
पैरालिसिस का आयुर्वेदिक उपचार Publish Date : 31/12/2025
पैरालाईसिस का आयुर्वेदिक उपचार
डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा
पैरालाईसिस में शरीर का एक अंग का काम न करना या कई मामलों में शरीर समस्त रूप में ही कार्य करना बंद कर देता है, इससे पीड़ित व्यक्ति को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा यह समस्या क्यों अपना शिकार बनाती है, इसके बारे में हम आज के अपने इस आर्टिकल में आपको बताएंगे और साथ ही पैरालाईसिस की समस्या को ख़त्म करने में आयुर्वेद का क्या स्थान है, इसके बारे में भी विस्तार से चर्चा करेंगे-
वास्तव में क्या होता है पैरालाईसिस?
यदि हम पैरालाईसिस की बात करें तो इसे सामान्य भाषा में लकवा मारना कहते है। वहीं अगर आयुर्वेद पद्धति की बात करें तो उसमे पैरालाईसिस को पक्षाघात के नाम से जाना जाता है, जो कि एक वायु के कुपित होने से होने वाला रोग है।
पैरालाईसिस के कारण प्रभावित व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रियाएं बदलने लगती है, जैसे बोलने की क्षमता और महसूस करने की क्षमता का क्षीण या समाप्त होना आदि।
वही आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से वात दोष बढ़ने या अंसतुलित होने पर शारीरिक अंगों में कुछ हलचल कम होने लगती है, जो पैरालाईसिस का कारण बन जाता है। वही ऐसा तब होता है जब शरीर में गंभीर चोट या नस कमजोर होने लगती है।
पैरालाईसिस के कारण क्या है?

पैरालाईसिस के विभिन्न कारण हो सकते है, जैसे-
- स्ट्रोक की समस्या।
- अटैक का आना।
- कान में दर्द की समस्या का उत्पन्न होना।
- हड्डी, पीठ या सिर में तेज चोट का लगना।
- मस्तिष्क संबंधी विकार होना।
- स्पाइनल कॉर्ड से जुड़ी परेशानी।
- शरीर के किसी एक हिस्से जैसे हाथ या पैर या कभी-कभी दोनों में कमजोरी महसूस होना।
- जन्म से ही मांसपेशियों का कमजोर होना आदि।
इसके कारणों को जानने के बाद जल्द ही पैरालाईसिस के इलाज के लिए अच्छे आयुर्वेदिक डॉक्टर का चयन करना चाहिए।
पैरालाईसिस के लक्षणः
इसके लक्षण निम्नलिखित रूप के हो सकते है, जैसेः-
- अत्यधिक कमजोरी महसूस करना।
- किसी भी शारीरिक हिस्से का सुस्त पड़ जाना।
- बोलने में कठिनाई का सामना करना।
- कोई भी बात या सामने वाले व्यक्ति द्वारा कही गई बातों को ना समझना या समझने में दिक्कत का सामना करना।
- देखने में तकलीफ का सामना करना आदि।
आयुर्वेद में पैरालाईसिस के लिए सहायक उपचारः-

नास्य पद्धति:
नास्य की आयुर्वेदिक दवाई उन लोगों के लिए काफी सहायक मानी जाती है जिन लोगों को हाल ही में लकवे की शिकायत हुई है। दरअसल नास्य पद्धति के दौरान पेशेंट के नाक में औषधीय तेल या अर्क डाला जाता है। वही यह पद्धति तब बेहद कारगर मानी जाती है, जब व्यक्ति को कफ की वजह से लकवे की समस्या हुई हो।
मृदु विरेचन विधि:
लकवे की परेशानी को ठीक करने के लिए मृदु विरेचन विधि काफी बेहतरीन मानी जाती है।
बस्ती विधि:
पैरालाईसिस का आयुर्वेदिक इलाज बस्ती विधि में भी सम्मलित है।
स्वेदन विधि:
स्वेदन भी बेहतरीन आयुर्वेदिक दवा है पैरालाईसिस की।
स्नेहन पद्धति:
स्नेहन की पद्यति में पैरालाईसिस मरीज को टेबल पर लिटा दिया जाता है फिर उसके पूरे शरीर की मालिश की जाती है।
इन उपरोक्त उपचारों को करवाने के लिए बेस्ट आयुर्वेदिक क्लिनिक का ही चयन करना उचित रहता है।
लकवे के मरीज को खुद के खाने का कैसे ध्यान रखना चाहिए?
- गाजर, चुकंदर, ओकरा को अपनी डेली डायट में शामिल करें।
- हमेशा ताजा खाना खाएं।
- ऐसे खाद्य पदार्थों को डेली डायट में शामिल करें जो मीठे, खट्टे और नमकीन हों।
- नट्स का सेवन रोजाना करें।
- चावल और गेंहू से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।
