
मिट्टी के नीचे और ऊपर: खेती की असली ताकत Publish Date : 19/11/2025
मिट्टी के नीचे और ऊपर: खेती की असली ताकत : (Nutrients and Agroclimatic Conditions)
डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहलान, सस्यविद
खेती की सफलता सिर्फ बीज, खाद और पानी पर नहीं टिकी होती। असली ताकत उस पूरी व्यवस्था में है, जो खेत की मिट्टी के नीचे और ऊपर काम करती है। अगर किसान इन दोनों पर बराबर ध्यान दें तो उनकी फसलें न केवल अच्छी होंगी बल्कि पौष्टिक, टिकाऊ और मौसम की मार झेलने वाली भी बनेंगी।
मिट्टी के नीचे की ताकत
मिट्टी की बनावट (Soil Tilth)
भुरभुरी, नरम और हवादार मिट्टी जड़ों के लिए सबसे अच्छी होती है। ऐसी मिट्टी में – जड़ें आसानी से फैलती हैं, नमी और हवा का संतुलन बना रहता है, पौधों को पोषण जल्दी मिलता है।
जैविक कार्बन (Organic Carbon)
यह मिट्टी की जान है। गोबर की खाद, कम्पोस्ट और फसल अवशेष इसमें जान डालते हैं। जैविक कार्बन मिट्टी को पानी रोकने की क्षमता देता है और सूक्ष्म जीवों के लिए भोजन का काम करता है।
लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु (Beneficial Microbes)
मिट्टी में रहने वाले राइजोबियम, माइकोराइज़ा और Trichoderma जैसे जीवाणु फसल के लिए मुफ्त मजदूर की तरह काम करते हैं। ये नाइट्रोजन बाँधते हैं, फास्फोरस और जिंक जैसे पोषक तत्व खोलते हैं, और रोगों से फसल की रक्षा करते हैं।
फसल पोषक तत्व (Crop Nutrients)

खेती केवल यूरिया, डीएपी और पोटाश पर निर्भर नहीं है। जिंक, आयरन, बोरॉन और मैंगनीज़ जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी बहुत ज़रूरी हैं। इनकी कमी से दाने नहीं भरते, पत्तियाँ पीली हो जाती हैं और फूल/फल गिर जाते हैं।
मिट्टी के ऊपर की ताकत
कृषि-जलवायु परिस्थितियाँ (Agroclimatic Conditions)
पौधे ऊपर के वातावरण पर भी निर्भर करते हैं – धूप, वर्षा, तापमान और हवा। मल्चिंग से मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है। शेड नेट और पॉलीहाउस पौधों को तेज धूप, ओले और बारिश से बचाते हैं। खेत की मेड़ों पर पेड़ लगाने से हवा की रफ्तार कम होती है और नमी बनी रहती है।
निष्कर्ष: जब मिट्टी के नीचे की शक्ति (अच्छी टिल्थ, जैविक कार्बन, सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व) और ऊपर की शक्ति (धूप, वर्षा, तापमान और नमी) आपस में संतुलित हो जाती हैं, तब ही खेती समृद्ध, सुरक्षित और टिकाऊ बनती है। हर किसान को चाहिए कि वह मिट्टी को जीवित बनाए, पोषक तत्वों का संतुलित प्रयोग करे और अपने खेत का छोटा वातावरण सँभाले। यही खेती को लाभकारी और पोषणयुक्त बनाने का असली मंत्र है।
लेखक: डॉ. वीरेन्द्र सिंह गहलान, सस्यविद, Ex. Chief Scientist, CSIR-IHBT, Palampur Himachal Pradesh.
