बारिश में त्वचा संक्रमण बचाव के तरीके      Publish Date : 20/09/2026

    बारिश में त्वचा संक्रमण बचाव के तरीके

                                                                                          डॉ0 सुशील शर्मा सेंगर एवं मुकेश शर्मा

त्वचा ऐसा सुरक्षा कवच है जो शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के साथ बाहरी हानिकारक कारकों से भी बचाता है। ऐसे में मौसमी बदलावों को देखते हुए त्वचा की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। खासकर मानसून के दिनों में इससे जुड़ी अनेक परेशानियां बढ़ जाती हैं। इनके कारणों और रोकथाम से बचाव के जरूरी उपायों की चर्चा कर रहे हैं हमारे आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ0 सुशील शर्मा-

मानसून के दिन धूप-छांव भरे होते हैं। ऐसे में त्वचा बहुत शुष्क और पसीने से भीगने लगती है। त्वचा पर पसीना सूखने और मैल जमा होने से रोमकूप बंद हो जाते हैं। इससे त्वचा में रूखापन आता है और इसके कारण शरीर पर लाल दाने हो जाते हैं।

फंगल, दाद, सोरायसिस और एक्जिमा इन दिनों अधिक परेशान करते हैं। इसके साथ ही यह एक-दूसरे में आसानी से फैलते हैं। इसके अलावा अधिक पसीने के कारण त्वचा पर संक्रमण होने का खतरा भी काफी अधिक बढ़ जाता है।

हाथ-पैर की त्वचा का रखें ध्यान

बारिश के दिनों में हाथ-पैर की त्वचा भी प्रभावित होती है। बारिश का पानी लगने पर त्वचा में बैक्टीरिया और फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इससे खुजली, त्वचा का लाल होना और छाले पड़ सकते हैं।

त्वचा की देखभाल के लिए कुछ उपाय अपनाने चाहिए

  • त्वचा को साफ और सूखा रखें।
  • गीले कपड़े पहनने से बचें।
  • बारिश के पानी में भीगने के बाद नहाएं और सूखे कपड़े पहनें।

त्वचा के कटाव और सतर्कता

कुछ लोगों को त्वचा पर लाल-लाल चकत्ते या कटने का अहसास होने लगता है। इस समस्या से बचाव के लिए साबुन का इस्तेमाल कम से कम करें।

खुजलीः

सूती कपड़े पहनें। ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनना चाहिए, ताकि पसीना सूखता रहे और त्वचा सांस ले सके।

नंगे पैर चलने से बचें: मानसून के दिनों में पैरों की सुरक्षा का अधिक ध्यान देना होता है, क्योंकि नमी और गंदगी से फंगस हो सकता है।

हाइड्रेटेड रहें: पर्याप्त पानी पीने से त्वचा स्वस्थ रहती है और उसकी प्राकृतिक सुरक्षा बनी रहती है। ऐसे में अगर आपका शरीर हाइड्रेट होगा तो इससे अन्य संक्रमण की भी आशंका कम रहती है।

बालों का भी ध्यान रखना जरूरी

  • सिर के किनारों पर अधिक बाल गायब हो गए हों या पतले हो गए हों।
  • बाल झड़ने की समस्या अधिक हो।

बालों के लिएः माइल्ड शैंपू से सिर को धोएं। गीले बालों को बांधने से बचें। हेयर स्टाइल को बेहतर बनाने के लिए सीरम की हल्की मालिश करनी चाहिए।

ड्रैंडफ और खुजलीः नमी, अत्यधिक पसीना और तेल जमा होने से रूसी की समस्या बढ़ती है।

उपयोगी टिप्सः हफ्ते में दो से तीन बार माइल्ड शैंपू का इस्तेमाल करें। बालों को साफ रखना चाहिए।

  • गीले बाल कमजोर होते हैं और आसानी से टूट सकते हैं। बालों को बांधने से पहले हमेशा उन्हें सुखा लेना चाहिए।
  • हेयर ड्रायर और स्ट्रेटनर का बार-बार इस्तेमाल करने से बाल कमजोर होते हैं।
  • ड्रेस की वजह से भी बाल टूट सकते हैं। व्यायाम, मेडिटेशन और पूरी नींद लेने से तनाव कम होता है।

त्वचा संबंधी समस्याएं और बचाव का तरीका

फंगल संक्रमणः मानसून में फंगल संक्रमण की समस्या सबसे अधिक आम समस्या है। पैरों, जांघों के बीच (ग्रोइन), बगल और गर्दन में पसीना जम होने से फंगस तेजी से पनपता है।

बचाव के टिप्सः

  • त्वचा को सूखा रखें।
  • हवादार सूती कपड़े पहनें।
  • गीले कपड़े तुरंत बदलें।
  • भीगने पर पैरों को अच्छी तरह सुखाएं।

मुंहासे और तैलीय त्वचाः नमी के कारण सेबेशियस ग्लैंड्स अधिक तेल बनाती हैं। यह पसीने, गंदगी और मृत त्वचा कोशिकाओं के साथ मिलकर रोमकूपों (पोर्स) को बंद कर देता है, जिससे मुंहासे निकलते हैं।

आम लक्षणः

  • पिंपल्स
  • ब्लैकहेड्स
  • व्हाइटहेड्स।

बचाव के लिए उपयोगी टिप्सः

  • हल्के क्लींजर से दिन में दो से तीन बार चेहरा धोएं।
  • बार-बार चेहरे को छूने से बचें।
  • नॉन-कॉमेडोजेनिक प्रोडक्ट्स का प्रयोग करें।

स्किन एलर्जी और चकत्तेः दूषित पानी, पसीना और नमी के चलते स्किन एलर्जी हो सकती है।

 लक्षणः

  • खुजली
  • लाल चकत्ते
  • गीले कपड़ों या डिटर्जेंट से कांटेक्ट डर्मेटाइटिस भी हो सकता है।

घमौरियां: त्वचा के नीचे पसीना ग्रंथियों के ब्लॉक होने से घमौरियां पैदा हो सकती है।

लक्षणः

  • छोटे-छोटे लाल दाने
  • खुजली
  • जलन महसूस होना।

त्वचा की सफाई की बनाएं आदत

बारिश के दिनों में आर्द्रता बढ़ने के साथ फंगस की समस्या बहुत आम हो जाती है। यह आमतौर पर ग्रोइन और पीठ के हिस्सों में यह समस्या अधिक देखने में आती है। जो लोग नियमित रूप से स्नान नहीं करते या जिन लोगों की आदत में पर्याप्त साफ-सामग्री नहीं होती, उन लोगों को त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं।

उपाय यही है कि दिन में दो बार साबुन और गर्म साबुन लगाकर स्नान करना चाहिए। साथ ही, सूती और हवादार कपड़े पहनना त्वचा के लिए सही रहता है। ध्यान रखें कि त्वचा के साथ गर्दन का कपड़ा भी तय होना चाहिए। इसी तरह, बालों में रूसी की समस्या इन दिनों अधिक होती है।

इसके लिए समय-समय पर एंटी-डैंड्रफ शैंपू का प्रयोग कर सकते हैं। आमतौर पर बालों के तेजी से टूटने के पीछे आनुवंशिक कारण जिम्मेदार होते हैं, जिसे एंड्रोजेनिक एलोपेशिया कहते हैं। पर्याप्त सफाई नहीं होने जैसे कारणों से भी बाल झड़ते हैं।

डिहाइड्रेशन से बढ़ सकती है आपकी परेशानी

इन दिनों लोग पानी पीना कम कर देते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का जोखिम बढ़ता है। पहले से परेशानी का सामना कर रहे लोगों के लिए यह अधिक खतरनाक स्थिति है। डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान, आइए जानें-

जब बात डिहाइड्रेशन की हो तो ज्यादातर लोग इसे केवल गर्मियों की समस्या मानते हैं। जबकि, यह मानसून के दिनों में भी उतना ही आम रहता है। डिहाइड्रेशन से न केवल पाचन तंत्र कमजोर होता है, बल्कि शरीर में पोषक तत्वों का अवशोषण भी सही ढंग से नहीं हो पाता। इसके कारण चक्कर, कमजोरी, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन के साथ लो-ब्लडप्रेशर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

कैसे जोखिम बढ़ाता है डिहाइड्रेशनः तेज धूप वाली गर्मी की तुलना में उमस भरी गर्मी ज्यादा खतरनाक होती है। जहां धूप वाली गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है तो वहीं उमस भरी गर्मी में पहले से ही हवा में नमी होने से पसीना आसानी से नहीं सूखता। इससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। प्यास नहीं लगने के कारण लोग पानी का सेवन व जरूरी इलेक्ट्रोलाइट की कमी का ध्यान नहीं रख पाते, जिससे परेशानी बढ़ सकती है।

इलेक्ट्रोलाइट संतुलन पर रहे ध्यानः इस मौसम में वायरल संक्रमण की समस्या आम हो जाती है। डायरिया और फूड प्वाइजनिंग का भी खतरा रहता है। इनसे शरीर में पानी की कमी हो सकती है, इसलिए पानी पीना ही पर्याप्त नहीं है, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी जरूरी है। इससे मांसपेशियों की सक्रियता, नर्व सिग्नल और दिल की धड़कनों को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। इनका संतुलन बनाए रखने के लिए आहार में दही, केला, नारियल पानी जैसी चीजों को शामिल करना चाहिए।

संकेतों को पहचानें

  • बार-बार मुंह सूखना, गहरे रंग का यूरिन या कम यूरिन आना।
  • सिरदर्द, थकान, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस होना।
  • दिल की धड़कन तेज होना।
  • लो ब्लड प्रेशर और बेहोशी आदि।

बचाव के लिए जरूरी सलाह

  • प्यास न लगने पर भी समय-समय पर पानी व इलेक्ट्रोलाइट्स की थोड़ी मात्रा लेते रहें।
  • ओआरएस का घोल ले सकते हैं।
  • यदि उल्टी, दस्त की समस्या है, चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
  • घर पर नारियल पानी, ओआरएस, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन करना चाहिए।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।