एलोवेरा आधारित बहु-उपयोगी क्रीम      Publish Date : 27/03/2026

      एलोवेरा आधारित बहु-उपयोगी क्रीम

                                                                                               डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

परिचयः हमारी त्वचा हमारे शरीर का सुरक्षा कवच है और यह हमारे शरीर की सुरक्षा में एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जैसे कि शरीर को बाह्य वातावरण के दुष्प्रभावों से बचाना, शरीर के तापमान का नियंत्रण, शरीर के अंदर के द्रव्य पदार्थों का नियंत्रण, हानिकारक जीवाणुओं एवं रसायनों से शरीर की रक्षा करना और सूर्य की हानिकारक यूवी किरणों से शरीर को सुरक्षा प्रदान करना आदि। इसलिए त्वचा की उचित देखभाल करना बहुत आवश्यक होता है और मानव सदियों से ऐसा ही करता भी आया है। त्वचा की इसी आवश्यकता को देखते हुए ही अनेक सौन्दर्य प्रसाधनों का आविष्कार भी किया गया है और जो आज भी यह कार्य जारी है।

पुराने समय में त्वचा की सुरक्षा मुख्य रूप से वानस्पातिक पदार्थों जैसे जड़, फूल, पत्ती, गोंद और सगंध रेजिन का प्रयोग वानस्पातिक तेलों में मिलाकर किया जाता था। आधुनिक युग में विभिन्न प्रकार के एडिटिव्स तथा इमल्सीफाइंग तत्वों के आविष्कार और नई-नई तकनीक के चलते त्वचा की सुरक्षा हेतु क्रीम बनाना बहुत ही आसान हो गया है। सामान्यतः क्रीम इमल्सन की तरह होती हैं तथा यह संरचनात्मक रूप से द्रव अथवा अर्ध-ठोस के रूप में होती हैं, जिससे यह आसानी से फैल जाने में सक्षम होती हैं। वर्तमान में हर्बल आधारित सौन्दर्य प्रसाधन सामग्रियों का विश्व में एक बहुत बड़ा व्यापार इस अवधारणा के साथ चल रहा है कि हर्बल दवाएं सुरक्षित, कारगर और दुष्प्रभावों से मुक्त होती हैं। 

                                 

कोविड के बाद तो पूरे विश्व में हर्बल उत्पादों की मांग अनेक रोगों के उपचार, कुपोषण और सौन्दर्य सामग्रियों में अधिक हो गई है। विश्व की इसी आवश्यकता और मांग को देखते हुए अनेक हर्बल उत्पादों का आविष्कार किया जा रहा है, जो हमारे शरीर की सुरक्षा के लिए विभिन्न तरीकों से कारगर होने के साथ ही वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित है। हर्बल उत्पादों के इन्हीं रूपों में से एक है ‘हेलोयस्किन क्रीम’ जिसका सम्पूर्ण विवरण प्रस्तुत लेख में आगे प्रदान किया जा रहा है-

हेलोयस्किन क्रीम हमारी त्वचा की सुन्दरता को निखारने के अतिरिक्त अनेक औषधीय गुणों से भी भरपूर है। इस क्रीम में घावों को भरने की क्षमता है, शुष्क त्वचा की देखभाल और फँफूदीनाशक क्षमता भी उपलब्ध है। इस क्रीम का आविष्कार मुख्य रूप से सर्दियों के मौसम में त्वचा की सुरक्षा करने में प्रयुक्त की जाने वाली वनस्पतियों के मिश्रण से किया गया है। इस क्रीम का प्रयोग करने से त्वचा में कोई जलन आदि नहीं होती है और त्वचा मुलायम एवं आकर्षक बनी रहती है।

हेलोयस्किन क्रीम के प्रमुख तत्वः इस क्रीम मुख्य रूप से दो प्रकार के तत्वों का प्रयोग किया गया है। जिनमें से पहला है औषधीय पौध का सत्व, जिसमें घाव भरने की क्षमता होती है और दूसरा है सगंध तेल, जो कि फफूँदीनाशक होता है। इन दोनों तत्वों का प्रयोग करते हुए घीक्वार आधारित फार्मुलेशन का निर्माण किया गया है, जिसके चलते इसका प्रयोग करने से त्वचा मुलायम बनती है और त्वचा में नमी का स्तर उचित बना रहता है।

इस क्रीम की विशेषता पानी में इसकी घुलनशीलता है, अर्थात इसका प्रयोग करने से त्वचा पर चिपचिपापन नहीं रहता है और त्वचा को पानी से धो लेने के पश्चात् इसका कोई अवशेष त्वचा पर नहीं रहता है। क्रीम के इसी गुण के कारण इसकी मांग बहुत अधिक है। घीक्वार के गुणों से तो हम सभी लोग अच्छी तरह से परिचित हैं। घीक्वार का प्रयोग करने से त्वचा की अनेक विकृतियाँ जैसे-जलन, सनबर्न और त्वचा की सूजन को ठीक करने की इसमें अभूतपूर्व क्षमता मौजूद होती है।

                                

उपरोक्त गुणों के कारण ही हेलोयस्किन क्रीम को एक सम्पूर्ण क्रीम माना जाता है। इस क्रीम के घाव भरने की क्षमता का आकलन प्रयोगशाला में वैज्ञानिक परीक्षणों के माध्यम से किया गया है। इसके साथ ही इस क्रीम की फफूँद नाशक क्षमता का आकलन प्रयोगशाला में अनेक प्रकार की फफूँदी जैसे एस्पर्जिलस, कैन्डिडा, माइक्रोस्पोरम, एर्पार्मोफाइटान और ट्रॉइकोफाइटान आदि पर किया गया है।

इस प्रकार हेलोयस्किन क्रीम वैज्ञानिक प्रमाणिकता युक्त एवं औषधीय गुणों से युक्त त्वचा की सुरक्षा एवं उसके निखार के लिए अत्यन्त उपयोगी क्रीम है।

उत्पादन सम्भावनाएं: इस क्रीम में प्रयुक्त सगंध पौध की विशेष किस्म की सम्पूर्ण प्रौद्योगिकी सीमैप में उपलब्ध है, जिससे इस पौधें की खेती को अनवरत किया जा सकता है। इसके अलावा क्रीम में प्रयुक्त की जाने वाली अन्य प्रमुख औषधियों को बाजार से आसानी से लिया जा सकता है। सीमैप के द्वारा विकसित की गए हेलोयस्किन उत्पाद, लघु उद्योग के लिए भी सर्वथा उपयुक्त हैं क्योंकि इस हेलोय को बनाने में प्रयुक्त किए गए सभी तत्व आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और इन्हें एकत्र करने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने के लिए किसी विशेष पूँजी के निवेश की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इस उत्पाद की पूर्ण तकनीक उद्यमियों को हस्तांतरित करने के लिए उपलब्ध है।   

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।