
भविष्य का करियर है माइक्रोबायोलॉजी Publish Date : 23/11/2025
भविष्य का करियर है माइक्रोबायोलॉजी
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
“अगर आप में मनुष्य की लाइफ साइकिल पर सूक्ष्मजीवों के पड़ने वाले प्रभावों को जानने की उत्सुकता है, तो माइक्रोबायोलॉजी में आपके लिए बेहतर अवसर हैं। इस क्षेत्र में कौन-कौन से हैं कोर्स और कैसे मिलती है एंट्री”-
आजकल सभी जगह नई-नई बीमारियां फैलने में विश्व भर में लाखों लोग काल के गाल में समा रहे हैं। नई-नई बीमारियों को फैलाने में बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोजोआ आदि महत्वपूर्ण घटक होते हैं। ये इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें विशेष यंत्रों की सहायता से ही देखना संभव है। माइक्रोबायोलॉजी में प्रोटोजोआ, एल्गी, बैक्टीरिया एवं वायरस जैसे रोगाणुओं के जीवन चक्र से संबंधित पहलुओं का गहराई में अध्यायन किया जाता है। यही कारण है कि इस तरह के प्रोफेशनल्स की इन दिनों काफी डिमांड है। अगर आप माइक्रोबायोलॉजी से ग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट एवं पीएचडी कर लेते हैं तो आपके लिए देश ही नहीं, विदेश में भी बेहतर सैलरी पर नौकरी के अवसर हैं।
क्यों हैं डिमांड में
बैक्टिीरिया, वायरम, प्रोटोजोआ आदि विश्वभर में भरे पड़े हैं, जिन्हें नग्न आंखों से देखना संभव ही नहीं है। यह धरती पर जोबन के हर पहलू को प्रभावित कर रहे हैं। वायरस जहां सदीं, फ्लू और भोजन की विषेला बनाते हैं, वहीं कुछ रोगाणु रि-साइकिलिंग के माध्यम से से खाद्य पदार्थों एवं दवाओं के उत्पादन में महत्वपूर्ण होते हैं। माइक्रोबायोलोजिस्ट विभिन्न नमूनों की जांच कर मानव जीवन सहित अन्य प्राणियों पर सूक्ष्म जीवों के पड़ने वाले प्रभाव का पता लगाता है। समाज के लिए महत्वपूर्ण बन चुके सूक्ष्मविज्ञानी व्यक्ति के शरीर पर सूक्ष्म जीवों के पड़ने वाले पॉजिटिव और निगेटिव प्रभाव को सकारात्मक में बदलने के लिए तकनीक खोजते हैं। माइक्रोबायोलोजिस्ट जीन्स धेरैपी विकसित कर अनुवांशिक विकारों को खोजकर उनका समाधान करने के लिए प्रयासरत रहते हैं।
शैक्षिक योग्यता
देश के विभिन्न संस्थानों में माइक्रो बायोलॉजी से स्नातक करने के लिए कैंडिडेट्स को बायोलोजी एवं गणित से बारहवों पास होना अनिवार्य है। एसएससी करने के लिए माइक्रोबायोलॉजी या लाइफ साईस विषय में स्नातक जरूरी है। माइक्रोवायोलॉजी में रिसर्च वही स्टूडेंट्स कर सकते हैं, जिन्होंने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन माइक्रोबायोलॉजी से किया हो और रिसर्च के लिए यूजीसी द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करता हो।
एंट्री है आसान
विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से माइक्रोबायोलॉजी में स्नातक, परास्नातक एवं रिसर्च करने के लिए एंट्री के मानक अलग- अलग हैं। इसके लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती हैं, जिसमें सफल कैंडिडेट्स की मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। स्नातक स्तर पर माइक्रोबायोलॉजी से स्टडी करने के इच्छुक कैंडिडेट्स को प्रवेश परीक्षा देने के लिए खूब तैयारी करनी पड़ती है।
इसमें बाहरवीं स्तर के पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाते हैं। परास्नातक में प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय या संस्थान माइक्रोबायोलॉजी में कैंडिडेट्स की रूचि और विषय के प्रति उसके लगाव की परखता है।
किसका क्या कार्य
माइक्रोबायोलॉजी से पढ़ाई करने के उपरांत विभिन्न संस्थानों में अलग-अलग पदों पर नियुक्ति होती है। कुछ पदों का दायित्व एवंकार्य इस प्रकार से है:
टीचिंग: माइक्रोबायोलॉजी में नेट, स्लेट एवं पीएचडी करने के उपरांत कैंडिडेट्स को विश्वविद्यालयों एवं इंस्टीट्यूट में शिक्षक की भूमिका का निर्वाह करना पड़ता है। यदि आपकी रुचि टीचिंग में है, तो आपके लिए बेहतर करियर है।पर्यावरण सूक्ष्मजीव विज्ञानी पर्यावरण के क्षेत्र में अध्ययन करने के साथ एन्वायरनमेंट में माइक्रोबियल की प्रक्रियाओं को सूक्ष्म जानकारी रखता है।
बायोकेमिस्ट: जीवों को ऊर्जा कैसे प्राप्त हो, इस पर गहन अध्ययन कर उसकी लोज करता है।
इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजिस्ट: औद्योगिक सूक्ष्म विज्ञानी का मुख्य कार्य बायोटेक्नोलोजी के क्षेत्र में गहन अध्ययन कर उत्पादों को उपयोगी बनाना है।
मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट:चिकित्सक इसमें विशेषज्ञता हासिल कर माइक्रोयियल के रोगियों का उपचार करते हैं।
संभावनाएं
माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित प्रोफेशनल की काफी डिमांड है। इस फील्ड के लोगों की नियुक्ति सेल वायोलॉजिस्ट, पर्यावरण सूक्ष्मजीव विज्ञानी, बैक्टीरियोलॉजी, इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजिस्ट, मेडिकल माइक्रोचायोलॉजिस्ट, माइक्रोलॉजिस्ट, प्रोटोजूलोजिस्ट, बायोकेमिस्ट, वायोमेडिकल साइंटिस्ट, फूड माइक्रोबायोलॉजिस्ट, प्रतिरक्षा विज्ञानी एवं वाड्रोलोजिस्ट के रूप में होती है। माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में शिक्षक के रूप में भी आकर्षक करियर उपलब्ध है। इसके अलावा लैबोरिटी टेक्नीशियन, रिसर्च असिस्टेंट एवं रिससी के रूप में करियर को आयाम दिया जा सकता है।
आकर्षक वेतन
माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पारिश्रमिक उसकी विशेषज्ञता पर निर्भर है। शुरुआती दौर में इस फील्ड के कैंडिडेट्स प्रतिमपात 15000 से लेकर 30000 तक आसानी से कमा सकते हैं। इसके अलावा योग्यता एवं अनुभव के आधार पर बेहतर पारिश्रमिक की उम्मीद की जाती है। विदेश में नौकरी के लिए अलग पैकेज है। यह पैकेज कैंडिडेट्स के अनुभव एवं योग्यता पर तय होता है।
कहां से करें कोर्स
• पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़।
• दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।
• गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार।
• सीएसजेएम यूनिवर्सिटी, कानपुर।
• भावनगर विश्वविद्यालय, गुजरात।
• डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र।
• हॉल कॉफर्ड विश्वविद्यालय, कर्नाटक।
• मणिपुर विश्वविद्यालय, इंफाल।
• कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर।
•उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद।
• गुरुनानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर।
• काकतीय विश्वविद्यालय, वारंगल आंध्रप्रदेश।
• बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय बनारस, उत्तर प्रदेश।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
