तकनीक का सही इस्तेमाल करना सीखें      Publish Date : 27/09/2026

     तकनीक का सही इस्तेमाल करना सीखें

                                                                                                                         प्रो0 आर. एस. सेंगर

तकनीक के इस्तेमाल से नहीं बच सकते, पर इसके संभावित जोखिमों पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है-

आज का दौर तेजी से विकसित होती तकनीकों और नवाचारों का है, जहां नई प्रौद्योगिकियां हमारे जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही हैं। युवा पीढ़ी इन तकनीकों को तेजी से अपना रही है और इनके जरिये समाज में सकारात्मक बदलाव भी संभव हो रहे हैं। हालांकि, तकनीकी प्रगति के साथ नई चुनौतियां भी उभर रही हैं।

जेनरेटिव एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और कनेक्शन जैसी तकनीकें जहां अपार संभावनाएं देती हैं, वहीं इनके गलत उपयोग से सामाजिक, नैतिक, और सुरक्षा संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम इन उभरती प्रौद्योगिकियों का जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों के साथ अपनाएं, ताकि एक ऐसा भविष्य बन सके जिस पर आने वाली पीढ़ियां गर्व करें।

प्रशिक्षण है जरूरी

किसी भी नई तकनीक का सही उपयोग तभी संभव है, जब उसे अच्छी तरह समझा जाए। इसके लिए, यह जानना जरूरी है कि बैक-एंड कैसे काम करता है और उससे जुड़ी नैतिक चुनौतियां क्या हैं? इनकी पहचान होने पर ही प्रभावी डिजिटल नैतिक जोखिम रणनीति बनाई जा सकती है। इसके साथ ही तकनीकी ज्ञान के अलावा सभी संबंधित लोगों के बीच सही समझ भी आवश्यक है, जिसमें शिक्षा, प्रशिक्षण, कार्यशालाओं और सेमिनारों के माध्यम से विकसित किया जा सकता है।

केवल नियम काफी नहीं

आज के युवाओं और संगठनों को नैतिकता की मजबूत संस्कृति अपनानी चाहिए। केवल नियम बनाना काफी नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण में बदलाव भी जरूरी है। उभरती तकनीकों से जुड़ी नैतिक चुनौतियां तकनीकी से अधिक नेतृत्व और निर्णय से जुड़ी होती हैं, इसलिए जिम्मेदार नेतृत्व और स्पष्ट मूल्यों के साथ ही तकनीक का उपयोग समाज के हित में किया जा सकता है।

स्पष्ट लक्ष्य और रणनीति

किसी भी प्रभावी रणनीति की शुरुआत संभावित नैतिक चुनौतियों और जोखिमों के विश्लेषण से होती है, ताकि उनके बचाव के उपाय तय किए जा सकें। यह रणनीति केवल तकनीकी समाधान तक सीमित न होकर नैतिक, प्रभावी और जिम्मेदार नेतृत्व पर आधारित होनी चाहिए।

सक्रिय दृष्टिकोण के तहत विश्लेषण के बाद स्पष्ट लक्ष्यों के साथ व्यावहारिक रणनीति बनाई जाती है और उसके सामाजिक व संगठनात्मक प्रभावों का आकलन किया जाता है। इस कार्य में प्रौद्योगिकी, परामर्श और साइबर सुरक्षा के अनुभवी पेशेवरों की मदद ली जा सकती है।

जिम्मेदारियों की स्पष्टता

यदि आप एक पेशेवर हैं, तो नई तकनीक को अपनाते समय उन्हें मौजूदा वर्कफ्लो के साथ सही तरीके से जोड़ना जरूरी है। इसके लिए अपने विभाग, स्वयं और सहकर्मियों की भूमिकाओं व जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय करें। जब आप नए वर्कफ्लो और कंप्यूटर या तकनीक को साथ में लागू करें, तो यह ध्यान रखें कि तकनीक और मानव कार्यप्रणाली के बीच संतुलन बना रहे।

लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।