
लीवर को स्वस्थ बनाए बनाए रखने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ Publish Date : 19/03/2026
लीवर को स्वस्थ बनाए बनाए रखने वाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
खानपान पर विशेष ध्यान ना देने की वजह से आजकल लोग अक्सर पाचन से जुड़ी समस्याओं से जूझते रहते हैं। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के अनुसार, पाचन से जुड़ी कई बीमारियां लीवर में खराबी के चलते ही होती हैं। हद से ज्यादा शराब पीना और अनियमित खानपान साथ में आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली आदि आपके लीवर के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। आयुर्वेद में ऐसी कई जड़ी-बूटियों के बारे में बताया गया है जो लीवर को स्वस्थ रखने में मदद करती हैं। आइए उन जड़ी-बूटियों और औषधियों के बारे में विस्तार से जानते हैं, अपने आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ0 सुशील शर्मा से-
1- भुंई आंवला या भूम्यामलकी लीवर के लिए श्रेष्ठ औषधिः
भूम्यामलकी एक प्रमुख आयुर्वेदिक औषधि है जो कि आसानी से घर के आस-पास छोटे पौधे के रूप मिल जाती है। यह जड़ी-बूटी लीवर को कई तरह के संक्रमण से बचाती है और लीवर की सेहत को स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करती है। लीवर से जुड़े रोगों से पीड़ित मरीजों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार भुंई आंवला का सेवन करना चाहिए।
भुंई आंवला या भूम्यामलकी के उपयोग करने का तरीकाः
लीवर के लिए भूम्यामलकी का उपयोग आप चूर्ण, कैप्सूल या टेबलेट के रूप में कर सकते हैं। हालांकि, आजकल इसका जूस भी बाजार में मिलता है। खुराक संबंधित जानकारी के लिए चिकित्सक से परामर्श लें।
लीवर की क्षमता को बढ़ाती है कुटकी
कुटकी एक जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग लीवर के रोगों में प्रमुख रूप से किया जाता है। आयुर्वेदिक विशेसज्ञों के अनुसार कुटकी लीवर की सूजन को कम करती है और साथ ही लीवर की कार्य क्षमता को भी बढ़ाती है, ऐसे में जो लोग लीवर में सूजन की समस्या से पीड़ित हैं उन्हें चिकित्सक से सलाह लेकर कुटकी का सेवन करना चाहिए।
कुटकी के सेवन का तरीका:
आजकल कुटकी का कैप्सूल या चूर्ण बाज़ार में आसानी से उपलब्ध है। हालांकि आपको आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए।
लीवर के लिए बेहद फायदेमंद है आंवलाः
आंवला आयुर्वेद में उपयोग की जाने वाली जानीमानी औषधि है। यह लीवर को डिटॉक्स करने का काम करती है। आंवला में पाए जाने वाले फायटो नुट्रिएंट्स लीवर की कार्य क्षमता को बढ़ाते हैं। एक्सपर्ट के अनुसार, आंवले में हेप्टो प्रोटेक्टिव क्षमताएं होती हैं जो लीवर की कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखती हैं।
आंवला के सेवन का तरीकाः
आंवले का उपयोग आप कई तरह से कर सकते हैं। सबसे आसान और कारगर तरीका है कि आप कच्चे आंवले का सेवन करना। इसके अलावा आज कल बाजार में आंवले के जूस, टेबलेट, कैप्सूल्स और कैंडी आसानी से मिल जाते हैं। आप रोजाना सीमित मात्रा में इनमें से किसी का भी सेवन कर सकते हैं।
लीवर को संक्रमण से बचाती है एलोवेराः
एलोवेरा में भरपूर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो लीवर को फ्री रेडिकल्स के कारण होने वाले कई तरह के नुकसान और संक्रमण से बचाते हैं। इस लिए प्रतिदिन सीमित मात्रा में एलोवेरा का सेवन करने से लीवर लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।
एलोवेरा का सेवन कैसे करेः
एलोवेरा का उपयोग सबसे ज्यादा जूस के रूप में किया जाता है। इसके लिए प्रतिदिन प्रातः काल खाली पेट दो तीन छोटी चम्मच एलोवेरा जूस में इतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करना चाहिए।
लीवर की सूजन को घटाती है पुनर्नवाः

आज के समय में अधिकांश लोग लीवर में सूजन की समस्या से परेशान रहते हैं। अगर आप भी उनमें से एक हैं तो पुनर्नवा आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। पुनर्नवा एक जड़ी-बूटी है जिसका इस्तेमाल औषधि के रूप में किया जाता है। यह लीवर की सूजन कम करती है साथ ही लीवर से जुड़े अन्य रोगों के खतरे को भी कम करती है।
पुनर्नवा के सेवन का तरीकाः
पुनर्नवा चूर्ण, कैप्सूल, टेबलेट और सिरप के रूप में उपलब्ध है. आप किसी भी रूप में इसका सेवन कर सकते हैं। इसे कितनी मात्रा में लेना है इसके लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
लीवर को स्वस्थ रखने के लिए आयुर्वेदिक दवाः
अगर आप फैटी लीवर या लीवर में संक्रमण की समस्या से पीड़ित हैं या इनसे बचना चाहते हैं तो ऐसी आयुर्वेदिक औषधि चुनें जिसमें यहां बताई गई जड़ी-बूटियां मौजूद हों। टाटा 1उह तेजस्या लीवर केयर सिरप में भुंई आंवला, पुनर्नवा, आंवला के अलावा भृंगराज, हरीतकी और चित्रक जैसी जड़ी-बूटियां भी शामिल हैं, जो लीवर को हर तरह के संक्रमण से बचाती हैं। इस सिरप को पीने से लीवर स्वस्थ रहता है। मेटाबोलिज़्म मजबूत होता है और पाचन तंत्र में सुधार होता है।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
