सफलता के लिए अहम है संवाद का कौशल      Publish Date : 03/05/2026

      सफलता के लिए अहम है संवाद का कौशल

                                                                                                                                  प्रो0 आर. एस. सेंगर

पेशेवर दुनिया में संवाद के मायने सिर्फ बातचीत से ही नहीं होते। नई नौकरी, कॉलेज या जॉब, हर जगह प्रोफेशनल कम्यूनिकेशन का स्किल आपको भीड़ से अलग दिखाती है। इसे सीखने का क्या हो नजरिया, बता रहे हैं हमारे करिअर विशेषज्ञ प्रो0 आर. एस. सेंगर-

काफी समय से, कम्यूनिकेशन को ‘सॉफ्ट स्किल्स’ में शामिल किया जा रहा है। लेकिन अब यह हाशिए पर ना हो कर किसी भी तकनीकी स्किल की तरह लिया जाने लगा है। क्योंकि, भले ही लॉजिकल थिंकिंग और कई तरह के नजरिए हमें योजना को आगे बढ़ाने और समाधानों पर काम करने के लिए जरूरी होते हैं, लेकिन ये तभी संभव होता है, जब उसके साथ आपकी टीम के साथी जुड़ सकें। यह संभव होता है संवाद के जरिए।

सिर्फ भाषा का ही खेल नहीं

                                         

किसी भाषा में प्रवीणता, जैसे अंग्रेजी, हमेशा यह निर्धारित नहीं करती कि आप कितने अच्छे कम्यूनिकेटर हैं। प्रभावी संवाद विशेष रूप से ऑफिस में अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सक्षम होना है, ताकि जिन लोगों को संबोधित किया जा रहा है, उन्हें तुरंत वही समझ में आ जाए, जो कहा जा रहा है।

संवाद है एक व्यवस्थित प्रक्रिया

बेहतर कम्यूनिकेशन का नुस्खा प्रॉब्लम सॉल्विंग के नुस्खे की तरह ही व्यवस्थित प्रक्रिया है। किसी समस्या को हल करने के लिए आपको मुद्दों को तार्किक रूप से व्यवस्थित करने की आवश्यकता होती है। शब्दों और विचारों के साथ भी ऐसा ही है। हम खराब कम्यूनिकेटर हैं, क्योंकि हम पर्याप्त तर्क, बहस और सवाल नहीं करते हैं। इसके लिए आपको पढ़ना होगा और जानकारी के माध्यम से तर्क करने की समझ बनानी होगी। इसे एक आदत की तरह विकसित करना ही कम्यूनिकेशन में कुशलता का एकमात्र तरीका है।

अपने श्रोता को समझें

विषय वस्तु के साथ-साथ अपने सुनने वालों को समझना ही संवाद का सबसे बड़ा पहलू है, जिससे लोग चूक जाते हैं। विभिन्न समूहों और विभिन्न लोगों से जुड़ना बहुत महत्वपूर्ण है। आप घर में कैसे बात करेंगे और ऑफिस में सहकर्मी और वरिष्ठ या साथियों से, इसके बीच अंतर है। दूसरों से बातचीत का समय निकालकर उनकी प्रेरणा को समझकर समझकर उन्हें किसी उद्देश्य से जोड़ने में मदद मिलती है। यह पहचानने में भी मदद मिलती है कि लोग संवाद के किस तरीके को पसंद करते हैं, वे कितने समय में प्रतिक्रिया की अपेक्षा करते हैं और उनकी संवाद शैली कितनी औपचारिक/अनौपचारिक है।

सुनना भी सीखें

अच्छे संवाद कौशल के लिए पढ़ने की तरह, सुनना भी सीखें। लोग सोचते हैं कि संवाद का मूल है कि उन्हें ही बोलना और सुना जाना चाहिए। लेकिन सबसे अच्छे कम्यूनिकेटर महान श्रोता होते हैं। एक्टिव लिसनिंग यानी एकाग्रता से सुनने और सवाल करने की आदत भी विकसित करें।

प्रेरित करने वाला संवाद सीखें

                                              

संवाद में प्रेरित करने की क्षमता अहम अंग है। पेशेवर दुनिया के लोगों में आपके बारे में समझ दरअसल बातचीत दर बातचीत, लिंक्डइन पोस्ट. और ईमेल-दर-ईमेल तैयार होती है। हमारे ऑफिस में हम लीडरशिप को देखते हैं। जिस तरह से वे बैठकें आयोजित करते हैं, बहस में लोगों को समझाते हैं, अपनी टीमों को संबोधित करते हैं- अक्सर यह सिर्फ उतना नहीं होता, जो ये कहते हैं, बल्कि यह होता है कि वे इसे कैसे कहते हैं।

किन शब्दों पर जोर देते हैं, उनका लहजा, यहां तक कि वे कितनी बार संवाद करते हैं, यह सभी डेटा पॉइंट वन जाते हैं, जिन्हें हम अनजाने में सीखते चलते हैं। यह भी मायने रखता है कि उन्हें कैसे देखते हैं। दूसरे भी आपको उसी तरह देखेंगे। अपने संवाद से अपनी छवि बनाने का काम अपने हाथ में लें। जिनकी संवाद क्षमताओं की आप प्रशंसा करते हैं, उनसे सलाह लें। इसकी मदद से सुधार का रोड मैप तैयार करें। यह आपके करियर के लिए सबसे महत्वपूर्ण निवेश हो सकता है।

समझें नॉन वर्बल कम्यूनिकेशन

हमारे कम्यूनिकेशन में 55 फीसदी हिस्सा नॉन वर्बल कम्यूनिकेशन (चेहरे और शरीर की भाव-भंगिमाएं, आई कॉन्टैक्ट, दो लोगों के बीच की दूरी, लहजा आदि) का होता है। आवाज 38 फीसदी और शब्द सिर्फ 7 फीसदी भूमिका निभाते हैं।

क्या आप जानते हैं?

  • वर्ष 2023 में ऑफिस के साथियों से संवाद पूरे वर्क वीक का 72 फीसदी के लगभग है, ग्रामरली की रिपोर्ट के मुताबिक।
  • संवाद से अपनी विश्वसनीयता स्थापित करें। शुरुआती 30 सेकेंड बुद्धिमानी से खर्च करें। लोग शुरुआती 30 सेकेंड में ही आपकी गहराई व सफलता का अंदाजा लगा लेते हैं।

कैसे सीखें

  • अपनी बातचीत का वीडियो बनाकर उसे देखें और कमियों का विश्लेषण करें।
  • इंटरव्यू, ऑफिस, ऑडिशन या कॉलेज प्रेजेंटेशन या ऐसे ही आयोजनों के लिए कम से कम दस चार सारी सामग्री के साथ प्रेजेंटेशन की प्रैक्टिस करें।
  • प्रैक्टिस खड़े होकर करें। बैठे नहीं।
  • इंटरव्यू या प्रेजेंटेशन से पहले एक-दो मिनट का पावर पोज बनाकर खड़े हों। जैसे मुस्कुराहट, कमर पर हाथ रखकर सामने देखते हुए सांसों पर फोकस करना। इससे आपका आत्मविश्वास तुरंत बढ़ जाता है।

ध्यान रखें

मौन का उपयोगः बातचीत के दौरान स्वयं के विचारों में खोने या वक्ता को टोकने की इच्छा को रोकें। सोचने के लिए रुकें और वक्ता को खुद को पूरी तरह से व्यक्त करने का मौका दें।

तुरंत निष्कर्ष पर न पहुंचें: दूसरे के नजरिए को समझने पर अधिक से अधिक ध्यान दें।

एक जिज्ञासु मानसिकता अपनाएं: विषय को गहराई से समझने के लिए ओपन-एंडेड प्रश्न पूछे।

कम्यूनिकेशन के लिए जरूरी 5 स्किल

प्रभावी और स्पष्ट भाषाः क्योंकि ऑफिस में टीम के साथ मिलकर काम करना होता है।

प्रोफेशनल राइटिंग स्किल्सः प्रोफेशनल आइडिया को ज्यादा असरदार ढंग से पेश करने में राइटिंग स्किल्स बनाएं।

डीप रीडिंगः पढ़ने के उद्देश्य के अनुसार पढ़ने का कौशल। जैसे आप जानकारी के लिए पढ़ रहे हैं या फैक्ट चेक करके विश्लेषण के लिए या सिर्फ जल्दी से मसले को समझने के लिए पढ़ रहे हैं।

प्रेजेंस बिल्डिंगः अपनी उपस्थिति का ब्रांड तैयार करना सीखें। ऑफिस में आप लोगों से कैसे व्यवहार और सामजस्य स्थापित करें

  • वाद करते हैं, यह आपकी स्वीकार्यता व विश्वसनीयता का आधार तैयार करता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।