
गन्ने की फसल पर फॉस्फेट की उपलब्धता पर जीवांशिक खादों का प्रभाव Publish Date : 08/01/2026
गन्ने की फसल पर फॉस्फेट की उपलब्धता पर जीवांशिक खादों का प्रभाव
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
वर्तमान समय में हमारा मुख्य उद्देश्य है कि मृदा का अधिकाधिक उपयोग करते हुए उसकी उर्वरता एवं उत्पादन क्षमता बनाई रखी जाए। इसमें जीवांशिक पदार्थों, जो जन्तुओं, पेड़-पौधों, शैवाल, फफूंद, केंचुए एवं जीवाणुओं के अवशेष है, की गन्ना उत्पादन में एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अधिक समय तक निरंतर फसलें उत्पन्न करते रहने से पोषक तत्वों की मात्रा अर्थात् भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती जाती है। आवश्यक मात्रा से अधिक मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग से मृदा उर्वरता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जबकि जीवांशिक खादों के प्रयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति ठीक बनी रहती है। इस प्रकार भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए जैविक खादों (कम्पोस्ट, प्रेसमड, हरी खाद आदि) का प्रयोग करना बहुत आवश्यक है।
फॉस्फेट की उपलब्धता-

ज्ञातव्य है कि गन्ने की अच्छी उपज एवं बेहतर रसोगुण के लिए मुख्य रूप से तीन तत्व (नत्रजन, फास्फोरस एवं पोटाश) आवश्यक होते हैं। मृदा में फॉस्फेट की अघुलनशीलता के कारण घटते स्तर को देखते हुये जीवांशिक खादों का प्रयोग आवश्यक हो गया है। मृदा में जब नत्रजन उर्वरक का प्रयोग किया जाता है तो नत्रजन का अधिकांश भाग लीचिंग से, वाष्पीकरण तथा खरपतवार आदि से प्रायः नष्ट हो जाता है। इसके अतिरिक्त भूमि में कार्बन, नाइट्रोजन का अनुपात अधिक या नाइट्रोजन की कम मात्रा होने की वजह से उपलब्ध नाइट्रोजन का स्थिरीकरण हो जाता है जो फसल को नहीं मिल पाता। साथ ही भूमि में फसलोत्पादन हेतु जो फॉस्फेटिक उर्वरक दिया जाता है उसका अधिकांश भाग (लगभग 60 से 70 प्रतिशत) स्थिर हो जाता है जो फसल को उपलब्ध नहीं हो पाता। यदि जीवांशिक खादों का प्रयोग किया जाये तो उक्त फॉस्फेट को उपलब्धता में परिवर्तित कर तथा कार्बन-नत्रजन के अनुपात को समुचित बनाया जा सकता है।
जीवांशिक खादों में टारट्रेट, ऑक्जलेट, साइट्रेट एवं लेक्टेट आदि पाये जाते हैं। भूमि में उपलब्ध आयरन एवं एल्यूमीनियम आदि जीवांशिक पदार्थों का विघटन कर प्राप्त टारट्रेट, साइट्रेट, ऑक्जलेट और लैक्टेट से फॉस्फोरस के बजाय अधिक शीघ्र क्रिया करते हैं जिससे फॉस्फेट सुगमता से उपलब्ध रूप में प्राप्त हो जाता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
