ड्रिप सिंचाई: कम पानी में बंपर फसल      Publish Date : 15/01/2026

                 ड्रिप सिंचाई: कम पानी में बंपर फसल

                                                                                                                                  प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी

ड्रिप सिंचाई खेती में पानी की बचत करने वाली तकनीक है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच यह खेती के लिए भरोसेमंद विकल्प साबित हो रही है। यह किसानों की लागत घटाती है और पानी की कमी वाले क्षेत्रों के लिए वरदान है। पानी की घटती उपलब्धता और खेती में बढ़ती लागत के बीच ड्रिप सिंचाई किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है। इस तकनीक से न केवल पानी की 70% तक बचत होती है, बल्कि फसल उत्पादन में भी 20 से 35 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है। ड्रिप सिंचाई में पौधों की जड़ों तक नियंत्रित और नपी-तुली मात्रा में पानी और पोषक तत्व पहुंचाए जाते हैं। इससे पानी की बर्बादी नहीं होती और हर पौधे को उसके 'विकास के लिए सटीक मात्रा में नमी मिलती है। इससे उपज बढ़ती है और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा मिलता है।

ड्रिप सिंचाई से होने वाले लाभ

                                                       

हाथरस जिला बागवानी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि ड्रिप सिंचाई तकनीक से पानी की बचत के साथ फसलों को काफी फायदा होता है। पारंपरिक सिंचाई में जरूरत से अधिक पानी देने पर पौधे झुक जाते हैं और फसल जमीन से लगकर खराब हो जाती है। वहीं, ड्रिप सिंचाई से पौधों को केवल उतना ही पानी मिलता है, जितनी उन्हें आवश्यकता होती है। इससे गुणवत्ता और मात्रा, दोनों में सुधार होता है। पत्तियों पर पानी न जमने से रोग कम होते हैं। स्वचालित प्रणाली से किसानों का काम आसान हो जाता है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।

खाद और दवाओं का आसान उपयोग

ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिये पानी के साथ ही उर्वरक और दवाओं को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए, किसान टैंक में उर्वरक और कीटनाशक घोलकर पाइपलाइन के जरिये उन्हें खेत तक पहुंचा सकते हैं। इस तरह, उर्वरकों और कीटनाशकों की भी काफी बचत होती है। पौधों को सही मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उनका विकास बेहतर होता है।

एक एकड़ में भी लगा सकते हैं सिस्टम

एक हेक्टेयर में ड्रिप सिंचाई सिस्टम लगाने की लागत लगभग 1.19 लाख रुपये आती है। 80 से 90 फीसदी तक सब्सिडी मिल जाती है। किसानों को 20 फीसदी रकम ऑनलाइन जमा करनी होती है। तकनीकी स्वीकृति और सर्वे के आधार पर कंपनी खेत में इंस्टॉलेशन करती है। नियमों के अनुसार, 0.4 हेक्टेयर (करीब एक एकड़) में भी ड्रिप इरिगेशन लगवा सकते हैं।

लघु और सीमांत किसानों को 90% अनुदान

ड्रिप, मिनी और माइक्रो स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर लघु एवं सीमांत किसानों को 90% और अन्य किसानों को 80% तक अनुदान मिल सकता है। पोर्टेबल, सेमी-परमानेंट और रेनगन स्प्रिंकलर पर लघु एवं सीमांत किसानों को लागत का 75% और अन्य किसानों को 65% सब्सिडी मिलती है। यह योजना उन किसानों के लिए लागू है, जिनके पास सिंचाई के लिए जलस्रोत उपलब्ध है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया यूपी बागवानी विभाग (uphorticulture.gov.in) और माइक्रो इरीगेशन परियोजना (upmip.in) की वेबसाइट्स पर उपलब्ध है।

                                                      

  • खेती में ड्रिप सिंचाई अपनाने से 30-50 फीसदी तक पानी की बचत होती है।
  • ड्रिप सिंचाई तकनीक से 20-35 फीसदी तक उत्पादन वृद्धि संभव है।
  • पौधों को सही मात्रा में पानी मिलता है और खरपतवार भी नियंत्रित रहते हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।