हरित खेती से बढ़ाएं कृषि की उत्पादकता      Publish Date : 09/01/2026

              हरित खेती से बढ़ाएं कृषि की उत्पादकता

                                                                                                                                                           प्रोफेसर आर. एस. सेंगर

“वर्तमान में दुनिया खाद्य एवं पर्यावरणीय संकट की जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनके समाधान के लिए भारत ने विश्व को पंचामृत का मंत्र प्रदान किया है। यह मंत्र केवल मानवीय जीवन को बेहतर ही नहीं बनाता बल्कि यह हमारी सम्पूर्ण सृष्टि की गुणवत्ता का भी आधार स्तम्भ है। इस मंत्र के अन्तर्गत भारत उत्पादन और उपभोग की समस्त प्रक्रियाओं को समावेशी बनाने के मार्ग पर अग्रसर है। उर्वरक उत्पादन और इनके वितरण को हम जितना अधिक पर्यावरण के अनुकूल बना सकेंगे, उतना ही अधिक मानव के समेत पारिस्थितिकी तंत्र को ऊर्जावान बना सकेगा।“

किसान की आजीविका का प्रथमिक एवं मुख्य स्रोत फसल एवं कृषि पर आधारित विभिन्न प्रकार के छोटे-मोटे व्यवसाय होते हैं। परम्परागत और नकदी उपज की लागत में सबसे बड़ा भाग उर्वरक का होता है। इंडियन जर्नल ऑफ फर्टिलाइजर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार कृषि खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रासायनिक उर्वरकों की होती है।

उर्वरक प्रत्यक्ष रूप से फसल की उत्पादकता को प्रभावित करते हैं। पौधों को वृद्वि करने के लिए दीर्घ एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार से देखा जाए तो उर्वरक जहां एक ओर पौधों को पोषण प्रदान करते हैं, वहीं दूसरी ओर यह मृदा की उर्वरा शक्ति में वृद्वि करते हैं।

                                                              

उर्वरकों का उपयोग एवं उनका उत्पादन विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है। जैसे फसल और मृदा का प्रकार, एग्री क्लाइमेटिक जोन आदि कुछ कारक इसके प्रमुख आधार होते हैं। एक शोध में पाया गया है कि 2007-11 के दौरान देश के वेस्ट जोन में 31,116.73 किलो टन फर्टिलाईजर्स की खपत हुई। धान और गेहूँ के उत्पादन में उर्वरकों की खपत क्रमशः 37 और 24 प्रतिशत तक आंकी गई है।

पर्यावरणीय कारकों में वर्षा के स्वरूप के साथ ही सिंचाई सुविधाओं के के विस्तार का भी प्रभाव उर्वरकों की खपत पर पड़ता है। सिंचाई का रकबा बढ़ने का सीधा प्रभाव उर्वरकों की माँग के बढ़ने से होता है।  

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।