
डिमेंशिया से बचाने वाली कुछ आदतें Publish Date : 19/09/2026
डिमेंशिया से बचाने वाली कुछ आदतें
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
क्या आप जरूरी सामान अक्सर भूल जाते हैं या पुरानी बातें याद करने में कठिनाई होने लगी है तो अपनी मानसिक सेहत को लेकर सतर्क होने की जरूरत है। यह समस्या डिमेंशिया का रूप ले सकती है।
वैसे तो उम्र बढ़ने पर डिमेंशिया के लक्षण दिखना कोई आश्चर्यजनक बात नहीं है, लेकिन अमेरिका में हुआ एक हालिया अध्ययन बताता है कि जिन लोगों को हाइ बीपी व डायबिटीज जैसी समस्याएं हैं या धूम्रपान की आदत है, उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है। वहीं, जापान में हुए एक अध्ययन की मानें तो किचन के कार्यों में व्यस्त रहने वाले उम्र दराज लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
दोनों ही अध्ययन जागरूक, सतर्क और जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करने वाले हैं। इस संदर्भ में डब्ल्यूएचओ का व्यापक दिशानिर्देश है कि हाइ बीपी व डायबिटीज से बचाव और स्मोकिंग से दूरी आपके डिमेंशिया के जोखिम को कम कर सकती है।
कारणों को समझें और सतर्कता बढ़ाएं : डिमेंशिया उम्र के साथ बढ़ने वाली समस्या तो है ही, यह आनुवंशिक भी होती है। हालांकि, कुछ चीजों को कंट्रोल कर आप डिमेंशिया को आठ से दस साल तक टाल सकते हैं, जैसे ब्लडप्रेशर में उतार-चढ़ाव, डायबिटीज, मोटापा, स्मोकिंग, लगातार बैठे रहने, अधिक समय तक टीवी देखने, अल्कोहल के सेवन, घंटों मोबाइल पर रील आदि देखने, निष्क्रिय जीवनशैली जैसी आदतों में सुधार।
इसके साथ ही बढ़ता प्रदूषण, अपर्याप्त नींद और तनाव जैसे कारण भी इसकी गंभीरता बढ़ा रहे हैं। अगर सुनने में परेशानी हो रही है तो हियरिंग एड का प्रयोग न करना। देखने में परेशानी हो रही है तो चश्में का प्रयोग न करना, भोजन में पौष्टिक चीजों की कमी होना, शरीर में सैचुरेटेड फैट का अधिक जाना, रेडमीट, फ्रोजन फूड्स या जंक फूड्स, अधिक नमक भी डिमेंशिया की आशंका को बढ़ाते हैं।
कुछ सीखते रहने की डालें आदत : अगर बढ़ती उम्र में भी कुछ न कुछ नई चीजें सीखते रहें तो डिमेंशिया से काफी हद तक राहत मिल सकती है। दरअसल, दिमाग के खाली रहने या दिमागी सक्रियता नहीं होने से यह समस्या बढ़ती है। अगर आपको कोई शौक नहीं है तो खाना बनाना सीखिए। इससे दिमाग सतर्क रहता है। नई-नई रेसिपी सीखिए।
आप चाहें तो कोई नई भाषा या कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भी सीख सकते हैं। रोज समाचार पत्र पढ़ना और किताबें पढ़ना भी फायदेमंद है। टहलना, साइकिल चलाना, योग-व्यायाम डिमेंशिया की आशंका कम करता है।
स्वस्थ आहार है जरूरी : सीमित मात्रा में सरसों का शुद्ध तेल, देसी घी, ऑलिव आयल का प्रयोग करना लाभदायक है। हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन डिमेंशिया में काफी कारगर है। मौसमी सब्जियां, अंकुरित अनाज और श्रीअन्न आपकी मानसिक सेहत को दुरुस्त रखने में सहायक हैं।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।