
शुगर मिल प्रबंधन ने गन्ने का उत्पादन बढ़ाने को कार्यशाला का आयोजन किया Publish Date : 20/11/2025
शुगर मिल प्रबंधन ने गन्ने का उत्पादन बढ़ाने को कार्यशाला का आयोजन किया
“नरकटियागंज शुगर मिल प्रबंधन ने गन्ना उत्पादन बढ़ाने को लेकर की कार्यशाला आयोजित और साझा किए उपाय”-
मुख्यमंत्री गन्ना विकास योजना के अन्तर्गत बनवारिया जोन के भवानीपुर में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यशाला किया गया। इस कार्यशाला में नरकटियागंज चीनी मिल के महाप्रबंधक (गन्ना) कुलदीप सिंह ढाका, उप महाप्रबंधक (गन्ना) प्रेम सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अभित पात्रा और डॉ. रातुल कुमार ने किसानों को गन्ने की फसल से वैज्ञानिक विधि से अधिक उत्पादन लेने की जानकारी प्रदान की। गन्ना महाप्रबंधक ने बताया कि 4 फीट की दूरी पर बुवाई, मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक प्रयोग, कीट एवं बीमारियों का आईपीएम पद्धति से नियंत्रण और उचित सिंचाई प्रबंधन अपनाकर किसान गन्ने से अधिक उत्पादन ले सकते हैं।

उप महाप्रबंधक ने कहा कि चीनी मिल की पेराई क्षमता में वृद्धि हुई है, ऐसे में किसान अधिक क्षेत्रफल में गन्ने की फसल लगाएं। उन्होंने बताया कि 4 फीट की दूरी पर गन्ने की बुवाई करने से 30-35 प्रतिशत बीज की बचत होती है। पौधों को पर्याप्त धूप मिलती है। कीट व बीमारियों का प्रकोप कम होता है। खाद और पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचते हैं और ट्रैक्टर से निराई-गुड़ाई आसानी से हो जाती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वह सरकार और चीनी मिल द्वारा उपलब्ध सह फसली खेती, सब्सिडी वाले कृषि यंत्र और बीज अनुदान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। डिस्क प्लाउ से गहरी जुताई करने पर गन्ने की पैदावार में 20 प्रतिशत तक बढ़त हो सकती है, जिससे किसान को 20-25 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय हो सकती है।

उन्होंने कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी के बारे में विस्तार से बताया। कृषि वैज्ञानिक डॉ. अभित पात्रा ने कहा कि गन्ने की बुवाई 4 फीट की दूरी पर ऑटोमेटिक केन प्लांटर से करने पर लेबर खर्च और समय की बचत होगी तथा उत्पादन अधिक मिलेगा। डॉ. रातुल कुमार ने गन्ने की प्रजाति चयन, बीज व भूमि का उपचार, लाल सड़न बीमारी और बड़वा कीट नियंत्रण के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गन्ने की सूखी पत्तियां जलाने के बजाय खेत में मल्चिंग करें, इससे खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है।
