ट्राइकोडर्मा का उपयोग एवं उसके लाभ      Publish Date : 22/04/2026

  ट्राइकोडर्मा का उपयोग एवं उसके लाभ

                                                                         प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 शालिनी गुप्ता

ट्राइकोडर्मा (Trichoderma harzianum & viride)

स्यूडोमोनास (Pseudomonas)

बेसिलस सबटिलिस (Bacillus subtilis)

कार्य :

ये तीनों मिलकर मिट्टी में होने वाली हानिकारक फफूंद जैसे –

✔ जड़ गलन (Root Rot)

✔ उखठा रोग (Wilt) को जड़ से समाप्त कर देते हैं और पौधों की जड़ों को मजबूत बनाते हैं।

2. BBM-V (बी.बी.एम.-वी)

यह एक शक्तिशाली जैव कीटनाशक मिश्रण है, जो मिट्टी में रहने वाले कीटों पर असर करता है:

ब्यूवेरिया बासियाना (Beauveria bassiana)

बेसिलस थुरिंजिएन्सिस – BT (Bacillus thuringiensis)

मेटाराइज़ियम एनिसोप्लिये (Metarhizium anisopliae)

वर्टिसिलियम लेकानी (Verticillium lecanii)

कार्य :

ये सभी मिलकर

✔ सफेद लट (White Grub)

✔ दीमक

✔ जड़ों को खाने वाले अन्य कीट को बीमार करके प्राकृतिक रूप से मार देते हैं।

3. PML-S (पी.एम.एल.-एस)

यह विशेष रूप से नेमाटोड (सूत्रकृमि) नियंत्रण के लिए होता है:

पेसिलोमाइसिस (Paecilomyces)

कार्य :

✔ जड़ों में गांठ बनाने वाले नेमाटोड को समाप्त करता है

✔ पौधों की बढ़वार और उत्पादन को सुरक्षित रखता है

शतावरी के लिए क्यों ज़रूरी है?

शतावरी एक भूमिगत (जमीन के अंदर उगने वाली) फसल है।

अगर खेत में

दीमक

सफेद लट

नेमाटोड

लग जाएँ, तो पूरी फसल नष्ट हो सकती है।

TS-B + BBM-V + PML-S के नियमित उपयोग से:

✔ शतावरी की जड़ें (Tubers) साफ

✔ स्वस्थ

✔ मोटी और रोग-मुक्त

निकलती हैं, जिससे उपज और मुनाफा दोनों बढ़ता है।

भूमित्र (Bhumitra)

                                    

मिट्टी की सेहत और अधिक उत्पादन का प्राकृतिक समाधान

1. W-D-C (वेस्ट डीकंपोजर)

कैसे काम करता है:

यह अनेक प्रकार के एंज़ाइम बनाता है जो पराली, कचरा, गोबर और अन्य जैविक अवशेषों को तेजी से सड़ाकर खाद में बदल देते हैं।

काम और फायदे:

* मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाता है।

* 40–50 दिनों में उत्तम जैविक खाद तैयार करता है।

* मिट्टी की संरचना और उर्वरता सुधारता है।

2. AZO-T (एज़ोटोबैक्टर)

कैसे काम करता है:

यह हवा में मौजूद लगभग 78% नाइट्रोजन को पकड़कर पौधों की जड़ों के पास उपलब्ध कराता है।

काम और फायदे:

* गेहूँ, धान और सब्जियों में यूरिया की बचत करता है।

* पौधों की प्रारंभिक वृद्धि को मजबूत बनाता है।

* मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता बढ़ाता है।

3. ACT-O (एक्टिनोमाइसेट्स)

कैसे काम करता है:

यह मिट्टी के अंदर जाल बनाकर हानिकारक फफूंद की कोशिका भित्ति (सेल वॉल) को नष्ट करता है।

काम और फायदे:

* मिट्टी को रोगमुक्त और स्वच्छ बनाता है।

* जड़ गलन (Root Rot) जैसी बीमारियों को रोकता है।

* मिट्टी में प्राकृतिक सोंधी खुशबू लाता है।

4. AJO-S (एजोस्पिरिलम)

कैसे काम करता है:

यह नाइट्रोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पौधों में वृद्धि हार्मोन (IAA) उत्पन्न करता है।

काम और फायदे:

* गन्ना, बाजरा और शतावरी जैसी फसलों में जड़ों का जाल बढ़ाता है।

* पौधा अधिक पोषक तत्व ग्रहण कर पाता है।

* फसल की कुल वृद्धि और उत्पादन बढ़ाता है।

5. RHI-ZO (राइजोबियम)

कैसे काम करता है:

यह केवल दलहनी फसलों की जड़ों में गांठ बनाकर रहता है और नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है।

काम और फायदे:

* मूंग, चना जैसी दालों की पैदावार बढ़ाता है।

* अगली फसल के लिए मिट्टी में नाइट्रोजन बचाकर रखता है।

6. PS-B (फॉस्फेट घुलनशील बैक्टीरिया)

कैसे काम करता है:

मिट्टी में जमा फॉस्फोरस (DAP आदि) को अम्ल छोड़कर घुलनशील बनाता है।

काम और फायदे:

* पौधों को पर्याप्त फॉस्फेट उपलब्ध कराता है।

* फूल और फल की गुणवत्ता बढ़ाता है।

7. KM-B (पोटाश मोबिलाइजिंग बैक्टीरिया)

कैसे काम करता है:

मिट्टी के कणों में फंसे पोटाश को गतिशील बनाकर जड़ों तक पहुँचाता है।

काम और फायदे:

* फसल को सूखा और कीटों से लड़ने की ताकत देता है।

* दाने और फलों को चमकदार व भारी बनाता है।

8. SS-B (सल्फर घुलनशील बैक्टीरिया)

कैसे काम करता है:

सल्फर को पौधों के लिए सल्फेट रूप में परिवर्तित करता है।

काम और फायदे:

* सरसों जैसी तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा बढ़ाता है।

* प्याज और मिर्च का रंग व तीखापन सुधारता है।

9. ZS-B (जिंक घुलनशील बैक्टीरिया)

कैसे काम करता है:

मिट्टी में मौजूद जिंक को घुलनशील बनाकर पौधों तक पहुँचाता है।

काम और फायदे:

* पीलापन (जिंक की कमी) दूर करता है।

* प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज करता है।

* पौधों को हरा-भरा और स्वस्थ बनाता है।

पेड़ी गन्ने में खाद प्रबंधन (प्रति एकड़)

नाइट्रोजन (N) — मुख्य खाद

कुल: 90–100 किलो नाइट्रोजन / एकड़

ऐसे दें:

कटाई के बाद: 30–35 kg

30–35 दिन बाद: 30–35 kg

60–70 दिन बाद: 30 kg

DAP: 50–60 kg

कटाई के बाद गुड़ाई के समय दें

बढ़वार के लिए स्प्रे

NPK 19:19:19 या 20:20:20

1 kg + 150 लीटर पानी / एकड़ फसल पर समान स्प्रे करें

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।