बटन मशरूम की खेती की वैज्ञानिक विधि      Publish Date : 10/07/2025

             बटन मशरूम की खेती की वैज्ञानिक विधि

                                                                                                                             डॉ0 गोपाल सिंह एवं प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

भारत जैसे देश में जहॉ की अधिकांश आबादी शाकाहारी है यहां खुम्बीे का महत्व पोषण की दृष्टी से बहुत अधिक बढ़ जाता है। हमारे देश में मशरूम का अधिकतर प्रयोग सब्जी के रूप में किया जाता है। भारत में खुम्बी उत्पापदकों के दो समुह हैं एक जो केवल मौसम में ही इसकी खेती करते हैं तथा दूसरे जो पूरे साल मशरूम उगाते हैं।

मौसमी खेती मुख्यैतः हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश की पहाडियों, उत्तर-पश्चिमी पहाडी क्षेत्रों, तमिलनाडु के पहाडी भागों में 2-3 फसलों के लिए तथा उत्तर पश्चिमी समतल क्षेत्रो में केवल सर्दियों की फसल के रूप में की जाती है। वैसे तो पूरे साल खुम्बी की खेती लगभग पूरे देश में की जाती है। चंडीगढ, देहरादून, गुडगाव, उंटी, पूना, चेनई तथा गोवा के आसपास 200 से 5000 टन प्रतिवर्ष खुम्बी उगाने वाली निर्यातोन्मुखी कई ईकाइयां लगी हुई है।

देश में व्यतवसायिक रूप से तीन प्रकार की खुम्बी उगाई जाती है। बटन (Button) खुम्बी, ढींगरी (Oyster) खुम्बी तथा धान-पुआल या पैडीस्ट्रा (Paddy straw) खुम्बी। इनमें से बटन खुम्बी सबसे अधिक लोकप्रिय है। इन तीनों ही प्रकार की खुम्बीं को किसी भी हवादार कमरे या सेड में आसानी से उगाया जा सकता है।

भारत में बटन मशरूम उगाने का सही समय

भारत में बटन मशरूम उगाने का उपयुक्त समय अक्टूबर से मार्च के महीने तक का समय माना जाता हैं। इन 6 महीनो में बटन मशरूम की दो फसलें उगाई जाती हैं। बटन खुम्बी की फसल के लिए आरम्भ में 22 से 26 डिग्री सेंटीग्रेड ताप की आवश्यकता होती है।

इस ताप पर कवक जाल बहुत तेजी से बढता है। बाद मे इसके लिए 14 से 18 डिग्री तापमान ही उपयुक्त रहता है। इससें कम तापमान पर फलनकाय की बढवार बहुत धीमी हो जाती है। 18 डिग्री से अधिक तापमान भी खुम्बी के लिए हानिकारक होता है।

बटन मशरूम उगाने के लिए कम्पोस्ट बनाना तथा उसे पेटीयों या थैलियों में भरना

बटन मशरूम की खेती के लिए विशेष विधि से तैयार की गई कम्पोस्ट खाद की आवश्यकता होती है। कम्पोस्ट साधारण विधि (Simple method) अथवा निर्जीविकरण विधि (Pasturization method) से बनाया जाता है।

कम्पोस्ट  तैयार होने के बाद लकडी की पेटी या रैक में इसकी 6 से 8 इंच मोटी परत या तह बिछा देते हैं। यदि बटन खुम्बी की खेती पोलिथिन की थैलियों में करनी हो तो कम्पोस्ट खाद की बीजाई या स्पाइनिंग के बाद ही थैलियों मे भरें। थैलियों में 2 मिलीमीटर व्यास के छेद थोडी-थोडी दूरी पर कर दें।

बटन मशरूम बीजाई या स्पाइनिंग

मशरूम के  बीज को स्पाइन कहतें हैं। बीज की गुणवत्ता का उत्पादन पर बहुत असर होता है। अतः खुम्बी का बीज या स्पाइन अच्छी व भरोसेमदं दुकान से ही लेना चाहिए। बीज एक माह से अधिक पुराना भी प्रयोग नही करना चाहिए। बीज की मात्रा कम्पोस्ट खाद के वजन के 2-2.5 प्रतिशत के बराबर ही लें।

इसके बाद बीज को पेटी में भरी कम्पोस्टो के ऊपर बिखेर दें तथा उस पर 2 से 3 सेमी मोटी कम्पोस्ट की एक परत और चढ़ा दे अथवा पहले पेटी में कम्पोस्ट की 3 इचं मोटी परत लगाएं और उस पर बीज की आधी मात्रा बिखेर दे। तत्पश्चात उस पर फिर से 3 इंच मोटी कम्पोरस्ट की परत बिछा दें और बाकी बचे बीज उसके ऊपर बिखेर दें। इस पर कम्पोस्ट की एक पतली परत और बिछा दें।

बीजाई के बाद मशरूम की देखभाल

कवक जाल का बननाः

मशरूम की बीजाई करने के पश्चात पेटी अथवा थैलियों को खुम्बीं कक्ष में रख दें तथा इन पर पुराने अखबार बिछाकर उसे पानी से भिगो दें। कमरे मे पर्याप्त नमी बनाने के लिए कमरे के फर्श एवं दीवारों पर भी पानी का छिडकाव करें। इस समय कमरे का तापमान 22 से 26 डिग्री सेंन्टीग्रेड तथा नमी का स्तर 80 से 85 प्रतिशत के बीच होना आवश्यक है।

अगले 15 से 20 दिनों में खुम्बी का कवक जाल पूरी तरह से कम्पोस्ट् में फैल जाएगा। इन दिनों खुम्बी को ताजा हवा नही चाहिए होती है अतः कमरे को बंद ही रखें।

परत चढाना या केसिंग करनाः

गोबर की सडी हुई खाद एवं बाग की मिट्टी की बराबर मात्रा को छानकर अच्छी तरह से मिला लें। इस मिश्रण का 5 प्रतिशत फार्मलीन या भाप से निर्जीवीकरण कर लें। इस मिट्टी को परत चढाने के लिए प्रयोग करें।

कम्पोस्ट में जब कवक जाल पूरी तरह फैल जाए तो इसके उपर उपरोक्त विधि से तैयार की गई मिट्टी की 4-5 सेमी मोटी परत विछा दें। परत चढानें के 3 दिन बाद से कमरे का तापमान 14-18 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच व आद्रता 80-85 प्रतिशत के बीच स्थिर रखें। यह समय फलनकाय बनने का होता है। इस समय बढवार के लिए ताजी हवा और प्रकाश की जरूरत होती है। इसलिए अब कमरे की खिड़कियां व रोशनदान आदि को खोलकर रखें।

खुम्बी फलनकाय का बनना तथा उनकी तुड़ाईः

खुम्बी की बीजाई के 35-40 दिन बाद या मिट्टी चढानें के 15-20 दिन बाद कम्पोस्ट के उपर मशरूम के सफेद फलनकाय दिखाई देने लगते हैं, जो अगले चार पॉच दिनों में बटन के आकार में बढ जाते हैं।

जब खुम्बी की टोपी कसी हुई अवस्था में हो तथा उसके नीचे की झिल्ली् साबुत हो तब खुम्बी को हाथ की उंगलियों से हल्को दबाकर और घुमाकर तोड लेते हैं। कम्पोस्ट की सतह से खुम्बी को चाकू से काटकर भी निकाला जा सकता है। सामान्यतः एक फसल चक्र (6 से 8 सप्ताह) में खुम्बी के 5-6 फ्लस आते हैं।

मशरूम की पैदावार तथा भंडारण

सामान्यतः 8 से 9 किलोग्राम खुम्बी प्रतिवर्ग मीटर में पैदा होती है। 100 किलोग्राम कम्पोस्ट से लगभग 12 किलोग्राम खुम्बी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। खुम्बी को तोड़ने के बाद उसे साफ पानी से अच्छी तरह से धोयें तथा बाद मे 25 से 30 मिनट के लिए उनको ठंडे पानी में भीगो दें। खुम्बी को ताजा प्रयोग करना ही श्रेष्ठ माना जाता है परन्तु फ्रिज में 5 डिग्री ताप पर 4-5 दिनों के लिए इनका भंडारण भी किया जा सकता है।

स्थानीय बिक्री के लिए पोलिथिन की थैलियों का प्रयोग किया जाता है। अधिकतर सफेद मशरूम की मॉग अधिक होने के कारण ताजा बिकने वाली अधिकांश खुम्बियों को पोटेशियम मेटाबाइसल्फेरट के घोल से उपचारित किया जाता है। बटन खुम्बी का खुदरा मुल्य 100-125 रूपये प्रति किलोग्राम रहता है। शादी-ब्याह के मौसम में कुछ समय के लिए तो यह 150 रूपये किलो तक भी आसानी से बिक जाती है।

मशरूम की खेती में सावधानी

मशरूम का उत्पादन अच्छी कम्पोस्ट खाद तथा अच्छे बीज पर निर्भर करता है। अतः कम्पोस्ट बनाते समय विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए। कुछ भुल चूक होने पर अथवा कीडा या बीमारी होने पर खुम्बी की फसल पूर्णतया या आंशिक रूप से खराब भी हो सकती है। अतः इसका ध्यान रखते हुए खुम्बी का फसल की देखभाल अच्छी तरह से करनी चाहिए।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।