
स्नान किस प्रकार से करना उचित है Publish Date : 02/05/2026
स्नान किस प्रकार से करना उचित है
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
शरीर से निकलने वाली गंदगी पसीने के रूप में सारे शरीर के रोमकूपों से निकलती है और रोमकूपों पर जम जाती है। यदि इसे नियमित रूप से साफ न किया जाये तो यह बदबू और अन्य बीमारियों को जन्म देती है, अतः अच्छे स्वास्थ्य हेतु यह बहुत आवश्यक है कि नियमित स्नान द्वारा शरीर को साफ रखा जाए। विदेशों में जहां आयधिक ठण्ड़ के कारण नियमित स्नान करना लगभग असंभव ही होता है, बहुत से स्थानों पर सामूहिक या वैयक्तिक स्नानागर बने होते हैं। उचित शुल्क देकर वहां के निवासी इन स्नानागारों का प्रयोग करते हैं। इन स्थानों पर गरम पानी साबुन व तौलिये की भी व्यवस्था होती है।
हालांकि, भारत में अभी ऐसे स्नानागारों का विशेष प्रचलन नहीं है। नहाने का सर्वाधिक आनन्द नदी या नहर में आता है। स्वास्थ्य हेतु भी बहते पानी में नहाना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि बहता हुआ पानी अपने साथ गंदगी को भी बहाकर ले जाता है। यदि ऐसा पानी उपलब्ध न हो तो नल वा कुएं का जल भी नहाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है। स्नान सदैव खुले जल से करना चाहिए। शरीर पर दो चार डिब्बे पानी डालकर स्नान पूर्ण न समझ लें। ऐसे स्नान का कोई लाभ नहीं होता है।
स्नान कैसे करें

स्नान करने से पहले शरीर को तीलिये से अच्छी तरह रगड़ना चाहिए जिससे शरीर पर जमी गंदगी छूट जाए व रामकृप खुल जाएं। रगड़ना सिर से आरंभ करें सारे शरीर की रगड़े। तौलिये से शरीर इतना रगड़ें कि गमों अनुभव होने लगे। नहाने के लिए साबुन का प्रयोग नियमित रूप से उचित नहीं माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर को चिकनाई समाप्त हो जाती है। सप्ताह में एक या दो बार साबुन कर प्रयोग किया जा सकता है। यदि साबुन का नियमित प्रयोग करना हो तो शरीर पर हल्का तेल या चिकनाई आदि लगाते रहें। नहाते समय सबसे पहले पानी अपने सिर पर डालें। उसके पश्चात सारे शरीर पर पानी डालकर अच्छी तरह से अपने शरीर को रगड़ें।
नहाते समय यदि आपने बगलों में साबुन लगाया हो तो अच्छी तरह से तर और गीले तौलिए से उसे रगड़ें। जांघमूलों और यौनांगों को साबुन से अवश्य ही अच्छी तरह से साफ करना चाहिए। यदि कोई चर्म रोग और साबुन से एलर्जी हो तो नीम, चन्द्रिका या किसी अन्य मेडिकेटेड साबुन से नहाना उचित है। नहाना बहुत ही आवश्यक है। अपने पैरों को अच्छी तरह से रगड़ कर साफ करें, क्योंकि जमीन अच्छी तरह से के सम्पर्क में रहने के कारण पैरों में काफी गंदगी जमा हो जाती है। स्नान पूर्ण रूप से नग्न होकर करना चाहिए ताकि शरीर के सब अंग अलग साफ हो सके।
कब नहाए

प्रातः सुबह स्नान करने को सर्वोत्तम माना जाता है। यद्यपि बहुत लोग साथशाम और रात्री के समय भी स्नान करना पसंद करते हैं। कई लोग दिन में दो बार नहाते है। गर्मियों में रात को सोने से पहले नहाना अच्छी नींद लाने में सहायक होता है। जिन लोगों को आसानी से नींद नहीं आती है तो रात को सोने से पहले नहाने से उनकी यह शिकायत दूर हो सकती है। स्नान करने के पश्चात शरीर को तौलिए से अच्छी तरह से रगड़ कर साफ करें। अब देखिए आप अपने आपको कैसा चुस्त और अच्छा महसूस करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है। वास्तव में नहाने से हमारी मांसपेशियों की स्थिलता समाप्त होकर चुस्ती आती है और रक्त संचार की गति भी तीव्र हो जाती है।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
