खांसी-जुकाम की समस्या में लाभकारी है “बनफशा”      Publish Date : 16/12/2025

          खांसी-जुकाम की समस्या में लाभकारी है “बनफशा”

                                                                                                                                                                              डॉ0 सुशील शर्मा एवं मुकेश शर्मा

बनफशा श्वसन प्रणाली से जुड़ी विभिन्न समस्याओं जैसे, सर्दी-खांसी और जुकाम आदि को ठीक करने में सहायता करता है।

बनफशा एक ऐसी औषधि है, जिसका उपयोग प्राचीन काल से ही आयुर्वेद में किया जा रहा है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण होते हैं, जो एक्जिमा, मुहांसों और दाग-धब्बों को दूर करने में मदद करते हैं। यह श्वसन प्रणाली से जुड़ी समस्याओं जैसे, सर्दी-खांसी और जुकाम को ठीक करता है।

आप इसके सूखे पत्ते या फूल से बने काढ़े या सिरप का सेवन कर सकते हैं। इसके फूल में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जिससे गले की सूजन कम होती है। पित्त बढ़ने पर बनफशा के काढे का सेवन करने से लाभ मिलता है।

इसका सेवन करने से शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इसमें एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो गठिया की समस्या में उपयोगी माने जाते हैं। ये दर्द और सूजन को कम करने में सहायता करते हैं। इसके तेल से सिर की मालिश करने से थकान, तनाव और चिंता दूर होती है। नीद भी अच्छी आती है।

                                                                  

बनफशा की चाय बनाकर पीने से ऊर्जा मिलती है और थकान दूर होती है। खांसी और अनिद्रा होने पर बच्चों को आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के बाद इसका सिरप दिया जा सकता है।.

बनफशा (वायोला ओडोरेटा) सर्दी-खांसी, गले की खराश, बुखार और श्वसन संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में बहुत फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्यून-बूस्टिंग गुण होते हैं, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं और सूजन कम करते हैं; यह पाचन, त्वचा, बालों और हृदय स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और मूत्रवर्धक गुण होते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने और विभिन्न विकारों से बचाने में मदद करते हैं।

बनफशा के प्रमुख स्वास्थ्य लाभः

श्वसन स्वास्थ्यः खांसी, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा और जुकाम के लक्षणों से तुरंत राहत दिलाता है, गले की खराश कम करता है और बलगम को साफ करने में मदद करता है।

प्रतिरक्षा प्रणालीः विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और मौसमी बीमारियों के प्रभाव से बचाता है।

पाचन में सहायकः पाचक एंजाइमों को उत्तेजित करता है, कब्ज और अन्य पेट संबंधी समस्याओं से राहत दिलाता है और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है।

त्वचा और बालः इसके तेल का उपयोग त्वचा की जलन, घावों और संक्रमणों को ठीक करने के लिए किया जाता है, जबकि यह बालों को मजबूती और नमी भी देता है।

हृदय स्वास्थ्यः कोलेस्ट्रॉल को कम करने और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

सूजन और दर्दः गठिया, बदन दर्द और सिरदर्द जैसी स्थितियों में सूजन और दर्द को कम करता है।

तनाव और नींदः तंत्रिका के तनाव और अनिद्रा को कम करने में सहायक है, जिससे अच्छी नींद आती है।

कैंसर-रोधी गुणः इसमें कैंसर-रोधी क्षमता वाले कुछ यौगिक पाए गए हैं।

विषहरण (Detoxification): यह एक मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है, शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, और रक्त को शुद्ध करता है।

उपयोग के तरीकेः

इसे चाय, शरबत, काढ़ा, या तेल के रूप में उपयोग किया जा सकता है; इसके फूल और पत्तियों का उपयोग हर्बल दवाओं को बनाने में किया जाता है।

सावधानियाँ:

                                                                   

बनफशा आमतौर पर सुरक्षित है, लेकिन संवेदनशील व्यक्तियों में एलर्जी पैदा कर सकता है। अतः इसका उपयोग करने से पहले किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना एक उचित कदम है।

लेखकः डॉ0 सुशील शर्मा, जिला मेरठ के कंकर खेड़ा क्षेत्र में पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से एक सफल आयुर्वेदिक चिकित्सक के रूप में प्रक्टिस कर रहे हैं।