
निधि समावेशी तकनीकी व्यापार इनक्यूबेटर निधि-आईटीबीआई कार्यक्रम Publish Date : 25/10/2025
निधि समावेशी तकनीकी व्यापार इनक्यूबेटर निधि-आईटीबीआई कार्यक्रम
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा निधि योजना के अंतर्गत समावेशी प्रौद्योगिकी बिजनेस इनक्यूबेटर कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसमें शैक्षणिक व्यवस्थाओं में नवाचार और उद्यमिता का समर्थन करने के लिए विभिन्न घटक शामिल हैं।निधि-आईटीबीआई कार्यक्रम देश के उन क्षेत्रों में नवाचार और एमएसएमई या स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण प्रयास है, जहां यह प्रणाली अभी प्रारंभिक अवस्था में है।
इसका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और उद्यमियों में नवाचार और उद्यमिता की भावना विकसित करना तथा विचारों को एमएसएमई में बदलने के लिए उन्हें समर्थन देना है।
निधि-आईटीबीआई कार्यक्रम के अंतर्गत सम्पूर्ण देश में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे है। ये केंद्र युवाओं को नवोदित उद्यमी और इनोवेटर (नवाचारक) बनने की दिशा में सहायता प्रदान करते हैं। निधि का समर्थन अवधारणा के प्रमाण (पीओसी), प्रोटोटाइपिंग, क्षमता निर्माण और प्रारंभिक चरण के बीज कोष के लिए भी दिया जाता है जो नए उद्यम या स्टार्टअप शुरू करने में मदद करते हैं।

इस समर्थन से स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास होता है, जो न केवल समाज के लाभ के लिए तकनीक आधारित समाधान व सेवाएं प्रदान करती हैं, बल्कि देश में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देती हैं।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और टियर-2 व टियर-3 शहरों पर केंद्रित है, जिसमें कि सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता दी जाती है-जैसे कि भौगोलिक विविधता, महिलाओं की भागीदारी और विशेष योग्यताओं वाले व्यक्तियों को अवसर सुलभ कराए जाते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्थानों को इनक्यूबेटर स्थापित करने हेतु आमंत्रित किया जाता है, जबकि एमएसएमई या स्टार्टअप इसमें भाग लेने के लिए सीधे आवेदन कर सकते हैं।
स्टार्टअप इग्निशन ग्रांट इस कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा है, जिसके तहत नवाचारों को प्रोटोटाइप में बदलने और उन्हे आगे चलकर व्यावसायिक मॉडल बनाने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
निधि-आईटीबीआई कार्यक्रम के उद्देश्यों में शामिल है तकनीकी संस्थानों में नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना, उन क्षेत्रों में स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती देना जहां यह अभी प्रारंभिक अवस्था में है, स्थानीय स्तर पर नवाचार और स्टार्टअप की संस्कृति को विकसित करना, शैक्षणिक जगत, निवेशकों, मेंटर्स, उद्योगों और संस्थानों के बीच नेटवर्क बनाना और अभिनव विचारों को प्रोटोटाइप और फिर स्टार्टअप में बदलने हेतु अनुदान सहायता प्रदान करना। इस कार्यक्रम से एमएसएमई के साथ ही छात्र, संस्थान, शोधकर्ता और नवोन्मेषक भी लाभ उठा सकते हैं। इच्छुक प्रतिभागी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के ई-पीएमएस पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
