
कला, विज्ञान और तकनीक का संगम Publish Date : 24/08/2025
कला, विज्ञान और तकनीक का संगम
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
किसी भी प्रोडक्ट की सुरक्षा की बात हो या फिर बाजार में उसे एक नई पहचान देने की, इनमें उत्पाद की पैकेजिंग का एक अहम रोल होता है। वर्तमान समय में पैकेजिंग किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस की मार्केटिंग का महत्वपूर्ण टूल्स बन कर उभरकर सामने आई है। इससे कंपनी को अपने उत्पाद की ‘ब्रांड वैल्यू’ बढ़ाने व अपने प्रोडक्ट को बाजार में अन्य उत्पादों से अलग बनाने में मदद मिलती है।
तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स के बाजार ने भी इस इंडस्ट्री को मजबूती दी है। मेक इन इंडिया मिशन के तहत केंद्र सरकार भी इस इंडस्ट्री को पूरी सहायता दे रही है। इससे युवाओं के लिए इसमें करियर के बेहतर अवसरों का निर्माण हुआ हैं। यह क्षेत्र हर साल बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार दे रहा है। खासतौर पर यूपी व बिहार में मौके बढ़े हैं, क्योंकि यहां पर पैकेजिंग इंडस्ट्री अभी अपने शुरुआती दौर में ही है।

पैकेजिंग टेक्नोलॉजीः बाजार में मौजूद हर प्रोडक्ट की पैकेजिंग का काम कई प्रक्रियाओं से होकर आगे बढ़ता है। जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइनिंग व मार्केटिंग तीनों बिंदुओं पर गहनता से काम किया जाता है। यानी यह पूरी प्रक्रिया विज्ञान, कला और तकनीक पर आधारित है, जिसे हम पैकेजिंग टेक्नोलॉजी भी कहते हैं।
कैसे पाएं प्रवेश
पैकेजिंग से जुड़े ज्यादातर कोर्स पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा व डिप्लोमा स्तर के हैं। इनके ज्यादातर कोर्सेज में साइंस से ग्रेजुएट छात्रों को प्रवेश में प्राथमिकता मिलती है। इसके दो वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश मिलता है। मोटे तौर पर साइंस विषय से ग्रेजुएट छात्र मार्केटिंग और डिजाइन से जुड़े काम के लिए चुने जाते हैं। मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े काम के लिए इंजीनियरिंग और प्रिंटिंग तकनीक की पढ़ाई कर चुके छात्रों को मौका मिलता है। इसमें कुछ संस्थान चार वर्षीय बीटेक भी कराते हैं, जिनमें फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स विषयों के साथ बारहवीं करने वाले छात्र प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश ले सकते हैं। तो वहीं कुछ पॉलिटेक्निक संस्थान भी बारहवीं के बाद छह माह का इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग कोर्स करा रहे हैं। इसमें दाखिला कॉमन एन्ट्रेंस एग्जाम के बाद ही हो पाता है।
नियमित कोर्सेज के साथ-साथ इसमें डिस्टेंस एजुकेशन के आधार पर 18 माह का डिप्लोमा कोर्स भी किया जा सकता है। इस कोर्स में प्रवेश के लिए विज्ञान से ग्रेजुएशन या डिप्लोमा (इंजीनियरिंग) के साथ-साथ प्रोडक्शन, परचेज, मार्केटिंग आदि में साल भर का अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा किसी भी विषय से ग्रेजुएट या डिप्लोमाधारी छात्र, जिन्हें पैकेजिंग इंडस्ट्री में रुचि है, इसके 3 माह के सर्टिफिकेट कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं।
कुछ प्रमुख कोर्स
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन पैकेजिंग टेक्नोलॉजी
- ग्रेजुएट डिप्लोमा इन पैकेजिंग टेक्नोलॉजी
- बीटेक इन पैकेजिंग टेक्नोलॉजी
हर कदम पर हैं मौके

एक अनुमान के अनुसार भारत में हर साल करीब 30 हजार लोगों की मांग होती है। पिछले तीन-चार सालों से मल्टीनेशनल कंपनियां रोजगार का बड़ा केंद्र बनकर उभरी हैं। यहां कई रूपों में रोजगारं के विकल्प हैं, जिनमें प्रमुख हैं-
पैकेजिंग इंजीनियरः इनका काम कार्टून, बॉटल, बॉक्स व अन्य पैकिंग मैटीरियल के बॉक्स का डिजाइन तैयार करना होता है। ये पेशेवर डिजाइन व मार्केट के रुख को बखूबी समझते हैं।
पैकेज डिजाइनरः यह पैकेजिंग के ग्राफिक्स व बनावट आदि का चयन करते हैं। इनका काम इंडस्ट्रियल डिजाइनर से मिलता-जुलता होता है।
कन्ज्यूमर बिहैवियर एनालिस्टः यह पेशेवर मार्केट व ग्राहकों से मिली सूचनाओं की जांच-पड़ताल के माध्यम से किसी प्रोडक्ट की पैकेजिंग का प्रारूप तैयार करवाते हैं।
पैकेजिंग स्पेशलिस्टः इनका काम दफ्तर में एक कंसल्टेंट के तौर पर होता है, जो पैकेजिंग मैटीरियल की गुणवत्ता या उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं।
इस क्षेत्र की चुनौतियां
पेशेवरों के लिए अपने प्रोडक्ट की जानकारी देने के साथ उसकी पैकेजिंग को आकर्षक बनाना आसान नहीं होता। साथ में इस क्षेत्र में पॉलीथिन का विकल्प तलाशने व पैकेजिंग के खर्च को कम करना भी एक बड़ी चुनौती होती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में छोटे-छोटे देश पैकेजिंग व डिजाइनिंग में स्टार्टअप शुरू कर अपना मार्केट बढ़ा रहे हैं। इस कार्य में सफल होने के लिए पेशेवरों को पैकेजिंग की नई तकनीक सीखते रहना चाहिए।
मिलने वाली सैलरी
अच्छे संस्थान से करियर की शुरुआत करने वाले पेशेवर को शुरुआत में 20-25 हजार रुपये हर महीने मिल जाते हैं। करीब तीन-चार साल के अनुभव के बाद यह पैकेज बढ़कर 40-50 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। आज कई ऐसे पेशेवर है, जो अपने काम की बदौलत 15-20 लाख रुपये सालाना पैकेज पर काम कर रहे है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां कर्मचारियों को मोटा वेतन देती है।
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पैकेजिंग, नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, वेन्नई व हैदराबाद में भी इसकी शाखाएं मौजूद हैं।
- गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार, हरियाणा।
- सेंट्रल यूनिवर्सिटी, हरियाणा।
- एसआईईएस स्कूल ऑफ पैकेजिंग टेक्नोलॉजी सेंटर, नवी मुंबई।
- गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक, नागपुर।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
