
बसंतकालीन गन्ने की कटाई Publish Date : 28/11/2025
बसंतकालीन गन्ने की कटाई
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं डॉ0 रेशु चौधरी
बसंतकालीन (Spring-planted) गन्ने को नवंबर माह में काटना सामान्यतः उचित नहीं माना जाता, क्योंकि यह अपनी पूर्ण परिपक्वता (maturity) से पहले ही कट जाता है। इसके कई नुकसान होते हैं:
नवंबर में बसंतकालीन गन्ना काटने के मुख्य नुकसान:
वजन (Yield) कम मिलना
- गन्ने की लंबाई और मोटाई पूर्ण रूप से विकसित नहीं होती।
- जल्दी काटने पर गन्ने की उपज में टनों में कमी आती है और कुल उत्पादन 10–20% कम मिलता है।
रोटेशन पर नकारात्मक प्रभाव
जल्दी कटाई के कारण पौधे (Ratoon crop) की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
ठंड में कटाई → सेट जमाव खराब → रेटून में कमी।
कटाई और परिवहन लागत बढ़ती है, अपरिपक्व गन्ना नरम और हल्का होने से बंडलिंग कठिन होती है।
प्रिय कृषक भाई अपने किसी भी बसंतकालीन खडे गन्ने की कटाई कर मिल मे सप्लाई ना करें, होने वाले नुकसान से बचे व अपने सहयोगी कृषक भाईयो को भी जागरूक करने मे सहयोग करें।

गन्ना बोने से पहले गन्ने के बीज का हेक्सास्टॉप/रोको Fungicide, ईमिडाक्लोर प्रीड और ईथाफोन द्वारा बीज उपचार करने से फायदा-
1. गन्ने का जमाव अधिक और जल्दी होता हैं वहीं कल्ले भी अधिक और जल्दी निकलते हैं।
2. कम तापमान अथवा ठंड में भी गन्ने का जमाव जल्दी और अधिक होता हैं।
3. गन्ने में लगने वाली बीमारियों जैसे रेड रॉट, विल्ट/सूखा रोग, टॉप रॉट, रूट रॉट, ग्राशीप्रारोह/जीएसडी एवं पोक्का बोइंग इत्यादि बीमारी नहीं लगती हैं।
4. बीज उपचार करने से गन्ने में लगने वाले चूषक कीट मिलीबग, स्केल इंसेक्ट, थ्रिप्स, और काटने चबाने वाले कीट जैसे बड़वा कीट,अर्ली शूट बोरर, तन छेदक इत्यादि की सुंडी, लार्वा अथवा पुएपा बीज उपचार करते समय मर जाते है।
5. गन्ने का बीज उपचार करने से गन्ने की फसल स्वास्थ्य और गन्ना मोटा होता हैं जिसमें कीट व बीमारियों का प्रकोप नहीं होता हैं और उपचारित खेत की सीड नर्सरी से अगले साल गन्ना बुवाई हेतु उत्तम गुणवत्ता का बीज प्राप्त होता हैं जिससे गन्ने की अगली फसल की भी पैदावार अच्छे जमाव के कारण अधिक होती हैं जिसमें कीट एवं बीमारियों का प्रकोप नहीं होता हैं।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
