दूसरे की गलतियों से सीखना ही बुद्विमतता      Publish Date : 28/12/2025

                दूसरे की गलतियों से सीखना ही बुद्विमतता

                                                                                                                                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

‘‘एक बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा दूसरों की गलती से सीखता है, नेतृत्व क्षमता को निखारने के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स:

अगर बड़ी हुई जिम्मेदारियां या कार्य आप पर दबाव बना रहा है तो यह बिलकुल स्वाभाविक है सबसे पहले यह समझना जरूरी है की रुकावट कहां से आ रही है। काम के तरीके से बॉस से या आपकी अपनी आदतों से। बॉस के साथ स्पष्ट संवाद करें और दिखाएं की रणनीतिक सोच से टीम और संगठन को कैसे लाभ होगा छोटे-छोटे रणनीतिक योगदान देकर भरोसा बनाएं और रोजमर्रा के कामों में उलझे रहने के बजाय जिम्मेदारियां टीम को शॉप कर बड़े फैसले पर ध्यान दें।

बदली हुई भूमिका स्पष्ट करें

अपनी भूमिका की बढ़ाओ को पहचान कर सहयोग बढ़ाने और टकराव काम करने पर ध्यान दें। सकारात्मक सोच से शुरुआत करें और सहकर्मियों को अपनी बदली हुई भूमिका स्पष्ट करें। सजा निर्णय की जिम्मेदारी तय करें काम का उचित बटवारा करें और टीम के लिए उपलब्ध रहे। इससे सहयोग और आपका प्रभाव दोनों बढ़ते हैं।

रणनीतिक प्रमाण सुरक्षित रखें

अपेक्षाओं को फिर से स्पष्ट करते हुए आप यह भी दिखा सकते हैं कि रणनीतिक नेतृत्व वास्तव में कैसा होता है। याद रखें कि संगठन आत्मक जीवन में लीडर्स का मूल्यांकन उनके पद सीमा से नहीं बल्कि उनके दिखाई देने वाले व्यवहारों से किया जाता है। आवश्यकताओं में योगदान देकर आप दूसरों के साथ काम करने के तरीके को बदल सकते हैं।

अपने कार्यों को व्यवस्थित करें

अक्सर रणनीति काम में रुकावट हमारी पुरानी आदतों से आती है। इसलिए अपने समय और काम करने के तरीके की समीक्षा करें बैठकों में हर जगह खुद शामिल होने के बजाय सक्षम टीम सदस्यों को आगे बढ़ाएं और हर हफ्ते रणनीतिक सोच के लिए समय तय करें। इससे लोग आपको एक रणनीतिक लीडर के रूप में देखने लगेंगे और आपके दिए गए समय का महत्व बढ़ेगा।

अपने नेतृत्व क्षमता को और निखारे

                                                            

टीम को ज्यादा जिम्मेदारी देना नेतृत्व के लिए जरूरी है। इसके साथ-साथ आपको अपने नेतृत्व टीम का लगातार आकलन और विकास भी करना होता है ताकि वह जटिल नीतियों को समझ सके और निश्चित हालत में सही फैसला ले सके। अपनी टीम को सिर्फ काम पूरा करने वाले ना समझे बल्कि भविष्य के लीडर्स के रूप में भी देखें। यदि इस तरह का विचार आप रखेंगे तो निश्चित रूप से आप अपने कार्य क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ एक कुशल नेतृत्व भी दे सकेंगे।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।