काला मोतियाबिंद के लिए प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार      Publish Date : 30/09/2026

काला मोतियाबिंद के लिए प्रभावी आयुर्वेदिक उपचार

                                                                                                       डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

यह हमारे शरीर के सबसे नाज़ुक प्रयोगों में से एक है। अगर इसकी सही तरीके से देखभाल न की जाए तो जीवन भर के लिए अंधेपन की पहल शुरू हो सकती है। काफी लोगों को अपनी आंखों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसकी वजह है कि एक उम्र यानी 50-60 साल बाद वे आंखों की गंभीर चुनौती से पीड़ित हो जाते हैं। काला मोतियाबिंद भी आंखों में होने वाली गंभीर चुनौती में से एक है। शोध के अनुसार, भारत में चालीस वर्ष से अधिक आयु के लगभग एक करोड़ या उससे भी अधिक लोग काला मोतियाबिंद से पीड़ित हैं।

इस बीमारी का समय पर सही इलाज नहीं किया जा सकता, यह अंधेपन का कारण भी बन सकता है। इस बीमारी से बचने के लिए नियमित रूप से आंखों की जांच और इलाज करना, पोषक तत्वों को अपने अंतर्ग्रहण में शामिल करना और साथ ही जीवन शैली में सकारात्मक बदलाव लाना जरूरी है।

काला मोतियाबिंद क्या है?

काला मोतियाबिंद को काला मोतिया या ग्लूकोमा के नाम से भी जाना जाता है। काला मोतियाबिंद के ज्यादातर मामलों में कोई भी लक्षण सामने नहीं आते हैं। यही कारण है कि इसे अंधेपन का प्रमुख कारण माना जाता है। काला मोतियाबिंद की आंखों की रोशनी पर दबाव पड़ता है जिससे उसे बहुत नुकसान होता है। ऑनलाइन नर्व पर कॉन्स्टेंट प्रेशर प्रोडक्शन की वजह से यह नष्ट भी हो सकता है। ओपिक नर्व पर प्रोडक्शन वाले इस प्रेशर को इंट्राओकुलर प्रेशर (इंट्राओकुलर प्रेशर) कहा जाता है।

औपिक नर्व का काम ताज़ा या किसी भी चीज़ की छवि (चित्र) को मस्तिष्क तक पहुंचाना है। लेकिन जब इस पर दस्तावेज़ मौजूद है तो यह अपना काम ठीक तरह से नहीं कर पाता है। इतना ही नहीं, विशेषज्ञ का यह भी मानना है कि अगर लंबे समय तक इस पर दबाव डाला जाए तो आगे चलकर यह संपूर्ण अंधेपन का कारण भी बन सकता है। काला मोतियाबिंद पूरी दुनिया में अंधेपन का दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है।

काला मोतियाबिंद के कारण एक बार जब आंख की धूल उड़ जाती है तो फिर उसका इलाज या कोई अन्य विधि से वापस नहीं लाया जा सकता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपनी आंखों की नियमित रूप से जांच कराते रहें। ताकि आंखों पर पट्टी बांधने वाली दवा से शुरुआत में पता चल सके और उसका सही इलाज किया जा सके। अगर काला मोतियाबिंद की जानकारी इसकी शुरुआती स्टेज में ही हो जाए तो इस बीमारी का इलाज कर आंखों की रोशनी को खत्म किया जा सकता है।

ज्यादातर मामलों में काला मोतियाबिंद की शिकायत लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन यह बीमारी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।      

काला मोतियाबिंद के लिए आयुर्वेदिक उपचार

  • काला मोतियाबिंद का इलाज करने के उपाय मौजूद हैं, इस बीमारी का इलाज बहुत ही आसानी से किया जा सकता है। अगर काला मोतियाबिंद शुरुआती चरण में है तो इसका इलाज आयुर्वेदिक औषधियों से भी किया जा सकता है। विशेषज्ञ का मानना है कि काला मोतियाबिंद की शुरुआत में भीमसेनी कपूर को महिला के दूध में गोंद कर बैठने से इस बीमारी के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आप भी काला मोतियाबिंद से परेशान हैं और घर बैठे इस बीमारी से पीड़ित हैं तो इस विधि का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • हलके बड़े मोती का 3 ग्राम के टुकड़े और 12 ग्राम काले सूरमे को एक दूसरे के साथ अच्छी तरह से मजबूत किया जाता है। जब यह अच्छी तरह से पसंद किया जाए तो इसे एक साफ बोतल में रख लें और एक ही बार में एक बार सूरमा की तरह दिखा दें। कुछ दिनों तक ऐसा करने से काला मोतियाबिंद की परेशानी दूर हो जाती है। अगर इसके इस्तेमाल से आपको किसी तरह की कोई परेशानी है तो आपको आयुर्वेद के डॉक्टर से मिलकर इस बारे में बात करनी चाहिए।
  • लाहौरी नमक, समुद्री फेन, काली मिर्च और छोटी पीपल आदि सभी को 10 ग्राम की मात्रा में लें। फिर इसके बाद 200 ग्राम काले सूरमा और 500 गुलाब अर्क या सौंफ अर्क में इस तरह से मजबूती की सारा अर्क अच्छी तरह से मिला हुआ है। इसके बाद आप इसे रोजाना कुछ हफ्ते तक अपनी आंखों में लगाएं। इसके अलावा आप 10 ग्राम गिलोय का रस, 1 ग्राम शहद और 1 ग्राम सेंधा नमक को नारियल के टुकड़े में मिलाकर सूरमा की तरह रोजाना अपनी आंखों में लगाएं। कुछ दिनों तक लगातार इस मिश्रण के इस्तेमाल से काला मोतियाबिंद की समस्या दूर हो जाती है।  
  • आंखों में लगाने वाली आयुर्वेदिक औषधियों के साथ-साथ मसाले वाली जड़ी-बूटियों का सेवन भी काला मोतियाबिंद में बहुत हानिकारक माना जाता है। बिना गुठली वाले 500 ग्राम किरचियां, 500 ग्राम भृंगराज का संपूर्ण पौधा, 100 ग्राम बाल हरीतकी, 200 ग्राम किरिचरी गोरखमुंडी पुष्प और 200 ग्राम श्वेत पुनर्नवा की जड़ को मिलाकर इनके तैयार करें। इसके बाद इस केश को अच्छे तरह से काले पत्थर के खरल में 250 जूलरी अमरलता का रस और 100 जूलरी के अवशेषों के रस में अच्छे तरह से बनाया गया। अच्छी तरह से मिलाने के बाद शुद्ध भल्लातक का 25 ग्राम कपड़छान के टुकड़ों को ठोस कड़ाही में तब तक गर्म करें जबतक की यह अच्छी तरह से सुख न जाए। अनइंस्टॉल के बाद इसे अच्छा कर कांच के पॉश्चर में सुरक्षित तरीके से रखें। फिर अपनी शक्ति और स्थिति के अनुसार इस मिश्रण के दो से चार ग्राम की मात्रा को ताजा गोमूत्र के साथ खाली पेट सुबह और शाम सेवन करें। ऐसा करने से आपकी आंखों की परेशानी बहुत आसानी से दूर हो सकती है।

हमारी आज की इस पोस्ट में दी गई किसी भी विधि का उपयोग करने से पहले एक बार डॉक्टर से मिलें और समस्या के बारे में उन्हें अपने तरीके से बताएं। वे आपकी आंखों की स्थिति को देखने के बाद आपको उपचार का सबसे सस्ता नुस्खा बताएंगे। साथ ही अगर आप भी किसी आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग करें तो पहले डॉक्टर से इस बारे में जरूर बात करें।

कई बार काला मोतियाबिंद की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेदिक औषधियों के प्रयोग से कुछ दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप इलाज के लिए किसी भी तरीके का इस्तेमाल करें, पहले डॉक्टर से उनकी राय जरूर लें।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।