धरोहरों के रखरखाव में करियर      Publish Date : 10/05/2026

               धरोहरों के रखरखाव में करियर

                                                                                                                                 प्रो0 आर. एस. सेंगर

पिछले कुछ सालों से देश में कल्चरल टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ ही पुरानी विरासत तथा ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को सहेजने-संवारने पर काफी जोर दिया जा रहा है। जगह-जगह खोले जा रहे म्यूजियम के उदाहरण सामने हैं। इससे हेरिटेज मैनेजमेंट और कंजर्वेशन के इस क्षेत्र में जाब के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। कैसे आप भी इस फील्ड में अपना एक अच्छा करियर बना सकते हैं।

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से देश में टूरिज्म को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए काशी, अयोध्या या उज्जैन जैसे कई धार्मिक स्थलों को टूरिज्म से जोड़ने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। देश को विरासत का प्रबंधन और उसे सहेजने की पहल भी इसी का एक हिस्सा है। इसी के तहत तमाम पांडुलिपियों और पुरातन संपदाओं को सहेजते हुए लोगों में इसके प्रति जागरूकता लाने के लिए जगह-जगह म्यूजियम्स खोले जा रहे हैं। जाहिर है इससे युवाओं के लिए हेरिटेज मैनेजमेंट या कंजर्वेशन से जुड़े क्षेत्रों में जाब के अवसर भी बढ़ रहे हैं।

क्या है हेरिटेज मैनेजमेंट: हेरिटेज मैनेजमेंट कंजर्वेशन एक ऐसा फील्ड है, जिसमें ऐतिहासिक महत्व की चीजों वस्तुओं को संरक्षित करने या उनके प्रबंधन से जुड़े कार्य किए जाते हैं। सदियों से ताजमहल, लाल किला, कुतुबमीनार, अजंता, एलोरा या मंदिर व मकबरे देश की पहचान रहे हैं। ये आज भी विशाल समृद्ध संस्कृति की झलक पेश कर रहे हैं। ये ऐतिहासिक स्थल अगर आज भी ज्यों का त्यों बने हुए हैं तो इसके पीछे हेरिटेज मैनेजमेंट और कंजर्वेशन की ही बड़ी भूमिका रही है। दरअसल, ये स्थल, वर्षों पुराने हो चुके हैं, अब इन्हें बचाने और सहेजने का वक्त है। इसके चलते ऐसे पेशेवरों की जरूरत लगातार बढ़ रही है, जो धरोहरों को मूलस्वरूप में बनाए रखने में कुशल हों। अगर आपकी रुचि भी अतीत यानी प्राचीन कला या वास्तुशास्त्र को जानने में है, तो हेरिटेज मैनेजमेंट आर्कियोलाजी से जुड़े कोर्स करने के बाद इस फील्ड में आकर्षक करियर बना सकते हैं।

                                          

तेजी से बढ़ रहीं संभावनाएं: यूनेस्को की ओर से अब तक देश की 44 धरोहरों को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिल चुका है। इनमें 36 सांस्कृतिक, सात प्राकृतिक और एक मिश्रित स्थल शामिल हैं। देश की ये ऐतिहासिक-सांस्कृतिक धरोहरें विदेशी मुद्रा भंडार का भी एक बड़ा जरिया हैं, क्योंकि यहां घरेलू पर्यटकों के अलावा हर साल लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक भी इसकी खूबसूरती निहारने के लिए आते हैं। इसके अलावा, म्यूजियम्स में बेशकीमती पांडुलिपियों, मूर्तियों, सिक्कों व पेंटिंग्स आदि के रखरखाव आदि की भी जरूरत होती है। इससे हाल के वर्षों में आर्ट रेस्टोरर, हेरिटेज कंजर्वेटर, वाइल्ड लाइफ कंजर्वेटर और हेरिटेज मैनेजर्स की मांग तेजी से बढ़ी है।

कोर्स एवं योग्यताः देश में विभिन्न संस्थानों की ओर से हेरिटेज मैनेजमेंट तथा कंजर्वेशन से जुड़े कोर्स संचालित हो रहे हैं। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त इंडियन इंस्टीट्यूट आफ हेरिटेज भी अपने यहां हेरिटेज कंजर्वेशन तथा म्यूजियोलाजी से संबंधित कई कोर्स आफर कर रहा है, जैसे कि एमए प्रोग्राम इन आर्ट कंजर्वेशन। यह एक फुलटाइम कोर्स है। इसमें इससे संबंधित थ्योरी तथा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग कराए जाते हैं, ताकि इसके प्रोफेशनल कंजर्वेशन आर्ट तथा कल्चरल हेरिटेज की बारीकियों में कुशलता हासिल कर सकें। इसी तरह म्यूजियोलाजी के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए यहां से एमए इन म्यूजियोलाजी का कोर्स किया जा सकता है। यह भी फुलटाइम कोर्स है। इस संस्थान से आप एमए इन हिस्ट्री आफ आर्ट, एमए इन आर्कियोलाजी, एमए इन एपिग्राफी/पेलियोग्राफी के रूप में फुलटाइम कोर्स के अलावा आर्ट एप्रीशिएशन तथा भारतीय कला निधि जैसे सर्टिफिकेट कोर्स भी किए जा सकते हैं। यहां एमए से जुड़े इन कोर्सेज में प्रवेश लिखित परीक्षा तथा इंटरव्यू के आधार पर होता है। वहीं, सर्टिफिकेट स्तर के कोर्सेज में प्रवेश पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होता है। आवेदन तथा फीस से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए संस्थान की वेबसाइट देखें।

आने वाले समय में बहुत अवसर प्रदान करेगा हेरिटेज मैनेजमेंट

                                       

आने वाले समय में हेरिटेज मैनेजमेंट सबसे उज्ज्वल फील्ड में से एक होगा। यह फील्ड आगे बहुत अवसर प्रदान करेगा, क्योंकि यह बहुत बड़ा सेक्टर है। हास्पिटैलिटी मैनेजमेंट, टूरिज्ममैनेजमेंट, ट्रैवेल मैनेजमेंट, हेरिटेज मैनेजमेंट तथा पुरातात्विक संपदाओं के संरक्षण जैसे सभी क्षेत्र आपस में जुड़े हुए हैं। ये सारे सेक्टर युवाओं को नई चुनौती, ज्ञान के नए अवसर प्रदान करते हैं। चूंकि युवाओं को नई-नई जगह देखने, नई चुनौतियां स्वीकार करना अच्छा लगता है, ऐसे में ये सभी क्षेत्र उनको अवसर प्रदान कर सकते हैं। केंद्र की सत्ता में आने के बाद मोदी जी ने मंत्र दिया कि विरासत भी विकास भी यानी कोई विकास अपनी विरासत का ध्यान रखे बगैर, उसे संरक्षित किए बगैर नहीं हो सकता। इसी क्रम में चाहे धार्मिक क्षेत्र हों, पुरातात्विक महत्व के क्षेत्र को, सभी को चिह्नित करके उन्हें सहेजने और संवारने पर काफी ध्यान दिया जा रहा है। इसलिए युवाओं को सुझाव है कि वे अपने देश के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानें, ज्यादा से ज्यादा अपने देश के बारे में सोचें। इससे आपको नई-नई चीजें पता लगेंगी और अवसर भी मिलेगा।

परीक्षा को चौलेंज के रूप में लें

देश में हेरिटेज मैनेजमेंट सेक्टर अभी नया फील्ड है, लेकिन यहां जाब के अवसर कम नहीं हैं। हेरिटेज मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स के लिए कालेजों में टीचिंग और रिसर्च वर्क के अलावा नेशनल/स्टेट म्यूजियम, कंजर्वेशन लैब्स, लाइब्रेरी, आर्काइब्स आर्किलाजिकल सर्वे आफ इंडिया, राज्यों के आर्कियोलाजी विभागों तथा टूरिज्म विभागों में जाब्स के अनेक मौके हैं। अब इस क्षेत्र में बहुत सारे एनजीओ आ गए हैं, यहां भी जाब के अवसर पैदा हो रहे हैं। हेरिटेज मैनेजमेंट से जुड़े तमाम प्रोफेशनल इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फार आर्ट एंड कल्चर, इंडियन नेशनल ट्रस्ट फार आर्ट, कल्चर एंड हेरिटेज तथा म्यूजियम्स में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।