
करियर में बाधा नहीं है ब्रेक Publish Date : 08/08/2025
करियर में बाधा नहीं है ब्रेक
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
“अब तक नकारात्मक संदर्भ में देखा जाने वाला करियर ब्रेक अब कई कंपनियों के लिए छिपी प्रतिभाओं का खजाना है। कोई नई राह चुननी हो, तो भी यह जरूरी हो जाता है।“
करियर की दुनिया महामारी के बाद काफी बदल चुकी है। मिलेनियल्स और जेनरेशन जेड के करियर मूल्यों और नीतियों में भी बदलाव आए हैं। अब अपने स्किल का विकास करना जॉब के मैदान में कूदने के लिए एक जरूरी कदम है, ना कि सिर्फ और सिर्फ मेहनत या लगन पर निर्भर करना। जैसे अपनी बात हूं तो, मैं करियर की शुरुआत में काम में इतना खोया रहता था कि मेरी किडनी पर असर होने लगा। इस कारण से मैं कुछ महीने शांत बैठा, तब दुनिया भर के सीईओ को पढ़ा सुना। इसने मुझे नया नजरिया दिया। मुझे सही ढंग से सोचना सिखाया। और मेरे लिए नई राहें खुलीं।
हमेशा अपने आप से पूछें कि आप काम क्यों कर रहे हैं? आप को कहां पहुंचना है? करियर को लेकर अब जो माहौल है, उसमें कंपनियां भी अपने कर्मचारियों की खुशहाली चाहती हैं। क्योंकि, बेहतर उत्पादकता का भी यही रास्ता है और आपके लिए बेहतर उपलब्धियों का भी। कई सफल स्टार्टअप इसके गवाह हैं। इसीलिए एक अच्छे करियर की राह में 'करियर ब्रेक' बाकायदा एक रणनीति की तरह भी लिया जा रहा है। जैसे कि एक सर्वे में सामने आया।
सर्वे में शामिल 70 फीसदी युवा कर्मचारियों का मानना था कि कॉलेज के बाद जॉब शुरू करने से पहले ब्रेक लेना उन्हें जॉब के लिए बेहतर तैयार करेगा। वहीं एक अन्य सर्वे में जॉब छोड़कर कुछ अवधि के बाद फिर काम शुरू करने वाले 69 फीसदी लोगों ने माना कि इस तरह उन्हें नया नजरिया पाने में मदद मिली।
छिपी प्रतिभा का खजाना
अच्छी बात यह है कि करियर ब्रेक को लेकर जॉब जगत का नजरिया भी बदल रहा है। लिंक्डइन की प्रोडक्ट हेड कैमिला हान-हो इसे छिपी प्रतिभा का भंडार मानती हैं। सोशल मीडिया के एक आलेख में वह एक अध्ययन का उल्लेख करती हैं, जिसमें पाया गया कि 46 फीसदी हायरिंग मैनेजर मानते थे कि करियर ब्रेक लेने वाले लोग दरअसल ऐसा टैलेंट पूल होते हैं, जिन्हें अभी आजमाना बाकी होता है।
यानी एक नजरिया यह भी बन रहा है कि काम से कुछ महीनों या साल की दूरी का अर्थ उम्मीदवार में स्किल या प्रशिक्षण का अभाव हो जाना नहीं होता। शायद यही कारण है कि एक ग्लोबल सर्वे में 79 फीसदी नियोक्ताओं ने ने कहा कि उन्हें करियर गैप वाले उम्मीदवार को अपने यहां नियुक्त करने में कोई समस्या नहीं है।
ब्रेक के बाद की जरूरी बात
दिक्कत तब आती है, जब आप खुद अपने करियर ब्रेक को लेकर आत्मविश्वास में नहीं होते। नियोक्ताओं का नजरिया चूंकि बदला ब्रेक को आप भी है, इसलिए अपने करियर के नजरिए के साथ पेश करें। जैसा कि इंफोसिस में पूर्व एचआर हेड रह चुकी नंदिता गुर्जर एक समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में कहती हैं कि अगर आपके रिज्यूमे में पहली जॉब की अवधि चार पांच सालों की रही है और करियर ब्रेक के दौरान आपने अपने स्किल को बढ़ाने के कोर्स या प्रशिक्षण लिए हैं, तो इसे एकदम अलग सकारात्मक नजरिए से भी देखा जाता है। इसीलिए करियर ब्रेक की अवधि में ऐसा कुछ जरूर करें, जो आपके समय के सदुपयोग को दर्शाता हो।
दोबारा जॉब शुरू करने में सीवी में सीखे गए स्किल और कोर्स जरूर दर्ज करें। अगर किसी निजी जिम्मेदारी के कारण ब्रेक लेना पड़ा है, तो उस अनुभव से प्राप्त सॉफ्ट स्किल्स को दर्ज करें। अपने कवर लेटर में इसका जिक्र जरूर करें और इसके बारे में इंटरव्यू में उत्तर भी तैयार करके रखें।
इंटरव्यू में उत्तर ऐसे दें
आपके करियर ब्रेक को लेकर नियोक्ता के 'मन में तीन शंकाएं तो जरूर होती ही हैं। एक तो यह कि ब्रेक लिया क्यों? दूसरे अगर यह जॉब भी छोड़कर चल दिए तो? और तीसरा ब्रेक के दौरान समय का उपयोग कैसे किया? क्यों का जवाब ईमानदारी से देना उचित होगा। लेकिन यहां लंबे समय तक केवल कारण के बारे में ही ना बताएं, बल्कि चतुरता से अपना उत्तर भावी कंपनी के लिए अपनी उपयोगिता की ओर ले जाएं।
इसी में नियोक्ता की दूसरी शंका का समाधान भी करें कि आपने इस दौरान क्या सीखा। कोई नया कोर्स, फ्रीलांस काम आदि के बारे में बताएं और उस अनुभव से आप कैसे अपने संभावित नियोक्ता के लिए उपयोगी होंगे, यह भी बताएं। यह चिंता कि बेहतर सैलरी वाली जॉब ऑफर पर आप ये जॉब छोड़ देंगे, इसके जवाब में आपको यह जताना होगा कि आपने करियर में वापसी वेतन में पिछड़ने की भरपाई करने के लिए नहीं की है। कंपनी से जुड़ने की इच्छा जताएं और क्यों यह कंपनी जॉइन करना चाहते हैं, बताएं। इसके लिए आपको के कंपनी के कामकाज की जानकारी लेकर जाना चाहिए।
करियर ब्रेक कितना लंबा हो
आपके करियर ब्रेक की अवधि आपकी करियर वापसी को प्रभावित करती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि करियर ब्रेक कितना लंबा होना चाहिए। हालांकि, यह ब्रेक लेने के कारण पर भी निर्भर करता है। जैसे, अगर आपने किसी लंबे कोर्स के लिए ब्रेक लेने का निर्णय लिया है, तो कोर्स की अवधि पूरी होने तक का ब्रेक वाजिब है। इसी तरह, अगर मानसिक स्वास्थ्य, बर्नआउट या नया नजरिया लेने के उद्देश्य से ब्रेक ले रहे हैं, तो तीन-चार महीने का ब्रेक बहुत माना जाएगा। इसमें यह बात भी मायने रखती है कि आप बिना नौकरी और वेतन के कितने दिनों तक रह पाएंगे।
कुछ तैयारी जरूरी
करियर को अल्पविराम देने वालों की मानें, तो इस दौरान वित्तीय जिम्मेदारियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसलिए अगर आप किसी कारण से करियर ब्रेक ले रहे हैं, तो पहले देख लें कि इस दौरान खर्च किस तरह संभालेंगे। ब्रेक की अवधि के दौरान के लिए आपात स्थति का फंड बचाकर रखें। पारिवारिक मासिक खर्चों का लेखा-जोखा देखें और उनका भी स्रोत तैयार रखें। इसके लिए फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स या काम आपकी मदद करेगा और आपको उचित फ्लेक्सिबिलिटी देगा कि आप अपने खर्चों और करियर ब्रेक का सही उपयोग कर सकें।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
