
ताकि मीटिंग बने सार्थक Publish Date : 18/11/2025
ताकि मीटिंग बने सार्थक
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर
हाल ही में किए गए एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, मैनेजर और एग्जीक्यूटिव्स अपना अधिकांश समय मीटिंग में ही गुजारते हैं। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट का तर्क यह भी है कि अगर यही समय वे दूसरे महत्त्वपूर्ण कामों के लिए रखें, ती संस्थान को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। खैर, तर्क चाहे जो भी हों, हम अपने इस लेख में यह चताने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे बनाएं मीटिंग को और अधिेक उपयोगी। मीटिंग को अधिक सफल और सार्थक बनाने के लिए नीचे दिए गए कुछ टिप्स कारगर साबित हो सकते है-
बचें अनावश्यक मीटिंग से
यह जरूरी नहीं है कि हर हफ्ते मोटिंग करने की परंपरा पर आप कायम ही रहें, क्योंकि मीटिंग से अगर ऑफिस का कोई ‘जरूरी’काम प्रभावित हो रहा है, तो उससे पहले काम करना जरूरी है। हां, जब आपको लगे कि मीटिंग करने के बाद उस काम को और प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है, तो मीटिंग जरूर करें। अन्यथा आप इसकी अनदेखा भी कर सकते हैं।
करें सबका योगदान सुनिश्चित

मोटिंग में सभी एम्प्लॉइज अपनी बात कह सकें, इसे जरूर सुनिश्चित करें, क्योंकि अलग-अलग विचार और आइडिया से किसी प्रोजेक्ट या टॉस्क को और भी बेहतर बनाया जा सकता है। इससे मीटिंग में शामिल होने बाले एम्प्लॉइन के काम में भी और निखार लाया जा सकता है।
तय समय-सीमा में करें मीटिंग
मीटिंग के लिए पहले से ही समय-सीमा तय कर लें। कोशिश करें कि पूरी मीटिंग इसी तम अवधि में ही समाप्त हो जाए। इससे आप अपने समय का बेहतर प्रबंधन भी कर सकते हैं।
अन्य मुद्दों से करें परहेज
मीटिंग के दौरान किसी मुख्य मुद्दे या विषय से अलग मसले पर बातचीत करने से बचना चाहिए। यह भी एक कारण है, जिससे कि मीटिंग में लोग मुख्य मुद्दे से अक्सर भटक जाते हैं और मीटिंग का समय जाया हो जाता है। इसलिए कोशिश करें कि मीटिंग में पहले से तय एजेंडे पर ही चात करें और उसे और बेहतर बनाने का प्रयास करें।
विकल्पों का करें प्रयोग
जब लगे कि काम के दबाव के कारण मीटिंग करना संभव नहीं है, तो ऐसे समय में आपस में मीटिंग करने के दूसरे विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं। मसलन ई-मेल, कॉन्फ्रेंस कॉल आदि। दरअसल, ऐसा करके एक तरफ, आप मीटिंग में बर्बाद होने वाले समय की खर्च होने से रोक सकते हैं, तो दूसरी तरफ संस्थान के उच्च अधिकारियों से सीधे जुड़कर अपनी बात भी कह सकते हैं।
बनाएं फॉलोअप प्लॉन
मीटिंग के दौरान किस विषय पर कैसे काम करना है, काम को और आगे ले जाने के लिए किन-किन बातों पर गौर करना चाहिए, जैसी बातों को पहले ही निर्धारित कर लें। साथ ही, किसे कौन-सा काम सौंपना है या अमुक काम के लिए कौन व्यक्ति ज्यादा सक्षम है, इन बातों को अपने फॉलोअप प्लॉन में जरूर शामिल करें।
करें मीटिंग का मूल्यांकन

जब आप किसी भी चीज का मूल्यांकन करते हैं, तो उसके दोनों पक्ष जरूर सामने आते हैं। इससे आपको आगे की योजना बनाने में मदद मिलती है। ऐसा हो कुछ आप हर मीटिंग के अंत में भी कर सकते हैं, ताकि पूरी मीटिंग के सार को समझ सकें और उसकी सार्थकता का अंदाजा भी लगा सकें।
अगर आप ऊपर बताए गए टिप्स पर नियोजित ढंग से अमल करें, तो वह दिन दूर नहीं, जब आप मीटिंग के उद्देश्य और गुणवत्ता दोनों को बनाए रख सकते है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
