
पाचन तंत्र कों मजबूत करने में कारगर है इमली Publish Date : 13/03/2026
पाचन तंत्र कों मजबूत करने में कारगर है इमली
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
- इमली में मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
- इमली चटनी और सांभर के जैसे पारम्पारिक व्यंजनों का मुख्य हिस्सा होती है।
खट्टी-मीठी इमली न केवल खाने के जायके को बढ़ाती है, बल्कि सेहत के लिए भी यह बहुत लाभकारी सिद्व होती है। इमली पाचन सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने के साथ ही बढ़ते वजन की समस्या को भी कंट्रोल करने में सहायक होती है।

बिहार सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग के अनुसार, इमली केवल एक बड़ा और छायादार वृक्ष ही नहीं है, अपितु इसके साथ ही यह स्वाद एवं सेहत का खजाना भी होता है। यह मानव प्रजाति के लिए प्रकृति की एक अनमोल देन है, जो घने जंगलों, खेतों और सड़कों के किनारे आदि स्थानों पर आसानी से देखने को मिल जाते हैं। इमली की झुकी हुई शाखाएं और भूरे रंग की खुरदरी छाल इसकी पहचान को आसान बनाती है।
इमली का खट्टा-मीठा गूदा भोजन के स्वाद को बढ़ाने में सहायक होता है और साथ ही चटनी एवं सांभर के जैसे पाम्परिक व्यांजनों का अभिन्न अंग है।
इमली के विभिन्न औषधीय गुणों के चलते पारम्परिक चिकित्सा के अन्तर्गत इसका उपयोग सदियों से किया जाता रहा है। एंटीऑक्सीडेन्ट्स से भरपूर होने के चलते यह हमारे शरीर की सूजन को कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायता करती है।

इसके साथ ही इमली में मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर और विटामिन सी भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
इमली का सेवन करने से हमारी पाचन क्रिया में सुधार होता है, कब्ज की समस्या से रहात मिलती है तथा अपने लैक्सेटिव प्रभाव के चलते पेट को साफ रखती है। यह हमारे कोलेस्ट्रॉल के लेवल को भी कम करती है और बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाती है, जिसके कारण हमारा ह्दय भी स्वस्थ बना रहता है।
इमली में मौजूद पॉलीफिनॉल्स और फ्लेवोनायड्स सूजन को कम करने में सहायक होते हैं और लिवर को सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके अलावा यह ब्लड शुगर के संतुलन में भी सहायक हो सकती है और वजन को नियंत्रित करने में भी सहायक होती है।
इमली की पत्तियाँ, छाल और बीज आदि लगभग सभी भाग औष्से सेवन करना सेहत की दृष्टि से लाभकारी माना जाता है, किन्तु इसका सेवन संतुलित मात्रा में ही करना उचित रहता है।
इमली का सेवन अधिक मात्रा में करने सक दस्त या पेट में दर्द के जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। वहीं, मधुमेह के रोगियों को इमली का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह करना बहुत आवश्यक होता है।
इमली के एसिडिक होने के कारण इसका सेवन करने से दांतों के इनेमल को नुकसान पहुँच सकता है, इसलिए इसका सेवन करने के बाद ताजे पानी से कुल्ला अवश्य करना चाहिए। इसके साथ ही, गर्भवती अथवा स्तनपान कराने वाली महिलाओं, किडनी के रोगी या किडनी के उपचार के लिए दवा का सेवन करने वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह से ही इमली का सेवन करना चाहिए।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
