
एक मरा हुआ पेड़ भी आता है काम Publish Date : 10/11/2025
एक मरा हुआ पेड़ भी आता है काम
प्रोफेसर आर. एस. सेंगर एवं अन्य
कोई पेड़ अचानक या फिर धीरे-धीरे भी मर सकता है। आग, बाढ़ अथवा तीव्र वायु आदि किसी पेड़ की अचानक होने वाली मृत्यु के कारण होते हैं, जो पानी और विभिन्न पोषक तत्वों के परिवहन क्षमता को गम्भीर रूप से क्षतिग्रस्त कर देते हैं। कभी-कभी पेड़ किसी कीट के हमले अथवा किसी रोग चलते भी मर जाते हैं, लेकिन आमतौर पर इसमें कुछ महीनों से लकर कुछ वर्षों तक का समय लग सकता है।
किसी पेड़ की मृत्यु वास्तव में वैसी नहीं होती, जैसी कि वह दिखाई देती है, क्योंकि यह सीधे तौर पर नए जीवन की ओर लेकर जाती है। पेड़ लम्बे समय तक भी जीवित रह सकते हैं, हालांकि यह यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार के पेड़ हैं।
जैसे कि ब्रिसलकौन पाइंस 4,000 वर्ष से अधिक पुराने होते हैं। लॉजपोल अथवा पॉप्लर के जैसे पेड़ का जीवन काल बहुत कम, 20 से 200 वर्ष तक का ही होता है। किसी पेड़ की आयु उसके डीएनए के माध्यम से निर्धारित होती है। ऐसे में जो पेड़ बहुत अधिक तेजी से बढ़ते हैं, वह धीमी गति से बढ़ने वाले पेड़ की अपेक्षा कम मजबूत और कम समय तक जीवित रहते हैं। कीट, सूक्ष्म जीव और मौसम आदि की मार से होने वाली हानि पेड़ की धीरे-धीरे होने वाली मृत्यु का कारण बनते हैं। पेड़ की मृत्यु होने की प्रक्रिया उसकी एक टहनी से शुरू होकर धीरे-धीरे पूर पेड़ पर फैल जाती है।
पेड़ की जड़ों में सूक्ष्म कवक मौजूद रहते है, जो पेड़ के लिए दूसरी जड़ प्रणाली की तरह से कार्य करते हैं। कवक लम्बे, अति सूक्ष्म धागे बनाते हैं, जिन्हे हाइफे कहते हैं। कवक के हाइफे मिट्टी से पेड़ के आवश्यक पोषक तत्व एकत्र हैं और बदले में, पेड़ प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया के अन्तर्गत सूर्य के प्रकाश से शर्करा बनाकर कवकों को प्रदान करता है।

कवक एक पेड़ से दूसरे पेड़ में पोषक तत्वों को स्थानान्तरित करते हैं। इन्हीं कवकों के जाल से पेड़ एक दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं। यह कवक पेड़ को स्वस्थ रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मरने के बाद पेड़ जमीन पर गिरकर लट्ठा बन जाता है, जिनमें अलग तरह के कवक और जीवाणु आदि पाए जाते हैं, जिन्हें अपघटक कहते हैं। यह छोटे जीव बड़े मृत पेड़ को इस हद तक विघटित करते हैं कि कुछ समय के बाद यह पता ही नहीं चल पाता है कि यह कभी अस्तित्व में भी था। हालांकि, इस प्रक्रिया को पूर्ण होने में कुछ वर्षों से लेकर एक सदी तक का समय भी लग सकता है।
एक पेड़ जीवित रहते हुए छाया देता है और विभिन्न जानवरों और पक्षियों को आश्रय भी प्रदान करता है तथा कवकों और अन्य पेड़ों के लिए एक जीवन रेखा का कार्य भी करता है। जब पेड़ मर जाता है, तब भी नए पेड़ों के लिए उगने में सहायता करता है, अलग-अलग जानवरों को आश्रय भी प्रदान करता है और इसके साथ ही अगली पीढ़ीके जीवों को भी पोषण प्रदान करता है। ऐसा कहा जा सकता है कि पेड़ कभी मरता ही नहीं है, बल्कि वह अपना जीवन दूसरों के लिए समर्पित कर देता है।

लेखकः डॉ0 आर. एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग और प्लेसमेंट, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ।
