सर्वाइकल का आयुर्वेदिक उपचार      Publish Date : 06/01/2026

                     सर्वाइकल का आयुर्वेदिक उपचार

                                                                                                                                           डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

यदि आपको रोज़ सुबह उठने पर गर्दन भारी लगती है, हल्की-सी हरकत में भी खिंचाव महसूस होता है या कभी-कभी सिर घूमने लगता है, तो यह सिर्फ थकावट नहीं हो सकती हो सकता है कि आपको सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस की शुरुआत हो रही हो। यह स्थिति वर्तमान समय में बहुत आम हो गई है, विशेष रूप से ऐसे लोगों में जो ज़्यादातर समय लैपटॉप या मोबाइल पर झुके रहते हैं।

बहुत से लोग इसे मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं। परिणाम स्वरूप धीरे-धीरे गर्दन का दर्द बढ़ता है, सिर दर्द, चक्कर और हाथों तक झनझनाहट जैसी समस्याएँ शुरू हो जाती हैं।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस क्या है?

                                                    

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्दन की रीढ़ की हड्डियों (cervical vertebrae) और डिस्क में घिसाव या बदलाव आ जाता है। यह आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होता है, लेकिन आजकल यह 30 की उम्र के बाद ही दिखने लगता है, खासकर उन लोगों में जो दिन भर एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं।

इस स्थिति में:

  • गर्दन की हड्डियाँ और डिस्क कमजोर हो जाती हैं।
  • नसों पर दबाव पड़ता है।
  • ब्लड फ्लो बाधित होता है।
  • मांसपेशियों में जकड़न और सूजन आ जाती है।

सर्वाइकल के लक्षण:

अगर आपको निम्नलिखित लक्षण बार-बार दिखते हैं, तो सर्वाइकल की जांच करवाना ज़रूरी है:

  • गर्दन में लगातार दर्द या जकड़न।
  • सिर को दाएँ-बाएँ घुमाने में परेशानी।
  • चक्कर आना या सिर घूमना।
  • सिर दर्द, विशेष रूप से गर्दन से शुरू होकर माथे तक फैलने वाला दर्द।
  • कंधों, बाहों या उंगलियों में झनझनाहट।
  • बैठने, झुकने या अचानक उठने पर अस्थिरता।
  • नींद के बाद गर्दन का भारी लगना।

गर्दन दर्द और चक्कर के कारण:

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें से कुछ आधुनिक जीवनशैली की देन हैं:

  • एक ही मुद्रा में लंबे समय तक बैठना, विशेषकर लैपटॉप/मोबाइल आदि का अधिक प्रयोग करना।
  • तकिये की गलत ऊँचाई या कठोरता।
  • नियमित एक्सरसाइज़ की कमी।
  • गर्दन की अचानक चोट या झटका।
  • अत्यधिक तनाव और अनिद्रा।
  • विटामिन B12 या D की कमी।

आयुर्वेद के अनुसार सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस

आयुर्वेद में सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस को 'Manyasthambha' कहा गया है, जो वात दोष की असंतुलन की स्थिति से जुड़ा होता है। जब वात बढ़ता है, तो यह शरीर के स्नायु (nerves), अस्थि (bones), और संधियों (joints) को प्रभावित करता है— जिससे दर्द, जकड़न और गति में रुकावट महसूस होती है।

वात दोष का यह असंतुलन तब और बढ़ जाता है जब शरीर में अग्नि मंद पड़ जाती है और आम (toxins) का निर्माण होता है। ये टॉक्सिन्स शरीर में जाकर उन हिस्सों में जमा हो जाते हैं जहाँ पहले से कमजोरी होती है जैसे कि गर्दन की रीढ़। आयुर्वेदिक इलाज का उद्देश्य है वात को संतुलित करना, आम को बाहर निकालना और मांसपेशियों व हड्डियों को पोषण देना।

आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ और औषधियाँ जो सर्वाइकल में राहत देती हैं-

                                                          

1. अश्वगंधा: तनाव कम करती है, नसों को मज़बूती देती है और वात को शांत करती है।

कैसे लें: रोज़ रात को 1/2 चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गुनगुने दूध के साथ लें।

2. दशमूल काढ़ा: शरीर के सभी जोड़ और नसों की सूजन कम करता है।

कैसे लें: सुबह-शाम भोजन के बाद 30 ml लें।

3. गुग्गुलु योग (योगराज गुग्गुलु, त्रयोदशांग गुग्गुलु): यह वातनाशक है और हड्डियों व जोड़ों को मज़बूत बनाता है।

कैसे लें: चिकित्सक की सलाह से दिन में दो बार लें।

4. रसराजेश्वर रस और ब्रह्म रसायन: यह नसों की कार्यक्षमता को बढ़ाता है और थकान व सुन्नपन में राहत देता है।

कैसे लें: योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में सेवन करें।

आयुर्वेदिक थेरपीज़ गर्दन दर्द में जो हैं प्रभावकारी:

1. अब्यंग (तेल मालिश) : दर्द और जकड़न में आराम देता है, रक्त संचार बढ़ाता है।

2. स्वेदन (स्टीम थैरेपी): जमे हुए वात को बाहर निकालने में मदद करता है।

3. गृध्रसी बस्ती (औषधीय एनीमा) : वात दोष के उत्सर्जन के लिए बेहद प्रभावी।

4. नस्य (नाक के ज़रिए औषध प्रयोग) : सिर और गर्दन के क्षेत्र में रक्त संचार सुधारने में मदद करता है।

योग और व्यायाम जो गर्दन को मज़बूत करें

भुजंगासन (Cobra Pose): रीढ़ की लचीलापन बढ़ाता है।

मकरासन (Crocodile pose): गर्दन और पीठ के तनाव को कम करता है।

गोमुखासन (Cow Face Pose): कंधों और गर्दन को खोलता है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम: मानसिक तनाव कम करता है।

ध्यान रखें: योग का अभ्यास प्रशिक्षित व्यक्ति की निगरानी में ही करें, ताकि गलत पोस्चर से समस्या और न बढ़े।

दैनिक आदतों में बदलाव करें

  • ऊँचे या बहुत सख़्त तकिए का प्रयोग न करें।
  • हर 30 मिनट बाद गर्दन और कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करें।
  • मोबाइल को हमेशा आँखों की ऊँचाई पर रखें।
  • लैपटॉप पर काम करते समय कुर्सी और टेबल की ऊँचाई सही रखें।
  • ज़्यादा भारी बैग या वजन को कंधों पर न डालें।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।