
नए विकल्पों का आकर्षण Publish Date : 15/01/2026
नए विकल्पों का आकर्षण
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
“साइंस स्ट्रीम (बायोलॉजी व मैथ्स) से 12वीं के बाद मेडिकल एवं इंजीनियरिंग में करियर बनाने को आजभी पहली प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि पसंद के क्षेत्र को चुनने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। युवा अब उन नए विकल्पों को अपनाने में रुचि ले रहे हैं, जिनमें न सिर्फ उनकी दिलचस्पी है, बल्किजो उभरते मार्केट एवं इंडस्ट्री में उन्हें बेहतर तरीके से स्थापित करने का दमखम रखते हैं। साइंस स्ट्रीम की इन्हीं नई संभावनाओं पर एक नजर”।
ॠविकेश कुमार ने कभी सोचा नहीं था कि इंजीनियरिंग करेंगे। दोस्तों ने साई एटीमलिया, तो उन्होंने भी वही फॉलो कर लिया। इंजीनियरिंग में दाखिले की तमाम प्रवेश परीक्षाएं दी। आखिरकार, कोमेडके (कंसोर्टियम ऑफ मेडिकल, डेंटल ऐंड इंजीनियरिंग कॉलेजेज ऑफ कर्नाटक) की परीक्षा क्लियर करने के बाद उनका दाखिला बेंगलुरु स्थित आर.वी. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में हो गया। मशीनों से लगाव होने के कारण उन्होंने मैकेनिकल ब्रांच चुना। कहते हैं, गवर्नमेंट के अलावा प्राइवेट सेक्टर में मैकेनिकल इंजीनियर्स की अच्छी डिमांड है। खासकर 'मेक इन इंडिया' अभियानके शुरू होने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इनके लिए अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इसलिए जिन स्टूडेंट्स की मशीनों में दिलचस्पी है, इनोवेटिव और क्रिएटिव है, वे इस स्ट्रीम को चुन सकते हैं। मैकेनिकल के अलावा, इंजीनियरिंग के अन्य ब्रांचेज का भी अपनी पसंद के अनुसार चुनाव किया जा सकता है।
मेडिकल
भारत में इंजीनियरिंग के अलावा आज भी मेडिकल फील्ड सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित पेशा माना जाता है। जब भी हम मेडिकल की बात करते हैं, तो एमबीबीएस का ख्याल आता है।हालांकि अब इस सेक्टर का दायस और बढ़ गया है। अनेक नए विकल्प आ गए हैं। मास्टर्स के बाद भी सुपर स्पेशलाइजेशन होने लगे हैं। मेडिकल फील्ड में आने के लिए एमबीबीएस के अलावा बीडीएस, बीएचएमएस, बीएएमएस जैसी डिग्री, एमडी, एमएस जैसे मास्टर, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। एमबीबीएस में ऐंडमिशन नीट के अलावा एएफएमसी, एम्स आदि प्रवेश परीक्षाओं के जरिए हो सकता है।
नैनो-टेक्नोलॉजी
नैनो-टेक्नोलॉजी वह साइंस है, जिसमें सब एटॉमिक लेवल पर मशीनों का निर्माण किया जाता है। आने वाले सालों में जो भी डेवलपमेंट और इनोवेशन होंगे, उनमें इसका इस्तेमाल किया जाएगा। इसे साइंस ऑफ मिनिएचर भी कहा जाता है, जो फ्यूचर टेक्नोलॉजी तैयार करने में मददगार होती है। एसोचैम-टेकसाई रिसर्च के अनुसार, 2025 तक दुनिया के चार में से एक नैनोटेक्नोलॉजिस्ट भारत से हो सकते हैं। ऐसे में इस फील्ड में 10 लाख से अधिक प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। 12वीं के बाद नैनो-टेक्नोलॉजी में बीएससी या बीटेक और उसके बाद इसी में एमएससी या एमटेक करके इस क्षेत्र में शानदार करियर बना सकते हैं।
माइक्रोबायोलॉजी
फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स या बायोलॉजी के साथ 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स, जिनकी रिसर्च और डेवलपमेंट में दिलचस्पी है, वे माइक्रोबायोलॉजी का कोर्स कर सकते हैं। यह बायोलॉजी की ही एक ब्रांच है, जिसमें प्रोटोजोआ, ऐल्गी, बैक्टीरिया, वायरस जैसे सूक्ष्म जीवाणुओं (माइक्रोऑर्गेनिज्म) का अध्ययन किया जाता है। भारत के कई विश्वविद्यालयों में माइक्रोबायोलॉजी में अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स उपलब्ध हैं। माइक्रोबायोलॉजिस्ट के लिए अवसरों कीकमी नहीं है। सरकारी एवं निजी क्षेत्र के अस्पतालों, लेबोरेट्रीज, फूड ऐंड बीवरेज, कामों सेक्टर, बाहर प्रोसेसिंग प्लांट्स आदि में इनके लिए अच्छे अवसरहैं।
बायोटेक्नोलॉजी
साइंस स्ट्रीम के साथ हायर सेकंडरी करने के बाद बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी, बीई या वीटेक कर सकते हैं। संस्थानों में दाखिला मेरिट, एंट्रेंस और कॉमन एंट्रेस एग्जाम के आधार पर मिलता है। कुछ कॉलेजों में आइआइटी जेईई के अंकों के आधार पर ऐंडमिशन होता है। बायोटेक प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ने के साथ इस सेक्टर में काफी निवेश हुआ है। युवा यह कोर्स करके बायोफार्मास्युटिकल्स, बायोसर्विस, बायोएग्रीकल्चर, बायो-इंडस्ट्री और बायोइंफॉर्मेटिक्स जैसे क्षेत्रों में अपना भविष्य संवार सकते हैं।
फूड प्रोसेसिंग
भारत में पैकेज्ड, फास्ट और रेडी-दु-इंट फूड का कारोबार जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, इसके मद्देनजर फूड टेक्नोलॉजी सेक्टर में करियर बनाना अच्छा विकल्प है। साइंस से 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स फूङ टेक्नोलॉजी में बीटेक/बीएससी कोर्स कर सकते हैं। किसी भी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से फूड टेक्नोलॉजी ऐंड प्रोसेसिंग पाठ्यक्रम का कोर्स करने के लिए प्रवेश परीक्षा को क्लियर करना होता है।
फिजियोथेरेपी
फिजियोथेरेपी वह साइंस है, जिसमें मूवमेंटन डिसफंक्शन, डिसएबिलिटी जैसी समस्याओं का समाधान निकाला जाता है। फिजियोथेरेपिस्ट बनने के लिए मुख्य दो तरह के कोर्स हैं-बीपीटी और एमपीटी बीपीटी में प्रवेश के लिए 55 प्रतिशत अंकों के साथ साइंस में 12वीं करना होगा। कुछ इंस्टीट्यूट डिप्लोमा कोर्स भी संचालित करते हैं। इन दिनों ऑनलाइन कोर्सेज भी उपलब्ध हैं। जहां भी आजकल क्लीनिक, हॉस्पिटल, प्राइवेट नर्सिंग होम और रिहेबिलिटेशन सेंटर्स हैं, यहां फिजियोथेरेपिस्ट्स की मांग होती है। इन दिनों स्पोर्ट्स क्लब, हेल्थ क्लब, फिटनेस और मसाज सेंटर, में भी बतौर प्रशिक्षक इन्हें नियुक्त किया जा रहा है।
अन्य ऑप्शंस
एस्ट्रो-फिजिक्सः सितारों और गैलेक्सी में दिलचस्पी रखने वाले 12वीं के बाद एस्ट्रो- फिजिक्स में करियर बना सकते हैं। इसके लिए पांच साल के रिसर्च ओरिएंटेड प्रोग्राम या बैचलर्स प्रोग्राम में ऐंडमिशन ले सकते हैं।
स्पेस साइंसः इसरो और बेंगलुरु स्थित आइआइएससी में इससे संबंधित बीएससी और बीटेक कोर्स कराए जाते हैं।
रोबोटिक साइंसः रोबोटिक्स का इस्तेमाल इन दिनों तकरीबन सभी क्षेत्रों में होने लगा है। फिजिक्स और मैथ से 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल एवं कंप्यूटर साइस में इंजीनियरिंग करके इस क्षेत्र में जा सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
