मेटाकॉग्निशन /आधिसंज्ञान (Metacognition)      Publish Date : 28/04/2026

          मेटाकॉग्निशन /आधिसंज्ञान                         (Metacognition)

                                                                                                  प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

मेटाकॉग्निशन/आधिसंज्ञान (Metacognition) का अर्थ है "अपनी सोच के बारे में सोचना"। यह अपनी स्वयं की मानसिक प्रक्रियाओं (सोचने, सीखने, याद रखने) को समझने, उन पर नज़र रखने (monitoring) और उन्हें नियंत्रित करने की क्षमता है। सरल शब्दों में, यह जानना कि आप कैसे सीखते हैं और अपनी सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए इस ज्ञान का उपयोग करना है।

मेटाकॉग्निशन के मुख्य घटक:

(1) मेटाकॉग्निटिव ज्ञान: यह समझना कि आप एक शिक्षार्थी के रूप में कैसे काम करते हैं, आपकी ताकत और कमजोरियां क्या हैं।

(2) मेटाकॉग्निटिव रेगुलेशन (नियमन): अपनी पढ़ाई या काम को प्रबंधित करना। इसके तीन चरण हैं:

(i) योजना (Planning): लक्ष्य निर्धारित करना और रणनीति चुनना।

(ii) निगरानी (Monitoring): काम करते समय अपनी प्रगति की जांच करना।

(iii) मूल्यांकन (Evaluation): काम के बाद परिणामों का विश्लेषण करना कि क्या बेहतर किया जा सकता था।

मेटाकॉग्निशन क्यों महत्वपूर्ण है?

                         

(1) यह छात्रों को स्वतंत्र (independent) शिक्षार्थी बनाता है।

(2) समस्या-समाधान (problem-solving) कौशल को बढ़ाता है।

(3) यह सीखने की गति और समझ को बेहतर बनाता है।

(4) यह आत्म-नियमन (self-regulation) में मदद करता है।

 उदाहरण:

परीक्षा से पहले यह सोचना कि "मुझे गणित के सूत्र याद करने में कठिनाई होती है (ज्ञान), इसलिए मैं आज ज्यादा अभ्यास करूंगा (योजना) और देखूंगा कि क्या मैं अब इन्हें सही कर पा रहा हूं (निगरानी)"।

मेटाकॉग्निशन के उदाहरण और लाभ:

                              

(1) यह पहचानना कि आपको गणित की तुलना में इतिहास सीखने में अधिक कठिनाई हो रही है।

(2) पढ़ते समय स्वयं से प्रश्न पूछना कि "क्या मुझे यह समझ में आया?"।

(3) यह छात्रों को स्वतंत्र शिक्षार्थी बनने में मदद करता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।