
अपने घर के गमले में उगाएं मेंहदी का पौधा Publish Date : 21/09/2026
अपने घर के गमले में उगाएं मेंहदी का पौधा
प्रो0 आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
भारतीय महिलाएं अक्सर त्योहार हो या फिर कोई व्रत इन अवसरों पर मेंहदी लगाना बेहद ही पसंद करती है और इसे शुभ भी माना जातमा है। हालांकि, इस दौरान उनके मन में यह सवाल जरुर आता होगा की क्या इस मेंहदी के पौधे को अपने घर के गार्डन में उगाया जा सकता है, तो इसका जवाब है जी हां बिलकुल उगाया जा सकता है, तो फिर चलिए हम आपको बाते हैं कि अपने घर से गमले में ही किस प्रकार से उगाया जाए ताजा और ऑर्गेनिक मेंहदी के पौधे को।
अक्सर महिलाएं जब कभी भी अपने हाथों या फिर बालों में मेंहदी लगाती है, तो उनके मन में कई सवाल आते हैं जैसे कि बाजार से खरीदी हुई इस महंदी में मिलावट तो नहीं, क्योंकि अक्सर मिलावट की खबर देखने को मिल ही जाती है। इसी के चलते अब आपको बाजारों में मिलने वाली मिलावटी महंदी को लगाने की कोई जरुरत नहीं है। अब अपने घर के होम गार्डन में आसानी से उगा सकते हैं ताजा मेंहदी और अब आप बिना किसी टेंशन के उसे इस्तेमाल कर सकते हैं। आगे पढ़ें मेंहदी के इस पौधे को उगाने के कुछ आसान टिप्स-
सबसे पहले सही गमला और मिट्टी का चुनाव करना जरूरी
मेंहदी का पौधा लगाने के लिए बहुत छोटा गमला इस्तेमाल करने से हमेशा ही बचना चाहिए। शुरुआत में करीब 12 से 14 इंच गहरा गमला बेहतर रहता है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखें कि गमले के नीचे पानी निकलने के लिए पर्याप्त छेद जरूर बने होने चाहिए। साथ ही मेंहदी को ऐसी मिट्टी पसंद आती है जिसमें पानी जमा न हो। आप मिट्टी तैयार करने के लिए लगभग 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत वर्मीकंपोस्ट या पुरानी गोबर की खाद और 20 प्रतिशत रेत मिला सकते हैं। इससे मिट्टी हल्की और भुरभुरी रहेगी तथा इससे मेंहदी की जड़ों तक हवा आसानी से पहुंच सकेगी।
मेंहदी को चाहिए भरपूर धूप
मेंहदी गर्म और धूप पसंद करने वाला पौधा होता है। इसलिए आपको मेंहदी के पौधे को घर में किसी ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां उसे पर्याप्त सीधी धूप मिल सके और कोशिश करें कि पौधे को रोजाना करीब 5 से 6 घंटे सीधी धूप मिले सके। पर्याप्त रोशनी मिलने से पौधे में नई शाखाएं निकलने में मदद मिलती है और पत्तियों का विकास भी बेहतर हो सकता है।
पौधे को घना बनाने के लिए करें पिंचिंग और प्रूनिंग
अगर आप मेंहदी के पौधे को सिर्फ लंबा नहीं, बल्कि घना और झाड़ीदार बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए यह तरीका आपके सबसे ज्यादा काम आ सकता है। जब पौधा थोड़ा बड़ा हो जाए, तो उसकी ऊपर की कोमल टहनियों और नई बढ़त को हल्के हाथ से पिंच करें। इससे पौधे को नीचे की तरफ नई शाखाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। समय-समय पर हल्की प्रूनिंग करने से मेंहदी पौधे का आकार भी नियंत्रित रहता है।
हालांकि, एक साथ बहुत ज्यादा शाखाएं न काटने से भी बचना आवश्यक होता है। पौधे की स्थिति और मौसम के अनुसार हल्की छंटाई करना सबसे अच्छा रहता है।
रोज-रोज पानी देने की आवश्यकता नहीं
मेंहदी के पौधे के लिए पानी का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है। जरूरत से ज्यादा पानी देने पर गमले की मिट्टी लगातार गीली रह सकती है, जिससे जड़ों में सड़न की समस्या आ सकती है। ऐसे में इस बात का विशेष ख्याल रखें की अगर गमले की ऊपरी 1 से 2 इंच मिट्टी पूरी तरह सूखी दें तो इसके बाद ही पौधों को पानी दें। यानी की सिर्फ मिट्टी में नमी बरकरार रखने के लिए ही हल्का पानी देते रहने से आपका काम चल सकता है।
पौधों का कीटों से बचाव कैसे करें?
अगर आप अपने घर के गार्डन में मेंहदी के पौधे लगा रहे हैं तो ऐसे में किसी रसायन युक्त फर्टिलाइजर का उपयोग करने से भी आपको बचना चाहिए। इसकी जगह अपने पौधों में हर 20 से 25 दिनों में एक मुट्ठी केंचुआ खाद (Vermicompost) या नीम खली का पाउडर को डालकर आप अपने पौधों का कीटों से बचाव बेहद आसानी से कर सकते हैं, जिससे पौधों ग्रोथ भी तेजी से होगी और पौधे स्वस्थ बने रहेंगे।
लेखकः प्रोफेसर आर. एस. सेंगर, अधिष्ठाता जैव प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ।