जब छंटनी का डर हावी होने लगे      Publish Date : 05/03/2026

         जब छंटनी का डर हावी होने लगे

                                                                                                      प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

आज कार्यस्थल पर एआई के बढ़ते इस्तेमाल, के कारण नौकरी को लेकर असुरक्षा तेजी से बढ़ रही है। इसका असर कर्मचारियों के व्यवहार में दिखता है, वे चुप रहने लगते हैं, जोखिम और नए विचारों से बचते हैं, और समाधान के बजाय आत्म-सुरक्षा पर ध्यान देने लगते हैं। अगर लीडर इस अनकहे डर को नहीं समझते, तो गलत जानकारी, कम सहभागिता और कमजोर प्रदर्शन जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। कई लीडर खुद तनाव में होने के कारण स्थिति को और कठिन बना, देते हैं। नौकरी चले जाने का डर खुद पर या कर्मचारियों पर हावी न होने लगे, तो ऐसी स्थिति में लीडर और कर्मचारी, दोनों कुछ छोटे-छोटे कदम उठा सकते हैं।

डर को स्वीकारें

                               

भावनाओं को शब्दों में कहना तनाव घटाता है और डरं को हल्का करता है। अपनी और टीम की भावनाओं को पहचानें, उनके डर को स्वीकारें और हाल की चुनौतियों पर संवेदनशील बातचीत शुरू करें। डर स्वीकारने से वह बढ़ता नहीं, बल्कि कम होता है। समूह में बात मुश्किल लगे, तो व्यक्तिगत रूप से बात करें। आपका उद्देश्य हर, चिंता हल करना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि आप सुन रहे हैं और साथ खड़े हैं। गोपनीय जानकारी हो तो उसे साझा न करें, बस शांत, स्पष्ट और नैतिक रूप से सहयोगी रहें।

भरोसेमंद आश्वासन दें

अनिश्चित समय में चिंता बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन आपका स्पष्ट और ईमानदार संवाद टीम को स्थिरता देता है। उन्हें हर जवाब नहीं चाहिए, बल्कि दिशा और नियमित अपडेट चाहिए। साफ बताएं कि क्या निश्चित है और क्या अभी अनिश्चित, ताकि अफवाहें न फैलें। समय-सीमा बताते रहें और जितना संभव हो उतना भरोसेमंद आश्वासन दें, लेकिन बिना आवश्यकता बड़े वादे न करें। जब आप टीम को सारी जानकारी साझा नहीं कर सकते, तब समय और अपेक्षाओं पर फोकस करना आपकी जिम्मेदारी है।

छोटे-छोटे विकल्प रखें

जब भविष्य अस्पष्ट होता है, तो लोग अक्सर सबसे बुरा सोचने लगते हैं। ऐसे समय में टीम को वे काम सौंपें, जिन्हें वे अच्छी तरह कर सकते हैं और मिलकर छोटे-छोटे अगले कदम तय करें। इससे एकजुटता बढ़ती है और चिंता कम होती है। ध्यान से सुनें, प्राथमिकताएं साथ तय करें, और जहां तक संभव हो टीम को छोटे विकल्प दें, जैसे मीटिंग की आवृत्ति या अपडेट का तरीका, जिससे उन्हें नियंत्रण और सुरक्षा का एहसास मिलता है।

जुड़ाव जैसा माहौल

                              

आपकी भावनाएं टीम के माहौल को सीधे प्रभावित करती हैं। चाहे आपका तनाव हो या शांति। आप नींद, व्यायाम, माइंडफुलनेस जैसी आदतों से शांति विकसित कर सकते हैं। बात करते समय धीमी और स्पष्ट आवाज रखें, और लिखित संदेश भेजने से पहले सोचें कि टीम उन्हें कैसे समझेगी। अनिश्चित समय में जुड़ाव तनाव कम करता है। इसलिए मीटिंग की शुरुआत व्यक्तिगत बातचीत से करें और 'हम साथ हैं' जैसे वाक्य कहें। यह माहौल बनाकर टीम को लचीलेपन की ओर ले जा सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।