इंटरनेट आफ थिंग्स स्मार्ट हुई जिंदगी      Publish Date : 28/09/2026

     इंटरनेट आफ थिंग्स  स्मार्ट हुई जिंदगी

                                                                                       प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं इं0 कार्तिकेय सिंह

इंटरनेट की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है 'इंटरनेट आफ थिंग्स'। यह इंटरनेट के जरिये मशीनों के परस्पर जुड़ाव की सुविधा देती है। आइओटी डिवाइसेज सेंसर, साफ्टवेयर और कम्यूनिकेशन सिस्टम के जरिये आपस में जुड़ती हैं। इंसानी निर्देशों का इंतजार करने के बजाय ये रियल-टाइम डाटा के आधार पर फैसले लेती हैं। आज दुनिया भर में अरबों आइओटी डिवाइसेज चुपचाप लोगों की जिंदगी को अधिक सुरक्षित, स्मार्ट और बेहतर बना रही हैं।

स्मार्ट होम : आप कमरे से बाहर निकलें, तो लाइटें अपने आप बंद हो जाती हैं। थर्मोस्टेट मौसम के हिसाब से तापमान एडजस्ट करता है और सिक्योरिटी कैमरे घर के मालिकों को तुरंत अलर्ट भेजते हैं।

अस्पताल : वियरेबल डिवाइसेज मरीजों के हार्ट रेट, ब्लड प्रेशर, आक्सीजन लेवल और नींद के पैटर्न पर लगातार नजर रखते हैं। डाक्टरों को रियल-टाइम जानकारी मिलती है और वे इमरजेंसी के समय त्वरित कार्रवाई कर सकते हैं।

मैन्युफैक्चरिंग : विनिर्माण उद्योग आइओटी संचालित मशीनों पर निर्भर होते जा रहे हैं, जो उपकरण खराब होने से पहले ही मेंटीनेंस की जरूरत का पता लगा लेती हैं। इससे डाउनटाइम कम होता है और उत्पादकता बढ़ती है।

एग्रीकल्चर : स्मार्ट खेती का दायरा अभी सीमित है, पर उम्मीदें बहुत बड़ी हैं। किसान पानी की बचत करते हुए फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए मिट्टी में नमी मापने वाले सेंसर, मौसम की निगरानी करने वाले स्टेशन और आटोमैटिक सिंचाई प्रणालियों का इस्तेमाल करने लगे हैं।

यातायात : कनेक्टेड गाड़ियों, जीपीएस नेविगेशन, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम और लाजिस्टिक्स ट्रैकिंग की वजह से ट्रांसपोर्टेशन स्मार्ट हो गया है। इससे डिलीवरी तेजी से होती है, सड़कें अधिक सुरक्षित हैं और ईंधन की खपत भी कम होती है।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।