कि सरकार इनकी राह में आने वाली बाधाओं को दूर करते हुए सरलता से इनके आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करे। अगर सरकार अपनी योजनाओं को प्रचारित-प्रसारित करने के साथ साथ इन पर शत-प्रतिशत व्यावहारिक अमल करे और समय-समय पर स्टार्ट-अप शुरू करने वाले युवाओं की चिताओं को समझकर उन्हें दूर करने का प्रयास करे, तो निश्चित रूप से उनন एक्सपर्ट्स की यह बात सही साबित हो सकती है, जो यह मानते हैं कि अगले ही साल तक अमेरिका और ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए स्टार्ट अप्स के मामले में भारत दुनिया का नंबर वन देश बन सकता है। इसके लिए विकास का नारा लगाने वाली राज्य सरकारों को भी आगे आना होगा।

रोजगार की राह

देश के युवाओं को रोजगार मुहैया कराना हमेशा से एक चुनौती बना हुआ है। लेकिन नित नये क्षेत्रों में सामने आ रहे स्टार्ट-अप्स ने युवाओं को खुद-ब-खुद रोजगार की मजेदार राह दिखानी आरंभ कर दी है। घर-घर ग्रॉसरी का सामान पहुंचाना हो या फिर खाने-पीने का सामान या ताजी हरी सब्जियां, इन कामों का ये भरपूर आनंद भी उता रहे है और आम लोगों को अपेक्षाकृत सस्ते दाम पर अच्छी गुणवत्ता वाले सामान भी मिल जा रहे हैं। यह तो महन शुरुआत है। भारत जैसे दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में छोटे शहरों, कस्बों, गावो तक पहुंचने और कारोबार को फैलाने की अपारसंभावनाएं है। इसे देसी, विदेशी कंपनियों और एमएनसी के साथ-साथ भारत के टैलेंटेड युवा भी बखूबी समझ रहे हैं।

समझें अपनी ताकत

अगर आप भी इंडियन स्टार्ट-अप्स से प्रेरित है और अपने मन का कुछ करने के लिए व्याकुल है, तो अति-उत्साह में आने या सिर्फ सपने देखने की बजाय सबसे पहले अपनी ताकत को जाने-समझें। इस बात को संभावनाएं तलाशें कि जिस क्षेत्र में आपकी रुचि है, उसमें आप नया क्या कर सकते हैं? आप जो प्रोडक्ट या सर्विस देना चाहते हैं, उसे लोग क्यों पसंद करेंगे? आप उसे बाजार में या लोगों तक किस तरह पहुंचाएंगे? उसकी मार्केटिंग कैसे करेंगे? उसके लिए फाइनेंशियली कितना स्ट्रॉन्ग होने की जरूरत है? फ्यूचर के लिए क्या स्टेटेजी है? एक मजबूत टीम किस तरह बनाएंगे? इन सब बातों पर विचार और पूरी तैयारी करने के बाद ही काम आरंभ करें। एक-एक कदम सोच-समझ कर बढ़ाएं।

करें कारगर पहल

अगर आप खुद का स्टार्ट-अप शुरू करने की बजाय कुछ साल नौकरी करके जरूरी व्यावहारिक बारीकियां समझना सीखना चाहते है, तो किसी भी कंपनी में (स्टार्ट-अप में मिल सके तो बेहतर) शुरुआत कर सकते हैं। ह।. जहां भी किसी कंपनी को ज्वाइन करें, वहां पूरी लगन, मेहनत और ईमानदारी से काम करें। उत्सुकता और उत्साह के साथ सीखने के लिए हत्पर रखें।जहां सुझाव मांग जाएं, वहां पहल करते हुए अपने इनोवेटिव आइडियाज शेयर करें। मैनेजमेंट और सीनियर्स की नजरों में अपनी काबिलियत को सिद्व करें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।